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चंद्रमा का प्रथम भाव में गोचर: जन्म कुंडली में प्रभाव और महत्व जन्म कुंडली में चंद्रमा का प्रथम भाव में गोचर जातक के जीवन पर गहरा और व्यापक प्रभाव डालता है। चंद्रमा मन, भावनाओं, मातृत्व, स्मृति और आंतरिक संतोष का कारक है। जब यह चंद्रमा प्रथम भाव में स्थित होता है, तो जातक का व्यक्तित्व, स्वभाव, शारीरिक गठन और जीवन दृष्टि पूरी तरह से चंद्रिका अर्थात चंद्रमा के गुणों से प्रभावित होती है। प्रथम भाव जातक के शरीर, आत्मा, स्वभाव, मुखमंडल, आरंभिक जीवन और समाज में उसकी छवि का प्रतिनिधित्व करता है। चंद्रमा के इस भाव में आने से जातक के मनोभाव, आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और सामाजिक व्यवहार में चंद्रमा की कोमल, गतिशील और भावनात्मक ऊर्जा स्पष्ट दिखाई देती है। शास्त्रीय संदर्भ: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में कहा गया है कि बारह भावों के प्रभावों का निर्धारण Ascendant और चंद्रमा से किया जाता है। अतः ग्रहों और भावों के परिणामों का आकलन Ascendant से ही किया जाता है। (BPHS 66. 13-15) प्रथम भाव में चंद्रमा का सार: जातक का व्यक्तित्व भावनात्मक, संवेदनशील और आत्मीय होता है। ऐसा जातक दूसरों की भावनाओं को शीघ्रता से समझ लेता है और अक्सर दूसरों की भावनात्मक आवश्यकताओं की पूर्ति में स्वयं को समर्पित कर देता है। --- व्यक्तित्व पर प्रभाव स्वभाव और मनोदशा प्रथम भाव में चंद्रमा वाले जातक का स्वभाव अत्यंत कोमल, संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण होता है। ऐसे जातक भावनात्मक रूप से बहुत मजबूत होते हैं, किंतु बाहरी रूप से वे शांत और विनम्र दिखाई देते हैं। उनका मन बहुत जल्दी बदलता है और वे तुरंत भावनात्मक रूप से प्रभावित हो जाते हैं। वे दूसरों के प्रति बहुत दयालु और देखभाल करने वाले होते हैं, किंतु कभी-कभी अपनी भावनाओं पर नियंत्रण खो बैठने के कारण वे मनोवैज्ञानिक तनाव का शिकार हो सकते हैं। शारीरिक बनावट और स्वास्थ्य शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, चंद्रमा का संबंध शरीर के पेट, स्तन, गर्भाशय, रक्त, मन, मनोविकार और जल तत्व से है। प्रथम भाव में चंद्रमा वाले जातक का शरीर आमतौर पर गोल-मटोल, गोरा या गोरे जैसा रंग, कोमल त्वचा और सुंदर मुखमंडल होता है। ऐसे जातकों को पेट संबंधी समस्याएं, अपच, जलोदर, मानसिक तनाव, नींद में कमी, स्मृति कमजोर होना या मनोदशा में उतार-चढ़ाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशिष्ट स्वास्थ्य जोखिम: यदि चंद्रमा निर्बल या अशुभ ग्रहों से पीड़ित हो, तो जातक को मानसिक रोग, सिरदर्द, मिर्गी, चक्कर आना या नींद विकार हो सकते हैं। (BPHS 52. 7-10) आत्मविश्वास और सामाजिक छवि प्रथम भाव में चंद्रमा वाले जातक समाज में बहुत लोकप्रिय होते हैं। वे दूसरों के प्रति दयालु और सहयोगी होते हैं, जिसके कारण उन्हें आसानी से सम्मान और प्रशंसा मिलती है। उनका व्यवहार इतना आकर्षक होता है कि लोग उनकी तरफ आकर्षित होते हैं। हालांकि, यदि चंद्रमा अशुभ ग्रहों से पीड़ित हो, तो जातक का आत्मविश्वास कम हो सकता है और वे दूसरों पर निर्भर रहने लग सकते हैं। --- विभिन्न लग्नों पर चंद्रमा के प्रभाव प्रथम भाव में चंद्रमा के प्रभाव को समझने के लिए लग्न का ज्ञान आवश्यक है। लग्न जातक की जन्म समय पर आकाश में दिखाई देने वाली राशि होती है, जो उसके पूरे व्यक्तित्व और जन्म कुंडली के ढांचे को निर्धारित करती है। मेष लग्न मेष लग्न में चंद्रमा वाले जातक अत्यंत भावुक और साहसी होते हैं। उनका स्वभाव अग्नि तत्व के कारण जोशीला और उत्साही होता है, किंतु चंद्रमा की कोमलता उन्हें संवेदनशील भी बनाती है। ऐसे जातक दूसरों के प्रति बहुत उत्साही होते हैं और नए कार्यों को आरंभ करने में आगे रहते हैं। स्वास्थ्य के लिए, उन्हें सिरदर्द, चक्कर आना या पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। वृषभ लग्न वृषभ लग्न में चंद्रमा वाले जातक बहुत ही स्थिर और धैर्यवान होते हैं। उनका स्वभाव भूमि तत्व के कारण ठोस और व्यवहारिक होता है, किंतु चंद्रमा की कोमलता उन्हें भावनात्मक रूप से बहुत गहरे बना देती है। ऐसे जातक दूसरों के प्रति बहुत सहयोगी और देखभाल करने वाले होते हैं। स्वास्थ्य के लिए, उन्हें गले में समस्याएं, थायराइड, मोटापा या पाचन संबंधी विकार हो सकते हैं। मिथुन लग्न मिथुन लग्न में चंद्रमा वाले जातक बहुत ही बुद्धिमान और संवाद कौशल वाले होते हैं। उनका स्वभाव वायु तत्व के कारण गतिशील और चंचल होता है, किंतु चंद्रमा की कोमलता उन्हें भावनात्मक रूप से बहुत संवेदनशील बना देती है। ऐसे जातक दूसरों के मन को पढ़ने में माहिर होते हैं। स्वास्थ्य के लिए, उन्हें फेफड़ों संबंधी समस्याएं, नर्वस डिस्ऑर्डर, नींद में कमी या मनोविकार हो सकते हैं। कर्क लग्न विशेष स्थिति: कर्क लग्न में चंद्रमा का होना जातक के लिए बहुत ही शुभ होता है, क्योंकि कर्क चंद्रमा की ही राशि है। ऐसे जातक अत्यंत भावुक, संवेदनशील और पारिवारिक होते हैं। उनका व्यक्तित्व पूरी तरह से चंद्रमा के गुणों से प्रभावित होता है। स्वास्थ्य के लिए, उन्हें पेट संबंधी समस्याएं, भावनात्मक तनाव, नींद विकार या मनोदशा में उतार-चढ़ाव हो सकते हैं। सिंह लग्न सिंह लग्न में चंद्रमा वाले जातक अत्यंत गौरवशाली और आत्मविश्वासी होते हैं। उनका स्वभाव अग्नि तत्व के कारण जोशीला और उत्साही होता है, किंतु चंद्रमा की कोमलता उन्हें दूसरों के प्रति बहुत दयालु और देखभाल करने वाला बना देती है। ऐसे जातक नेतृत्व क्षमता वाले होते हैं। स्वास्थ्य के लिए, उन्हें हृदय संबंधी समस्याएं, रक्तचाप, सिरदर्द या भावनात्मक तनाव हो सकते हैं। कन्या लग्न कन्या लग्न में चंद्रमा वाले जातक बहुत ही व्यवहारिक, बुद्धिमान और सेवा-भाव वाले होते हैं। उनका स्वभाव पृथ्वी तत्व के कारण ठोस और व्यवहारिक होता है, किंतु चंद्रमा की कोमलता उन्हें दूसरों की भावनाओं के प्रति बहुत संवेदनशील बना देती है। ऐसे जातक दूसरों की मदद करने में खुशी महसूस करते हैं। स्वास्थ्य के लिए, उन्हें पाचन संबंधी समस्याएं, पेट में गैस, कब्ज, या भावनात्मक तनाव हो सकते हैं। --- चंद्रमा की दशा के दौरान प्रभाव जब जातक की कुंडली में चंद्रमा की दशा चल रही होती है, तो उसके जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर चंद्रमा का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। दशा काल में जातक की भावनाओं, मनोदशा, स्वास्थ्य, परिवार, आर्थिक स्थिति और करियर पर चंद्रमा के गुणों का प्रभाव पड़ता है। चंद्रमा दशा के दौरान जीवन के प्रमुख क्षेत्र मनोदशा और भावनाएं: दशा काल में जातक की मनोदशा बहुत उतार-चढ़ाव वाली हो सकती है। उन्हें भावनात्मक रूप से बहुत संवेदनशील अनुभव हो सकता है। परिवार और संबंध: परिवार के सदस्यों के साथ संबंध मधुर होंगे, किंतु कभी-कभी छोटी-छोटी बातों पर मनमुटाव भी हो सकता है। स्वास्थ्य: यदि चंद्रमा अशुभ ग्रहों से पीड़ित है, तो स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उभर सकती हैं। विशेष रूप से पेट, स्तन, गर्भाशय, मन या मनोविकार संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। करियर और धन: दशा काल में करियर में उन्नति के अवसर मिल सकते हैं, किंतु यदि चंद्रमा अशुभ स्थिति में है, तो करियर में उतार-चढ़ाव भी हो सकता है। आंतरिक शांति और आत्मविकास: दशा काल जातक के लिए आत्मिक विकास का भी समय होता है। ध्यान, योग और भावनात्मक संतुलन के प्रयासों से लाभ मिल सकता है। दशा अवधि: चंद्रमा की दशा आमतौर पर 10 वर्षों तक चलती है। इस दौरान जातक को अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखने और संतुलन बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए। --- चंद्रमा के गोचर के दौरान प्रभाव जब चंद्रमा प्रथम भाव में गोचर करता है, तो जातक के जीवन पर अल्पकालिक प्रभाव दिखाई देता है। गोचर काल लगभग 2. 25 दिनों तक रहता है, किंतु इस दौरान जातक की मनोदशा, स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक व्यवहार पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। गोचर काल में प्रभाव मनोदशा: गोचर काल में जातक की मनोदशा बहुत उतार-चढ़ाव वाली हो सकती है। वे भावनात्मक रूप से बहुत संवेदनशील हो सकते हैं। स्वास्थ्य: यदि जातक को पहले से ही पेट, स्तन, गर्भाशय या मन संबंधी समस्याएं हैं, तो गोचर काल में वे बढ़ सकती हैं। पारिवारिक संबंध: परिवार के सदस्यों के साथ संबंध मधुर होंगे, किंतु कभी-कभी छोटी-छोटी बातों पर मनमुटाव भी हो सकता है। आर्थिक स्थिति: गोचर काल में आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव हो सकता है। धन संबंधी निर्णय लेने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। सामाजिक व्यवहार: गोचर काल में जातक का व्यवहार दूसरों के प्रति बहुत आकर्षक और संवेदनशील हो सकता है, जिसके कारण उन्हें समाज में सम्मान मिल सकता है। गोचर काल में सावधानियां: गोचर काल में जातक को अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए और महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचना चाहिए। --- उपाय: शास्त्रीय आधार पर चंद्रमा के अशुभ प्रभावों का निवारण यदि जातक की कुंडली में चंद्रमा अशुभ स्थिति में है या अशुभ ग्रहों से पीड़ित है, तो शास्त्रीय ज्योतिष ग्रंथों में वर्णित उपायों का पालन किया जा सकता है। ये उपाय चंद्रमा के अशुभ प्रभावों को कम करने और जातक के जीवन में संतुलन लाने में सहायक होते हैं। मंत्र जाप चंद्र बीज मंत्र: "ॐ सोम सोमाय नमः"। इसका नियमित जाप चंद्रमा के अशुभ प्रभावों को कम करने में सहायक होता है। देव्यर्थ चंद्र मंत्र: "ॐ श्री चन्द्राय नमः"। यह मंत्र चंद्रमा की शांति और मनोदशा में संतुलन के लिए प्रभावी माना जाता है। रत्न और धारण मोती (मुक्ता): चंद्रमा का रत्न मोती है। मोती को सोने की अंगूठी में स्थापित कर धारण करना चाहिए। किंतु मोती धारण करने से पहले जातक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चंद्रमा उनकी कुंडली में शुभ स्थिति में है। अशुभ स्थिति में मोती धारण करने से लाभ के बजाय हानि हो सकती है। श्वेत वस्त्र: सफेद वस्त्र धारण करने से चंद्रमा का प्रभाव शांत होता है। विशेष रूप से सोमवार के दिन सफेद वस्त्र धारण करना लाभकारी होता है। दान और पुण्य दूध और चावल का दान: चंद्रमा से संबंधित वस्तुओं जैसे दूध, चावल, सफेद वस्त्र, चीनी, मोती आदि का दान करना शुभ माना जाता है। गाय को दान: गाय को दान करना चंद्रमा के अशुभ प्रभावों को कम करने का एक शक्तिशाली उपाय है। पूजा और अनुष्ठान चंद्र देव की पूजा: चंद्र देव की पूजा करने से चंद्रमा का प्रभाव शांत होता है। सोमवार के दिन चंद्र देव की पूजा करना विशेष रूप से लाभकारी होता है। नारियल का दान: नारियल का दान करना चंद्रमा के अशुभ प्रभावों को दूर करने का एक प्रभावी उपाय है। उपायों का महत्व: शास्त्रीय ग्रंथों में कहा गया है कि चंद्रमा के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए उपायों का पालन करना आवश्यक है। किंतु उपायों का पालन करने से पहले जातक को अपने गुरु या ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य करना चाहिए। (BPHS 52.
जन्म कुंडली में चंद्रमा का प्रथम भाव में गोचर जातक के जीवन पर गहरा और व्यापक प्रभाव डालता है। चंद्रमा मन, भावनाओं, मातृत्व, स्मृति और आंतरिक संतोष का कारक है। जब यह चंद्रमा प्रथम भाव में स्थित होता है, तो जातक का व्यक्तित्व, स्वभाव, शारीरिक गठन और जीवन दृष्टि पूरी तरह से चंद्रिका अर्थात चंद्रमा के गुणों से प्रभावित होती है।
प्रथम भाव जातक के शरीर, आत्मा, स्वभाव, मुखमंडल, आरंभिक जीवन और समाज में उसकी छवि का प्रतिनिधित्व करता है। चंद्रमा के इस भाव में आने से जातक के मनोभाव, आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और सामाजिक व्यवहार में चंद्रमा की कोमल, गतिशील और भावनात्मक ऊर्जा स्पष्ट दिखाई देती है।
शास्त्रीय संदर्भ: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में कहा गया है कि बारह भावों के प्रभावों का निर्धारण Ascendant और चंद्रमा से किया जाता है। अतः ग्रहों और भावों के परिणामों का आकलन Ascendant से ही किया जाता है। (BPHS 66.13-15)
प्रथम भाव में चंद्रमा का सार: जातक का व्यक्तित्व भावनात्मक, संवेदनशील और आत्मीय होता है। ऐसा जातक दूसरों की भावनाओं को शीघ्रता से समझ लेता है और अक्सर दूसरों की भावनात्मक आवश्यकताओं की पूर्ति में स्वयं को समर्पित कर देता है।
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प्रथम भाव में चंद्रमा वाले जातक का स्वभाव अत्यंत कोमल, संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण होता है। ऐसे जातक भावनात्मक रूप से बहुत मजबूत होते हैं, किंतु बाहरी रूप से वे शांत और विनम्र दिखाई देते हैं। उनका मन बहुत जल्दी बदलता है और वे तुरंत भावनात्मक रूप से प्रभावित हो जाते हैं।
वे दूसरों के प्रति बहुत दयालु और देखभाल करने वाले होते हैं, किंतु कभी-कभी अपनी भावनाओं पर नियंत्रण खो बैठने के कारण वे मनोवैज्ञानिक तनाव का शिकार हो सकते हैं।
शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, चंद्रमा का संबंध शरीर के पेट, स्तन, गर्भाशय, रक्त, मन, मनोविकार और जल तत्व से है। प्रथम भाव में चंद्रमा वाले जातक का शरीर आमतौर पर गोल-मटोल, गोरा या गोरे जैसा रंग, कोमल त्वचा और सुंदर मुखमंडल होता है।
ऐसे जातकों को पेट संबंधी समस्याएं, अपच, जलोदर, मानसिक तनाव, नींद में कमी, स्मृति कमजोर होना या मनोदशा में उतार-चढ़ाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
विशिष्ट स्वास्थ्य जोखिम: यदि चंद्रमा निर्बल या अशुभ ग्रहों से पीड़ित हो, तो जातक को मानसिक रोग, सिरदर्द, मिर्गी, चक्कर आना या नींद विकार हो सकते हैं। (BPHS 52.7-10)
प्रथम भाव में चंद्रमा वाले जातक समाज में बहुत लोकप्रिय होते हैं। वे दूसरों के प्रति दयालु और सहयोगी होते हैं, जिसके कारण उन्हें आसानी से सम्मान और प्रशंसा मिलती है। उनका व्यवहार इतना आकर्षक होता है कि लोग उनकी तरफ आकर्षित होते हैं।
हालांकि, यदि चंद्रमा अशुभ ग्रहों से पीड़ित हो, तो जातक का आत्मविश्वास कम हो सकता है और वे दूसरों पर निर्भर रहने लग सकते हैं।
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प्रथम भाव में चंद्रमा के प्रभाव को समझने के लिए लग्न का ज्ञान आवश्यक है। लग्न जातक की जन्म समय पर आकाश में दिखाई देने वाली राशि होती है, जो उसके पूरे व्यक्तित्व और जन्म कुंडली के ढांचे को निर्धारित करती है।
मेष लग्न में चंद्रमा वाले जातक अत्यंत भावुक और साहसी होते हैं। उनका स्वभाव अग्नि तत्व के कारण जोशीला और उत्साही होता है, किंतु चंद्रमा की कोमलता उन्हें संवेदनशील भी बनाती है। ऐसे जातक दूसरों के प्रति बहुत उत्साही होते हैं और नए कार्यों को आरंभ करने में आगे रहते हैं।
स्वास्थ्य के लिए, उन्हें सिरदर्द, चक्कर आना या पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
वृषभ लग्न में चंद्रमा वाले जातक बहुत ही स्थिर और धैर्यवान होते हैं। उनका स्वभाव भूमि तत्व के कारण ठोस और व्यवहारिक होता है, किंतु चंद्रमा की कोमलता उन्हें भावनात्मक रूप से बहुत गहरे बना देती है। ऐसे जातक दूसरों के प्रति बहुत सहयोगी और देखभाल करने वाले होते हैं।
स्वास्थ्य के लिए, उन्हें गले में समस्याएं, थायराइड, मोटापा या पाचन संबंधी विकार हो सकते हैं।
मिथुन लग्न में चंद्रमा वाले जातक बहुत ही बुद्धिमान और संवाद कौशल वाले होते हैं। उनका स्वभाव वायु तत्व के कारण गतिशील और चंचल होता है, किंतु चंद्रमा की कोमलता उन्हें भावनात्मक रूप से बहुत संवेदनशील बना देती है। ऐसे जातक दूसरों के मन को पढ़ने में माहिर होते हैं।
स्वास्थ्य के लिए, उन्हें फेफड़ों संबंधी समस्याएं, नर्वस डिस्ऑर्डर, नींद में कमी या मनोविकार हो सकते हैं।
विशेष स्थिति: कर्क लग्न में चंद्रमा का होना जातक के लिए बहुत ही शुभ होता है, क्योंकि कर्क चंद्रमा की ही राशि है। ऐसे जातक अत्यंत भावुक, संवेदनशील और पारिवारिक होते हैं। उनका व्यक्तित्व पूरी तरह से चंद्रमा के गुणों से प्रभावित होता है।
स्वास्थ्य के लिए, उन्हें पेट संबंधी समस्याएं, भावनात्मक तनाव, नींद विकार या मनोदशा में उतार-चढ़ाव हो सकते हैं।
सिंह लग्न में चंद्रमा वाले जातक अत्यंत गौरवशाली और आत्मविश्वासी होते हैं। उनका स्वभाव अग्नि तत्व के कारण जोशीला और उत्साही होता है, किंतु चंद्रमा की कोमलता उन्हें दूसरों के प्रति बहुत दयालु और देखभाल करने वाला बना देती है। ऐसे जातक नेतृत्व क्षमता वाले होते हैं।
स्वास्थ्य के लिए, उन्हें हृदय संबंधी समस्याएं, रक्तचाप, सिरदर्द या भावनात्मक तनाव हो सकते हैं।
कन्या लग्न में चंद्रमा वाले जातक बहुत ही व्यवहारिक, बुद्धिमान और सेवा-भाव वाले होते हैं। उनका स्वभाव पृथ्वी तत्व के कारण ठोस और व्यवहारिक होता है, किंतु चंद्रमा की कोमलता उन्हें दूसरों की भावनाओं के प्रति बहुत संवेदनशील बना देती है। ऐसे जातक दूसरों की मदद करने में खुशी महसूस करते हैं।
स्वास्थ्य के लिए, उन्हें पाचन संबंधी समस्याएं, पेट में गैस, कब्ज, या भावनात्मक तनाव हो सकते हैं।
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ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली विशिष्ट है — कैरियर का समय, रिश्ते, स्वास्थ्य, जो भी पूछना चाहें।
अपनी कुंडली से पूछें →जब जातक की कुंडली में चंद्रमा की दशा चल रही होती है, तो उसके जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर चंद्रमा का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। दशा काल में जातक की भावनाओं, मनोदशा, स्वास्थ्य, परिवार, आर्थिक स्थिति और करियर पर चंद्रमा के गुणों का प्रभाव पड़ता है।
दशा अवधि: चंद्रमा की दशा आमतौर पर 10 वर्षों तक चलती है। इस दौरान जातक को अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखने और संतुलन बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।
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जब चंद्रमा प्रथम भाव में गोचर करता है, तो जातक के जीवन पर अल्पकालिक प्रभाव दिखाई देता है। गोचर काल लगभग 2.25 दिनों तक रहता है, किंतु इस दौरान जातक की मनोदशा, स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक व्यवहार पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
गोचर काल में सावधानियां: गोचर काल में जातक को अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए और महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचना चाहिए।
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यदि जातक की कुंडली में चंद्रमा अशुभ स्थिति में है या अशुभ ग्रहों से पीड़ित है, तो शास्त्रीय ज्योतिष ग्रंथों में वर्णित उपायों का पालन किया जा सकता है। ये उपाय चंद्रमा के अशुभ प्रभावों को कम करने और जातक के जीवन में संतुलन लाने में सहायक होते हैं।
उपायों का महत्व: शास्त्रीय ग्रंथों में कहा गया है कि चंद्रमा के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए उपायों का पालन करना आवश्यक है। किंतु उपायों का पालन करने से पहले जातक को अपने गुरु या ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य करना चाहिए। (BPHS 52.7-10)
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प्रथम भाव में चंद्रमा वाले जातक अत्यंत संवेदनशील, भावुक और दूसरों की भावनाओं को समझने वाले होते हैं। उनका व्यक्तित्व कोमल, आकर्षक और देखभाल करने वाला होता है। ऐसे जातक समाज में लोकप्रिय होते हैं और दूसरों के प्रति बहुत दयालु होते हैं।
प्रथम भाव में चंद्रमा होने से जातक को पेट संबंधी समस्याएं, पाचन विकार, मनोदशा में उतार-चढ़ाव या नींद संबंधी विकार हो सकते हैं। किंतु यदि चंद्रमा शुभ स्थिति में है, तो स्वास्थ्य सामान्य रहता है। अशुभ स्थिति में स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।
कर्क लग्न में चंद्रमा का होना जातक के लिए बहुत ही शुभ होता है, क्योंकि कर्क चंद्रमा की ही राशि है। ऐसे जातक अत्यंत भावुक, संवेदनशील और पारिवारिक होते हैं। उनका व्यक्तित्व पूरी तरह से चंद्रमा के गुणों से प्रभावित होता है।
चंद्रमा की दशा
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