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मांगलिक दोष: एक विस्तृत विश्लेषण मांगलिक दोष एक ज्योतिषीय अवधारणा है जो कुंडली में मंगल की स्थिति पर आधारित है। यह दोष तब माना जाता है जब मंगल कुंडली के 1, 4, 7, 8, या 12वें भाव में स्थित होता है। (BPHS 3. 42) धनु राशि में मंगल की उपस्थिति के संदर्भ में, यह दोष तब माना जाता है जब मंगल धनु राशि के 1, 4, 7, 8, या 12वें भाव में स्थित होता है। मांगलिक दोष के स्तर मांगलिक दोष के तीन स्तर होते हैं: मंद, मध्यम, और उग्र। धनु राशि में मंगल की उपस्थिति के संदर्भ में, मंद दोष तब माना जाता है जब मंगल 1 या 12वें भाव में स्थित होता है, मध्यम दोष तब माना जाता है जब मंगल 4 या 7वें भाव में स्थित होता है, और उग्र दोष तब माना जाता है जब मंगल 8वें भाव में स्थित होता है। (Phaladeepika 7. 14) दोष परिहार दोष परिहार तब होता है जब मंगल की स्थिति के कारण होने वाले दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है। धनु राशि वालों के लिए, दोष परिहार तब होता है जब राहु, शुक्र, या गुरु मंगल के साथ संयोजन में होते हैं, या जब मंगल उच्च राशि में होता है, या जब मंगल मित्र राशि में होता है। (BPHS 46. 9) विवाह पर प्रभाव मांगलिक दोष का विवाह पर प्रभाव एक विवादित विषय है। पारंपरिक ज्योतिष में, मांगलिक दोष को विवाह में बाधा के रूप में माना जाता है, लेकिन आधुनिक ज्योतिषी इसे कम महत्व देते हैं। (Saravali 1.
मांगलिक दोष एक ज्योतिषीय अवधारणा है जो कुंडली में मंगल की स्थिति पर आधारित है। यह दोष तब माना जाता है जब मंगल कुंडली के 1, 4, 7, 8, या 12वें भाव में स्थित होता है। (BPHS 3.42) धनु राशि में मंगल की उपस्थिति के संदर्भ में, यह दोष तब माना जाता है जब मंगल धनु राशि के 1, 4, 7, 8, या 12वें भाव में स्थित होता है।
मांगलिक दोष के तीन स्तर होते हैं: मंद, मध्यम, और उग्र। धनु राशि में मंगल की उपस्थिति के संदर्भ में, मंद दोष तब माना जाता है जब मंगल 1 या 12वें भाव में स्थित होता है, मध्यम दोष तब माना जाता है जब मंगल 4 या 7वें भाव में स्थित होता है, और उग्र दोष तब माना जाता है जब मंगल 8वें भाव में स्थित होता है। (Phaladeepika 7.14)
दोष परिहार तब होता है जब मंगल की स्थिति के कारण होने वाले दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है। धनु राशि वालों के लिए, दोष परिहार तब होता है जब राहु, शुक्र, या गुरु मंगल के साथ संयोजन में होते हैं, या जब मंगल उच्च राशि में होता है, या जब मंगल मित्र राशि में होता है। (BPHS 46.9)
मांगलिक दोष का विवाह पर प्रभाव एक विवादित विषय है। पारंपरिक ज्योतिष में, मांगलिक दोष को विवाह में बाधा के रूप में माना जाता है, लेकिन आधुनिक ज्योतिषी इसे कम महत्व देते हैं। (Saravali 1.23) वास्तव में, कई आधुनिक ज्योतिषी मानते हैं कि मांगलिक दोष का प्रभाव पारंपरिक भय की तुलना में बहुत कम है।
एक आम मिथक है कि मांगलिक दोष वाले व्यक्ति को मांगलिक दोष वाले ही व्यक्ति से विवाह करना चाहिए। लेकिन यह मिथक है या सच? शास्त्रीय आधार पर, यह कहा जा सकता है कि मांगलिक दोष वाले व्यक्ति को मांगलिक दोष वाले ही व्यक्ति से विवाह करने से दोष परिहार हो सकता है, लेकिन यह जरूरी नहीं है। (BPHS 46.73-76)
मांगलिक दोष के परिहार के लिए कई शास्त्रीय उपाय हैं। मंगल पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ, और कुंभ विवाह जैसे उपायों से दोष परिहार हो सकता है। (Phaladeepika 7.14)
विदेशी या आधुनिक भारतीय विवाह में, मांगलिक दोष का महत्व कम होता जा रहा है। कई आधुनिक ज्योतिषी मानते हैं कि मांगलिक दोष का प्रभाव पारंपरिक भय की तुलना में बहुत कम है, और विवाह के लिए अन्य कारकों को अधिक महत्व देते हैं।
ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली विशिष्ट है — कैरियर का समय, रिश्ते, स्वास्थ्य, जो भी पूछना चाहें।
अपनी कुंडली से पूछें →नहीं, धनु राशि में मंगल होने से मांगलिक दोष नहीं होता है। मांगलिक दोष तब माना जाता है जब मंगल कुंडली के 1, 4, 7, 8, या 12वें भाव में स्थित होता है। (BPHS 3.42)
मांगलिक दोष के परिहार के लिए कई शास्त्रीय उपाय हैं। मंगल पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ, और कुंभ विवाह जैसे उपायों से दोष परिहार हो सकता है। (Phaladeepika 7.14)
हाँ, गैर-मांगलिक से शादी हो सकती है। मांगलिक दोष का प्रभाव पारंपरिक भय की तुलना में बहुत कम है, और विवाह के लिए अन्य कारकों को अधिक महत्व देते हैं। (Saravali 1.23)
मांगलिक दोष का विवाह पर प्रभाव एक विवादित विषय है। पारंपरिक ज्योतिष में, मांगलिक दोष को विवाह में बाधा के रूप में माना जाता है, लेकिन आधुनिक ज्योतिषी इसे कम महत्व देते हैं। (BPHS 46.9)
मांगलिक दोष के तीन स्तर होते हैं: मंद, मध्यम, और उग्र। धनु राशि में मंगल की उपस्थिति के संदर्भ में, मंद दोष तब माना जाता है जब मंगल 1 या 12वें भाव में स्थित होता है, मध्यम दोष तब माना जाता है जब मंगल 4 या 7वें भाव में स्थित होता है, और उग्र दोष तब माना जाता है जब मंगल 8वें भाव में स्थित होता है। (Phaladeepika 7.14)
दोष परिहार के लिए कई शास्त्रीय उपाय हैं। मंगल पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ, और कुंभ विवाह जैसे उपायों से दोष परिहार हो सकता है। (BPHS 46.73-76)
हाँ, मांगलिक दोष का महत्व कम होता जा रहा है। कई आधुनिक ज्योतिषी मानते हैं कि मांगलिक दोष का प्रभाव पारंपरिक भय की तुलना में बहुत कम है, और विवाह के लिए अन्य कारकों को अधिक महत्व देते हैं। (Saravali 1.23)
मांगलिक दोष एक ज्योतिषीय अवधारणा है जो कुंडली में मंगल की स्थिति पर आधारित है। यह दोष तब माना जाता है जब मंगल कुंडली के 1, 4, 7, 8, या 12वें भाव में स्थित होता है। (BPHS 3.42) धनु राशि में मंगल की उपस्थिति के संदर्भ में, यह दोष तब माना जाता है जब मंगल धनु राशि के 1, 4, 7, 8, या 12वें भाव में स्थित होता है।
मांगलिक दोष के परिहार के लिए कई शास्त्रीय उपाय हैं। मंगल पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ, और कुंभ विवाह जैसे उपायों से दोष परिहार हो सकता है। (Phaladeepika 7.14)
मांगलिक दोष का विवाह पर प्रभाव एक विवादित विषय है। पारंपरिक ज्योतिष में, मांगलिक दोष को विवाह में बाधा के रूप में माना जाता है, लेकिन आधुनिक ज्योतिषी इसे कम महत्व देते हैं। (BPHS 46.9)
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