आपकी कुंडली, आपके सवाल — 20-मिनट का परामर्श
कुंडली कुछ सेकंडों में बन जाती है। 20 मिनट आपके लिए हैं — शास्त्रीय ज्योतिष से पूछें कि आपकी ग्रह स्थितियाँ कैरियर, रिश्तों, समय, और बाकी जीवन के लिए क्या कहती हैं।
परामर्श शुरू करें — ₹49 →✓ निःशुल्क 5-मिनट·✓ ₹199₹49 में 20-मिनट का परामर्श·✓ कोई OTP नहीं·✓ 10 भारतीय भाषाएँ
चंद्रमा का द्वितीय भाव में स्थापन: भावार्थ एवं प्रभाव ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, चंद्रमा (चंद्र) मन, भावनाओं, माता, मानसिक स्थिति एवं संचार का कारक ग्रह है। जब चंद्रमा द्वितीय भाव में स्थित होता है, तो जातक की वाणी, धन, पारिवारिक संरचना, भोजन एवं शिक्षा पर गहरा प्रभाव पड़ता है। द्वितीय भाव व्यक्ति के मूल धन, परिवार, मुखमंडल, वाणी एवं शिक्षा का प्रतिनिधित्व करता है। इस भाव में चंद्रमा की स्थिति जातक को भावुक, वाक्पटु, धनोपार्जन में कुशल एवं परिवार के प्रति समर्पित बनाती है। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (BPHS) के अनुसार, द्वितीय भाव में चंद्रमा की स्थिति जातक को मधुरभाषी, सुंदर मुखमंडल वाला एवं परिवार के प्रति प्रेम रखने वाला बनाती है। साथ ही, यह भाव व्यक्ति के वाणी एवं धन से संबंधित व्यवसायों में सफलता प्रदान करता है। (BPHS 3. 42) फलदीपिका (Phaladeepika) में वर्णित है कि द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को धन-सम्पत्ति में वृद्धि, परिवार में प्रेम एवं सम्मान, तथा शिक्षा में विशेष रुचि प्रदान करता है। साथ ही, यह भाव व्यक्ति के वाणी एवं लेखन कौशल को भी प्रभावित करता है। (Phaladeepika 7. 14) विभिन्न राशियों में चंद्रमा के द्वितीय भाव का प्रभाव चंद्रमा की स्थिति राशि के अनुसार जातक के जीवन पर अलग-अलग प्रभाव डालती है। निम्नलिखित तालिका में विभिन्न राशियों में द्वितीय भाव में चंद्रमा के प्रभाव का वर्णन किया गया है: मेष राशि: इस स्थिति में जातक धन-सम्पत्ति में वृद्धि, परिवार में प्रेम एवं सम्मान, तथा वाणी में स्पष्टता प्राप्त करता है। जातक का मुखमंडल सुंदर एवं तेजस्वी होता है। वृषभ राशि: जातक को स्थायी धन-सम्पत्ति, परिवार में प्रेम एवं सौहार्द, तथा शिक्षा में विशेष रुचि प्राप्त होती है। जातक का मुखमंडल सुंदर एवं आकर्षक होता है। मिथुन राशि: इस स्थिति में जातक वाणी एवं लेखन कौशल में निपुण, धन-सम्पत्ति में वृद्धि, तथा परिवार में प्रेम एवं सम्मान प्राप्त करता है। जातक का मुखमंडल तेजस्वी एवं आकर्षक होता है। कर्क राशि: जातक को परिवार में प्रेम एवं सौहार्द, धन-सम्पत्ति में वृद्धि, तथा शिक्षा में विशेष रुचि प्राप्त होती है। जातक का मुखमंडल सुंदर एवं तेजस्वी होता है। सिंह राशि: इस स्थिति में जातक धन-सम्पत्ति में वृद्धि, परिवार में प्रेम एवं सम्मान, तथा वाणी में स्पष्टता प्राप्त करता है। जातक का मुखमंडल तेजस्वी एवं आकर्षक होता है। कन्या राशि: जातक को स्थायी धन-सम्पत्ति, परिवार में प्रेम एवं सौहार्द, तथा शिक्षा में विशेष रुचि प्राप्त होती है। जातक का मुखमंडल सुंदर एवं तेजस्वी होता है। तुला राशि: इस स्थिति में जातक वाणी एवं लेखन कौशल में निपुण, धन-सम्पत्ति में वृद्धि, तथा परिवार में प्रेम एवं सम्मान प्राप्त करता है। जातक का मुखमंडल तेजस्वी एवं आकर्षक होता है। वृश्चिक राशि: जातक को परिवार में प्रेम एवं सौहार्द, धन-सम्पत्ति में वृद्धि, तथा शिक्षा में विशेष रुचि प्राप्त होती है। जातक का मुखमंडल सुंदर एवं तेजस्वी होता है। धनु राशि: इस स्थिति में जातक धन-सम्पत्ति में वृद्धि, परिवार में प्रेम एवं सम्मान, तथा वाणी में स्पष्टता प्राप्त करता है। जातक का मुखमंडल तेजस्वी एवं आकर्षक होता है। मकर राशि: जातक को स्थायी धन-सम्पत्ति, परिवार में प्रेम एवं सौहार्द, तथा शिक्षा में विशेष रुचि प्राप्त होती है। जातक का मुखमंडल सुंदर एवं तेजस्वी होता है। कुंभ राशि: इस स्थिति में जातक वाणी एवं लेखन कौशल में निपुण, धन-सम्पत्ति में वृद्धि, तथा परिवार में प्रेम एवं सम्मान प्राप्त करता है। जातक का मुखमंडल तेजस्वी एवं आकर्षक होता है। मीन राशि: जातक को परिवार में प्रेम एवं सौहार्द, धन-सम्पत्ति में वृद्धि, तथा शिक्षा में विशेष रुचि प्राप्त होती है। जातक का मुखमंडल सुंदर एवं तेजस्वी होता है। व्यक्तित्व, करियर, संबंध एवं स्वास्थ्य पर प्रभाव व्यक्तित्व पर प्रभाव द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक के व्यक्तित्व पर निम्नलिखित प्रभाव डालता है: भावुक एवं संवेदनशील: जातक अत्यधिक भावुक एवं संवेदनशील होता है। उसे दूसरों की भावनाओं एवं विचारों को समझने की क्षमता होती है। वाक्पटु एवं संवाद कौशल: जातक की वाणी मधुर एवं प्रभावशाली होती है। उसे दूसरों को प्रभावित करने की क्षमता होती है। परिवार के प्रति प्रेम एवं समर्पण: जातक परिवार के सदस्यों के प्रति अत्यधिक प्रेम एवं समर्पण रखता है। उसे परिवार के सदस्यों से विशेष लगाव होता है। स्थिर एवं धैर्यवान: जातक में धैर्य एवं स्थिरता का गुण होता है। उसे कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहने की क्षमता होती है। धन-सम्पत्ति के प्रति आकर्षण: जातक को धन-सम्पत्ति के प्रति विशेष आकर्षण होता है। उसे धनोपार्जन में सफलता मिलती है। करियर पर प्रभाव द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक के करियर पर निम्नलिखित प्रभाव डालता है: वाणी एवं लेखन से संबंधित व्यवसाय: जातक को वाणी, लेखन, पत्रकारिता, शिक्षण, एवं संचार से संबंधित व्यवसायों में सफलता मिलती है। धन-सम्पत्ति से संबंधित व्यवसाय: जातक को बैंकिंग, बीमा, वित्त, एवं व्यापार जैसे व्यवसायों में सफलता मिलती है। परिवार एवं समाज से संबंधित व्यवसाय: जातक को समाज सेवा, परोपकार, एवं परिवार से संबंधित व्यवसायों में सफलता मिलती है। स्थिर एवं लाभकारी व्यवसाय: जातक को ऐसे व्यवसायों में सफलता मिलती है जो स्थिर एवं लाभकारी होते हैं। सारावली के अनुसार, द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को स्थायी धन-सम्पत्ति एवं लाभकारी व्यवसाय प्रदान करता है। साथ ही, यह भाव व्यक्ति के वाणी एवं लेखन कौशल को भी प्रभावित करता है। (Saravali 12. 25) संबंध एवं विवाह पर प्रभाव द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक के संबंध एवं विवाह पर निम्नलिखित प्रभाव डालता है: पारिवारिक प्रेम एवं सौहार्द: जातक के परिवार में प्रेम एवं सौहार्द बना रहता है। उसे परिवार के सदस्यों से विशेष लगाव होता है। विवाह में प्रेम एवं सम्मान: जातक के विवाह में प्रेम एवं सम्मान बना रहता है। उसे जीवनसाथी से विशेष प्रेम एवं सम्मान मिलता है। संबंधों में स्थिरता: जातक के संबंधों में स्थिरता एवं दीर्घायु होती है। उसे दूसरों के साथ अच्छे संबंध बनाने की क्षमता होती है। भावनात्मक संबंध: जातक के संबंध भावनात्मक होते हैं। उसे दूसरों के साथ भावनात्मक संबंध बनाने की क्षमता होती है। स्वास्थ्य पर प्रभाव द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक के स्वास्थ्य पर निम्नलिखित प्रभाव डालता है: मुख एवं गर्दन से संबंधित स्वास्थ्य: जातक को मुख, दांत, गर्दन, एवं गले से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। पाचन तंत्र से संबंधित स्वास्थ्य: जातक को पाचन तंत्र से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। मानसिक स्वास्थ्य: जातक अत्यधिक भावुक एवं संवेदनशील होता है। उसे मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। स्त्री रोग (महिलाओं के लिए): महिलाओं को स्त्री रोग से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। फलदीपिका में वर्णित है कि द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को मुख, दांत, गर्दन, एवं गले से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं प्रदान कर सकता है। साथ ही, यह भाव व्यक्ति के पाचन तंत्र एवं मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। (Phaladeepika 8.
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, चंद्रमा (चंद्र) मन, भावनाओं, माता, मानसिक स्थिति एवं संचार का कारक ग्रह है। जब चंद्रमा द्वितीय भाव में स्थित होता है, तो जातक की वाणी, धन, पारिवारिक संरचना, भोजन एवं शिक्षा पर गहरा प्रभाव पड़ता है। द्वितीय भाव व्यक्ति के मूल धन, परिवार, मुखमंडल, वाणी एवं शिक्षा का प्रतिनिधित्व करता है। इस भाव में चंद्रमा की स्थिति जातक को भावुक, वाक्पटु, धनोपार्जन में कुशल एवं परिवार के प्रति समर्पित बनाती है।
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (BPHS) के अनुसार, द्वितीय भाव में चंद्रमा की स्थिति जातक को मधुरभाषी, सुंदर मुखमंडल वाला एवं परिवार के प्रति प्रेम रखने वाला बनाती है। साथ ही, यह भाव व्यक्ति के वाणी एवं धन से संबंधित व्यवसायों में सफलता प्रदान करता है।
(BPHS 3.42)
फलदीपिका (Phaladeepika) में वर्णित है कि द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को धन-सम्पत्ति में वृद्धि, परिवार में प्रेम एवं सम्मान, तथा शिक्षा में विशेष रुचि प्रदान करता है। साथ ही, यह भाव व्यक्ति के वाणी एवं लेखन कौशल को भी प्रभावित करता है।
(Phaladeepika 7.14)
चंद्रमा की स्थिति राशि के अनुसार जातक के जीवन पर अलग-अलग प्रभाव डालती है। निम्नलिखित तालिका में विभिन्न राशियों में द्वितीय भाव में चंद्रमा के प्रभाव का वर्णन किया गया है:
द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक के व्यक्तित्व पर निम्नलिखित प्रभाव डालता है:
द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक के करियर पर निम्नलिखित प्रभाव डालता है:
सारावली के अनुसार, द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को स्थायी धन-सम्पत्ति एवं लाभकारी व्यवसाय प्रदान करता है। साथ ही, यह भाव व्यक्ति के वाणी एवं लेखन कौशल को भी प्रभावित करता है।
(Saravali 12.25)
द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक के संबंध एवं विवाह पर निम्नलिखित प्रभाव डालता है:
द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक के स्वास्थ्य पर निम्नलिखित प्रभाव डालता है:
फलदीपिका में वर्णित है कि द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को मुख, दांत, गर्दन, एवं गले से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं प्रदान कर सकता है। साथ ही, यह भाव व्यक्ति के पाचन तंत्र एवं मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।
(Phaladeepika 8.9)
ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली विशिष्ट है — कैरियर का समय, रिश्ते, स्वास्थ्य, जो भी पूछना चाहें।
अपनी कुंडली से पूछें →लग्न कुंडली में चंद्रमा की स्थिति लग्न राशि के अनुसार जातक के जीवन पर अलग-अलग प्रभाव डालती है। निम्नलिखित विवरण विभिन्न लग्नों में द्वितीय भाव में चंद्रमा के प्रभाव का वर्णन करता है:
मेष लग्न में द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को धन-सम्पत्ति में वृद्धि, परिवार में प्रेम एवं सम्मान, तथा वाणी में स्पष्टता प्रदान करता है। जातक का मुखमंडल सुंदर एवं तेजस्वी होता है।
वृषभ लग्न में द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को स्थायी धन-सम्पत्ति, परिवार में प्रेम एवं सौहार्द, तथा शिक्षा में विशेष रुचि प्रदान करता है। जातक का मुखमंडल सुंदर एवं आकर्षक होता है।
मिथुन लग्न में द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को वाणी एवं लेखन कौशल में निपुण, धन-सम्पत्ति में वृद्धि, तथा परिवार में प्रेम एवं सम्मान प्रदान करता है। जातक का मुखमंडल तेजस्वी एवं आकर्षक होता है।
कर्क लग्न में द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को परिवार में प्रेम एवं सौहार्द, धन-सम्पत्ति में वृद्धि, तथा शिक्षा में विशेष रुचि प्रदान करता है। जातक का मुखमंडल सुंदर एवं तेजस्वी होता है।
सिंह लग्न में द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को धन-सम्पत्ति में वृद्धि, परिवार में प्रेम एवं सम्मान, तथा वाणी में स्पष्टता प्रदान करता है। जातक का मुखमंडल तेजस्वी एवं आकर्षक होता है।
कन्या लग्न में द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को स्थायी धन-सम्पत्ति, परिवार में प्रेम एवं सौहार्द, तथा शिक्षा में विशेष रुचि प्रदान करता है। जातक का मुखमंडल सुंदर एवं तेजस्वी होता है।
तुला लग्न में द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को वाणी एवं लेखन कौशल में निपुण, धन-सम्पत्ति में वृद्धि, तथा परिवार में प्रेम एवं सम्मान प्रदान करता है। जातक का मुखमंडल तेजस्वी एवं आकर्षक होता है।
वृश्चिक लग्न में द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को परिवार में प्रेम एवं सौहार्द, धन-सम्पत्ति में वृद्धि, तथा शिक्षा में विशेष रुचि प्रदान करता है। जातक का मुखमंडल सुंदर एवं तेजस्वी होता है।
धनु लग्न में द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को धन-सम्पत्ति में वृद्धि, परिवार में प्रेम एवं सम्मान, तथा वाणी में स्पष्टता प्रदान करता है। जातक का मुखमंडल तेजस्वी एवं आकर्षक होता है।
मकर लग्न में द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को स्थायी धन-सम्पत्ति, परिवार में प्रेम एवं सौहार्द, तथा शिक्षा में विशेष रुचि प्रदान करता है। जातक का मुखमंडल सुंदर एवं तेजस्वी होता है।
कुंभ लग्न में द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को वाणी एवं लेखन कौशल में निपुण, धन-सम्पत्ति में वृद्धि, तथा परिवार में प्रेम एवं सम्मान प्रदान करता है। जातक का मुखमंडल तेजस्वी एवं आकर्षक होता है।
मीन लग्न में द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को परिवार में प्रेम एवं सौहार्द, धन-सम्पत्ति में वृद्धि, तथा शिक्षा में विशेष रुचि प्रदान करता है। जातक का मुखमंडल सुंदर एवं तेजस्वी होता है।
चंद्रमा की दशा अवधि जातक के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब चंद्रमा की दशा चल रही होती है, तो जातक को द्वितीय भाव से संबंधित लाभ एवं चुनौतियाँ प्राप्त होती हैं। चंद्रमा की दशा की अवधि 10 वर्ष होती है।
बृहत् जातक के अनुसार, चंद्रमा की दशा में जातक को धन-सम्पत्ति में वृद्धि, परिवार में प्रेम एवं सम्मान, तथा शिक्षा में विशेष रुचि प्राप्त होती है। साथ ही, जातक को वाणी एवं लेखन कौशल में निपुणता भी प्राप्त होती है।
(Brihat Jataka 12.3)
फलदीपिका में वर्णित है कि चंद्रमा की दशा में जातक को स्थायी धन-सम्पत्ति एवं लाभकारी व्यवसाय प्राप्त होता है। साथ ही, यह दशा जातक को परिवार में प्रेम एवं सौहार्द भी प्रदान करती है।
(Phaladeepika 10.7)
चंद्रमा की दशा के दौरान जातक को निम्नलिखित प्रभाव प्राप्त होते हैं:
आपकी कुंडली। आपके सवाल। शास्त्रीय ज्योतिष पर आधारित 20-मिनट का परामर्श।
परामर्श शुरू करें — ₹199 ₹49