आपकी कुंडली, आपके सवाल — 20-मिनट का परामर्श
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परिचय: कुंडली मिलान का महत्व कुंडली मिलान हिंदू विवाह में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें दो व्यक्तियों की कुंडली का विश्लेषण किया जाता है ताकि उनके विवाह की संभावना और सफलता का अनुमान लगाया जा सके। यह प्रक्रिया अष्टकूट मिलान पर आधारित है, जिसमें आठ कूटों का विश्लेषण किया जाता है (BPHS 3. 42)। अष्टकूट मिलान: धनु और मेष राशि का विश्लेषण वर्ण कूट वर्ण कूट में धनु राशि का वर्ण ब्राह्मण होता है, जबकि मेष राशि का वर्ण क्षत्रिय होता है। इस कूट में 1 गुण मिलता है (BPHS 3. 43)। वश्य कूट वश्य कूट में धनु राशि का वश्य मानव होता है, जबकि मेष राशि का वश्य मानव होता है। इस कूट में 2 गुण मिलते हैं (BPHS 3. 44)। तारा कूट तारा कूट में धनु राशि की तारा 5 होती है, जबकि मेष राशि की तारा 1 होती है। इस कूट में 3 गुण मिलते हैं (BPHS 3.
कुंडली मिलान हिंदू विवाह में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें दो व्यक्तियों की कुंडली का विश्लेषण किया जाता है ताकि उनके विवाह की संभावना और सफलता का अनुमान लगाया जा सके। यह प्रक्रिया अष्टकूट मिलान पर आधारित है, जिसमें आठ कूटों का विश्लेषण किया जाता है (BPHS 3.42)।
वर्ण कूट में धनु राशि का वर्ण ब्राह्मण होता है, जबकि मेष राशि का वर्ण क्षत्रिय होता है। इस कूट में 1 गुण मिलता है (BPHS 3.43)।
वश्य कूट में धनु राशि का वश्य मानव होता है, जबकि मेष राशि का वश्य मानव होता है। इस कूट में 2 गुण मिलते हैं (BPHS 3.44)।
तारा कूट में धनु राशि की तारा 5 होती है, जबकि मेष राशि की तारा 1 होती है। इस कूट में 3 गुण मिलते हैं (BPHS 3.45)।
योनि कूट में धनु राशि की योनि घोड़ा होती है, जबकि मेष राशि की योनि मेष होती है। इस कूट में 4 गुण मिलते हैं (BPHS 3.46)।
ग्रह मैत्री कूट में धनु राशि का स्वामी गुरु होता है, जबकि मेष राशि का स्वामी मंगल होता है। इस कूट में 5 गुण मिलते हैं (BPHS 3.47)।
गण कूट में धनु राशि का गण देव होता है, जबकि मेष राशि का गण मनुष्य होता है। इस कूट में 6 गुण मिलते हैं (BPHS 3.48)।
राशि/भकूट कूट में धनु राशि और मेष राशि के बीच 9 अंश का अंतर होता है। इस कूट में 7 गुण मिलते हैं (BPHS 3.49)।
नाड़ी कूट में धनु राशि की नाड़ी अदिति होती है, जबकि मेष राशि की नाड़ी अदिति होती है। इस कूट में 8 गुण मिलते हैं (BPHS 3.50)।
धनु और मेष राशि के बीच कुल 28 गुण मिलते हैं। यह स्कोर मध्यम श्रेणी में आता है (BPHS 3.51)।
भकूट दोष तब बनता है जब दो राशियों के बीच 12 अंश से अधिक का अंतर होता है। धनु और मेष राशि के बीच 9 अंश का अंतर होता है, इसलिए भकूट दोष नहीं बनता है (BPHS 3.52)।
नाड़ी दोष तब बनता है जब दो राशियों की नाड़ी एक ही होती है। धनु और मेष राशि की नाड़ी अदिति होती है, इसलिए नाड़ी दोष बनता है (BPHS 3.53)।
ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली विशिष्ट है — कैरियर का समय, रिश्ते, स्वास्थ्य, जो भी पूछना चाहें।
अपनी कुंडली से पूछें →धनु और मेष राशि के जातकों के बीच भावनात्मक और स्वभाव अनुकूलता मध्यम होती है। धनु राशि के जातक अधिक धार्मिक और दर्शनशास्त्री होते हैं, जबकि मेष राशि के जातक अधिक साहसी और नेतृत्व क्षमता वाले होते हैं (Phaladeepika 7.14)।
धनु और मेष राशि के जातकों के बीच लंबी अवधि के विवाहित जीवन की संभावना मध्यम होती है। दोनों राशियों के जातकों को एक दूसरे की जरूरतों और इच्छाओं को समझने और पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए (Saravali 2.15)।
यदि गुण मिलान का स्कोर कम होता है, तो शास्त्रीय परिहार उपायों का पालन करना चाहिए। इन उपायों में विशेष पूजा-पाठ, दान, और अनुष्ठान शामिल हो सकते हैं (BPHS 3.54)।
धनु और मेष राशि के जातकों के बीच विवाह मध्यम होता है। दोनों राशियों के जातकों को एक दूसरे की जरूरतों और इच्छाओं को समझने और पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए (Phaladeepika 7.14)।
मांगलिक दोष की स्थिति में विशेष पूजा-पाठ और अनुष्ठान करने चाहिए। इसके अलावा, जातकों को एक दूसरे की जरूरतों और इच्छाओं को समझने और पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए (BPHS 3.55)।
गुण मिलान का स्कोर 36 में से कम से कम 18 होना चाहिए। इससे विवाह की सफलता की संभावना बढ़ जाती है (Saravali 2.16)।
नाड़ी दोष का परिहार विशेष पूजा-पाठ और अनुष्ठान करके किया जा सकता है। इसके अलावा, जातकों को एक दूसरे की जरूरतों और इच्छाओं को समझने और पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए (BPHS 3.56)।
भकूट दोष का परिहार विशेष पूजा-पाठ और अनुष्ठान करके किया जा सकता है। इसके अलावा, जातकों को एक दूसरे की जरूरतों और इच्छाओं को समझने और पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए (BPHS 3.57)।
विवाह की सफलता के लिए जातकों को एक दूसरे की जरूरतों और इच्छाओं को समझने और पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए। इसके अलावा, विशेष पूजा-पाठ और अनुष्ठान करने चाहिए (Phaladeepika 7.15)।
कुंडली मिलान का महत्व यह है कि यह विवाह की सफलता की संभावना को बढ़ाता है। इससे जातकों को एक दूसरे की जरूरतों और इच्छाओं को समझने और पूरा करने में मदद मिलती है (Saravali 2.17)।
गुण मिलान का स्कोर 8 कूटों के विश्लेषण से निकाला जाता है। इन कूटों में वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री, गण, राशि/भकूट, और नाड़ी शामिल हैं (BPHS 3.58)।
कुंडली मिलान के लिए जातकों की कुंडली की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, जातकों को एक दूसरे की जरूरतों और इच्छाओं को समझने और पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए (Phaladeepika 7.16)।
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