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कर्क और वृषभ राशि के लिए kark vrishabh kundli milan में अष्टकूट विश्लेषण द्वारा वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री जैसे कूटों का विवरण। निःशुल्क देखें।
कर्क और वृषभ की जोड़ी में भकूट के पूरे 7 अंक मिलते हैं, पर ग्रह मैत्री में केवल 0.5 अंक। यानी भावनात्मक बुनियाद मज़बूत है, लेकिन स्वभाव की समझ पर थोड़ा काम करना पड़ता है। कुंडली मिलान दो लोगों की कुंडलियों को परखकर देखने की विधि है कि उनका स्वभाव, सोच और जीवन की दिशा कितनी मेल खाती है।
हिंदू विवाह में इसका महत्व इसलिए है कि विवाह दो लोगों का नहीं, दो परिवारों का मेल माना गया है। परंपरा में यह मिलान शादी से पहले की सबसे पहली जाँच है। कर्क के स्वामी चंद्र हैं और वृषभ के शुक्र। एक जल राशि है, दूसरी पृथ्वी। आगे इसी जोड़ी को आठ कूटों पर परखा गया है।
अष्टकूट में आठ कसौटियाँ होती हैं, और हर एक के अपने अंक हैं: वर्ण (1), वश्य (2), तारा (3), योनि (4), ग्रह मैत्री (5), गण (6), भकूट (7) और नाड़ी (8)। इनमें से कुछ राशि से तय होती हैं और कुछ जन्म नक्षत्र से। यह फ़र्क़ समझना ज़रूरी है, क्योंकि कई जगह इसी को गड़बड़ा दिया जाता है।
इसलिए सिर्फ़ कर्क और वृषभ जानकर 36 में से कुल अंक नहीं बताए जा सकते। कुल अंक के लिए दोनों के जन्म नक्षत्र चाहिए।
कर्क का वर्ण ब्राह्मण है और वृषभ का वैश्य। क्रम ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र का है। वर को 1 अंक तब मिलता है जब उसका वर्ण वधू के बराबर या ऊँचा हो। अगर कर्क वर की राशि है तो 1 अंक मिलता है, और अगर वृषभ वर की राशि है तो 0।
वश्य चंद्र राशि से तय होता है। कर्क जलचर समूह की राशि है और वृषभ चतुष्पद की। इस जोड़ी को वश्य के 2 में से 1 अंक मिलता है, और यह वर के किसी भी राशि का होने पर वही रहता है।
चंद्र शुक्र को सम मानता है, जबकि शुक्र चंद्र को शत्रु। इसलिए 5 में से सिर्फ़ 0.5 अंक मिलते हैं। यह इस जोड़ी का सबसे कमज़ोर पहलू है। इसका मतलब झगड़ा नहीं, बल्कि यह है कि सोचने का ढंग अलग रहेगा। चंद्र भावनाओं से चलते हैं, शुक्र सुख-सुविधा और स्थिरता से।
वृषभ कर्क से 11वीं राशि है और कर्क वृषभ से 3री, यानी 11/3 का संबंध। यह 2/12, 5/9 या 6/8 जैसा अशुभ संबंध नहीं है, इसलिए भकूट के पूरे 7 अंक मिलते हैं। यह इस जोड़ी की सबसे बड़ी ताक़त है।
ये चारों जन्म नक्षत्र पर निर्भर हैं। इनका फ़ैसला तभी हो सकता है जब दोनों के नक्षत्र पता हों। कर्क या वृषभ की कोई एक तारा, योनि, गण या नाड़ी नहीं होती।
राशि से जो अंक तय हैं, वे ये हैं:
बाक़ी चार कूटों के अंक नक्षत्र पर निर्भर हैं, इसलिए कुल योग तब तक अधूरा है। अपनी सही जन्म तारीख़, समय और जगह डालकर देखेंगे तो पूरा हिसाब सामने आ जाएगा।
भकूट दोष तब बनता है जब दोनों राशियाँ एक-दूसरे से 2/12, 5/9 या 6/8 के संबंध में हों। कर्क और वृषभ का संबंध 11/3 है, इसलिए यहाँ भकूट दोष नहीं बनता। यही कारण है कि इस कूट के पूरे 7 अंक मिलते हैं।
आम तौर पर लोग भकूट दोष से डरते हैं, पर इस जोड़ी को उस चिंता की ज़रूरत नहीं। कई परंपराओं में दोनों राशियों के स्वामी एक ही हों या आपस में मित्र हों तो दोष कट भी जाता है, पर यहाँ तो दोष बना ही नहीं।
ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली अलग है: विवाह का समय, रिश्ते, जो भी पूछना चाहें।
अपनी कुंडली मुफ़्त देखें →नाड़ी जन्म नक्षत्र से तय होती है, राशि से नहीं। नाड़ी दोष तब होता है जब दोनों की नाड़ी एक ही हो। कर्क और वृषभ जानने भर से इसका जवाब नहीं मिलता। एक ही राशि के अलग-अलग नक्षत्रों की नाड़ी भी अलग हो सकती है।
इसलिए इस जोड़ी में नाड़ी दोष है या नहीं, यह दोनों के जन्म नक्षत्र देखकर ही बताया जा सकता है। अगर दोष निकले भी, तो शास्त्रीय परिहार मौजूद हैं, जैसे दोनों का नक्षत्र एक ही हो पर चरण अलग हों। इन्हें योग्य ज्योतिषी से देखवाना चाहिए।
कर्क जल राशि है और वृषभ पृथ्वी। जल और मिट्टी का मेल पौधा उगाता है, यानी यह जोड़ी घर बसाने में स्वाभाविक रूप से अच्छी मानी जाती है। कर्क जातक भावनात्मक सुरक्षा चाहता है, वृषभ स्थिरता और आराम देता है।
भकूट के पूरे अंक भावनात्मक और पारिवारिक तालमेल के लिए अच्छा संकेत हैं। ग्रह मैत्री कमज़ोर है, इसलिए रोज़मर्रा की सोच में थोड़ा टकराव आ सकता है। यह टकराव आम तौर पर जिद और संवेदनशीलता का होता है, कोई गहरी दरार नहीं।
लंबे समय में यह जोड़ी तब टिकती है जब दोनों एक-दूसरे का स्वभाव मान लें। कर्क को थोड़ा व्यावहारिक होना सीखना होगा, वृषभ को थोड़ा नरम। असली तस्वीर कुंडली के बाकी ग्रहों और दशा से तय होगी, सिर्फ़ राशि से नहीं।
अगर पूरे नक्षत्र-मिलान में कुल अंक कम निकलें तो घबराने की ज़रूरत नहीं। शास्त्रों में कई परिहार बताए गए हैं।
सबसे पहले अपनी कुंडली का पूरा मिलान करवाइए। अंक अकेले फ़ैसला नहीं करते।
भावनात्मक और पारिवारिक स्तर पर यह जोड़ी अच्छी मानी जाती है, क्योंकि भकूट के पूरे 7 अंक मिलते हैं। ग्रह मैत्री कमज़ोर है, इसलिए स्वभाव का फ़र्क़ संभालना पड़ेगा।
नहीं। वृषभ कर्क से 11वीं राशि है और कर्क वृषभ से 3री, यह 11/3 का संबंध है। भकूट दोष केवल 2/12, 5/9 और 6/8 पर बनता है।
परंपरा में 36 में से कम से कम 18 अंक मिलना अच्छा माना जाता है। पर कुल अंक दोनों के जन्म नक्षत्र से ही निकलते हैं, राशि से नहीं।
यह राशि से तय नहीं होता। नाड़ी दोष तब बनता है जब दोनों की नाड़ी एक ही हो, और नाड़ी जन्म नक्षत्र से आती है। नक्षत्र जानकर ही पता चलेगा।
अगर एक की कुंडली में मांगलिक दोष हो तो दूसरे की कुंडली में भी वैसी ही स्थिति होने से वह संतुलित मान लिया जाता है। मंगल की स्थिति और अंश के हिसाब से परिहार अलग-अलग होते हैं, इसलिए पूरी कुंडली दिखवाना ठीक रहेगा।
भकूट के पूरे 7 अंक, यानी भावनात्मक और पारिवारिक तालमेल। जल और पृथ्वी का मेल घर और स्थिरता के लिए अच्छा है।
ग्रह मैत्री, जिसमें 5 में से केवल 0.5 अंक मिलते हैं। चंद्र शुक्र को सम मानते हैं और शुक्र चंद्र को शत्रु, इसलिए सोच का ढंग अलग रह सकता है।
कर्क ब्राह्मण वर्ण है और वृषभ वैश्य। कर्क वर हो तो 1 अंक मिलता है, वृषभ वर हो तो 0। यह फ़र्क़ सिर्फ़ इस बात से आता है कि वर किस राशि का है।
कर्क जलचर है और वृषभ चतुष्पद, इसलिए 2 में से 1 अंक मिलता है। यह वर के किसी भी राशि का होने पर बदलता नहीं।
नहीं। राशि मिलान शुरुआत भर है। पूरे अष्टकूट के लिए दोनों के जन्म नक्षत्र चाहिए, और उसके साथ कुंडली के बाक़ी ग्रह, सप्तम भाव और दशा भी देखनी चाहिए।
आपकी सटीक जन्म कुंडली और मुफ़्त रीडिंग, तुरंत। फिर अपने सवाल पूछें — 3 मिनट मुफ़्त, पूरा 20-मिनट का परामर्श ₹49 में।
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