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केतु की 12वीं राशि में स्थिति: रहस्य, प्रभाव एवं मार्ग ज्योतिष शास्त्र में केतु को छाया ग्रह कहा जाता है। यह मंगल और राहु के साथ मिलकर चंद्रमा के उत्तर एवं दक्षिण node के रूप में जाना जाता है। केतु की 12वीं राशि में स्थिति एक अत्यंत गहन एवं रहस्यमयी योग माना जाता है। यह स्थान मोक्ष, आत्मज्ञान, त्याग, विदेश, मृत्यु, मानसिक पीड़ा एवं आध्यात्मिक उत्थान का कारक है। आइए, इस लेख में हम केतु की 12वीं राशि में स्थिति के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा करें। केतु की 12वीं राशि में स्थिति का सामान्य अर्थ केतु की 12वीं राशि में स्थिति व्यक्ति को आत्मिक उन्नति की ओर प्रेरित करती है। 12वीं राशि को मोक्ष भाव कहा जाता है, जो जीवन के अंतिम उद्देश्यों, आत्मज्ञान एवं परमात्मा से मिलन का प्रतीक है। इस स्थिति में केतु व्यक्ति को जीवन के भौतिक बंधनों से मुक्त होने की ओर प्रवृत्त करता है। व्यक्ति में त्याग, संन्यास, अध्यात्म एवं रहस्यमयी शक्तियों का विकास होता है। इस योग से व्यक्ति आत्मनिरीक्षण में अत्यंत रुचि रखता है। उसे जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझने की प्रवृत्ति होती है। साथ ही, व्यक्ति को मानसिक पीड़ा, भावनात्मक संघर्ष एवं आत्मग्लानि का अनुभव भी हो सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति को अपने जीवन के अंतिम उद्देश्यों की खोज में विदेश यात्रा, अध्यात्मिक साधना या मनन-चिंतन की ओर ध्यान केंद्रित करना पड़ सकता है। व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव व्यक्तित्व पर प्रभाव केतु की 12वीं राशि में स्थिति वाले जातक का व्यक्तित्व अत्यंत गंभीर एवं रहस्यमयी होता है। ऐसे जातकों में निम्नलिखित विशेषताएं देखने को मिलती हैं: आत्मिक प्रवृत्ति: व्यक्ति को जीवन के भौतिक सुखों से विरक्ति होती है और वह आत्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है। विचारशीलता: व्यक्ति का मन अत्यंत गंभीर एवं विचारशील होता है। उसे जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझने की तीव्र इच्छा होती है। त्याग एवं संन्यास: व्यक्ति को जीवन के भौतिक बंधनों से मुक्ति की इच्छा होती है। वह त्याग एवं संन्यास की ओर प्रवृत्त होता है। भावनात्मक संघर्ष: व्यक्ति को मानसिक पीड़ा, आत्मग्लानि एवं भावनात्मक संघर्ष का अनुभव हो सकता है। रहस्यमयी प्रवृत्ति: व्यक्ति को रहस्यमयी विषयों, अध्यात्म एवं अलौकिक शक्तियों में रुचि होती है। व्यावसायिक जीवन पर प्रभाव केतु की 12वीं राशि में स्थिति वाला जातक व्यवसाय में निम्नलिखित क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकता है: आध्यात्मिक एवं धार्मिक क्षेत्र: व्यक्ति को धर्म, अध्यात्म, ज्योतिष, मनोविज्ञान एवं रहस्यमयी विषयों में सफलता मिल सकती है। विदेश संबंधी व्यवसाय: व्यक्ति को विदेश यात्रा, आयात-निर्यात, विदेशी कंपनियों में कार्य अथवा अंतर्राष्ट्रीय संबंधों से जुड़े व्यवसाय में सफलता मिल सकती है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा क्षेत्र: व्यक्ति को मनोरोग चिकित्सा, मनोविज्ञान, योग, आयुर्वेद एवं वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों में सफलता मिल सकती है। गुप्त एवं गोपनीय क्षेत्र: व्यक्ति को गुप्त सेवा, जासूसी, अनुसंधान अथवा सरकारी गोपनीय विभागों में कार्य मिल सकता है। त्याग एवं सेवा क्षेत्र: व्यक्ति को समाज सेवा, धर्मार्थ संस्थाओं, अनाथ आश्रमों अथवा वृद्धाश्रमों में कार्य करने की प्रवृत्ति होती है। इस स्थिति में व्यक्ति को व्यवसाय में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। व्यक्ति को व्यवसाय में लाभ एवं हानि दोनों का अनुभव हो सकता है। साथ ही, व्यक्ति को व्यवसाय में विदेश संबंधी अवसर भी मिल सकते हैं। संबंध एवं विवाह पर प्रभाव केतु की 12वीं राशि में स्थिति वाले जातक के संबंध एवं विवाह पर निम्नलिखित प्रभाव देखने को मिलते हैं: विवाह में विलंब: व्यक्ति के विवाह में विलंब हो सकता है। उसे जीवनसाथी के चयन में अत्यंत सावधानी बरतनी पड़ सकती है। संबंधों में रहस्य एवं गोपनीयता: व्यक्ति अपने संबंधों में अत्यंत रहस्यमयी एवं गोपनीय प्रवृत्ति अपनाता है। उसे अपने साथी के प्रति पूर्ण विश्वास स्थापित करने में कठिनाई हो सकती है। विदेशी जीवनसाथी: व्यक्ति को विदेशी व्यक्ति के साथ विवाह संबंध स्थापित करने की संभावना होती है। विवाह में त्याग एवं बलिदान: व्यक्ति को अपने वैवाहिक जीवन में त्याग एवं बलिदान की भावना रखनी पड़ सकती है। विवाह में मानसिक संघर्ष: व्यक्ति को अपने वैवाहिक जीवन में मानसिक संघर्ष एवं भावनात्मक पीड़ा का अनुभव हो सकता है। स्वास्थ्य पर प्रभाव केतु की 12वीं राशि में स्थिति व्यक्ति के स्वास्थ्य पर निम्नलिखित प्रभाव डाल सकती है: मानसिक स्वास्थ्य: व्यक्ति को मानसिक विकारों, अवसाद, चिंता एवं तनाव का अनुभव हो सकता है। नींद संबंधी विकार: व्यक्ति को अनिद्रा, स्वप्नदोष अथवा नींद में व्यवधान का अनुभव हो सकता है। आंख एवं कान संबंधी समस्याएं: व्यक्ति को आंखों की कमजोरी, मोतियाबिंद अथवा कान संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। पुरानी बीमारियां: व्यक्ति को पुरानी एवं असाध्य बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। ऑपरेशन अथवा सर्जरी: व्यक्ति को शल्य चिकित्सा अथवा ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ सकती है। इस स्थिति में व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए। नियमित योग एवं ध्यान व्यक्ति के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार ला सकता है। विभिन्न लग्नों के जातकों पर केतु की 12वीं राशि में स्थिति का प्रभाव मेष लग्न मेष लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत शुभ फलदायी होती है। इस स्थिति में जातक को आत्मिक उन्नति, अध्यात्मिक ज्ञान एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। व्यक्ति को जीवन में त्याग एवं संन्यास की भावना विकसित होती है। साथ ही, व्यक्ति को विदेश यात्रा एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंधों से लाभ मिलता है। वृषभ लग्न वृषभ लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है। व्यक्ति को जीवन में अनेक मानसिक पीड़ाओं एवं भावनात्मक संघर्षों का सामना करना पड़ता है। व्यक्ति को व्यवसाय में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव का अनुभव होता है। साथ ही, व्यक्ति को अपने संबंधों में रहस्य एवं गोपनीयता का सामना करना पड़ता है। मिथुन लग्न मिथुन लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत गहन एवं रहस्यमयी होती है। व्यक्ति को जीवन में अनेक गूढ़ रहस्यों को समझने की प्रवृत्ति होती है। व्यक्ति को व्यवसाय में लेखन, पत्रकारिता, अनुसंधान अथवा रहस्यमयी विषयों से संबंधित क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है। कर्क लग्न कर्क लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत शुभ फलदायी होती है। व्यक्ति को आत्मिक उन्नति, अध्यात्मिक ज्ञान एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। व्यक्ति को अपने परिवार एवं घर से संबंधित क्षेत्रों में सफलता मिलती है। साथ ही, व्यक्ति को विदेश यात्रा एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंधों से लाभ मिलता है। सिंह लग्न सिंह लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है। व्यक्ति को जीवन में अनेक मानसिक पीड़ाओं एवं भावनात्मक संघर्षों का सामना करना पड़ता है। व्यक्ति को व्यवसाय में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव का अनुभव होता है। साथ ही, व्यक्ति को अपने संबंधों में रहस्य एवं गोपनीयता का सामना करना पड़ता है। कन्या लग्न कन्या लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत गहन एवं रहस्यमयी होती है। व्यक्ति को जीवन में अनेक गूढ़ रहस्यों को समझने की प्रवृत्ति होती है। व्यक्ति को व्यवसाय में लेखन, पत्रकारिता, अनुसंधान अथवा रहस्यमयी विषयों से संबंधित क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है। तुला लग्न तुला लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत शुभ फलदायी होती है। व्यक्ति को आत्मिक उन्नति, अध्यात्मिक ज्ञान एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। व्यक्ति को अपने संबंधों एवं विवाह में सफलता मिलती है। साथ ही, व्यक्ति को विदेश यात्रा एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंधों से लाभ मिलता है। वृश्चिक लग्न वृश्चिक लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है। व्यक्ति को जीवन में अनेक मानसिक पीड़ाओं एवं भावनात्मक संघर्षों का सामना करना पड़ता है। व्यक्ति को व्यवसाय में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव का अनुभव होता है। साथ ही, व्यक्ति को अपने संबंधों में रहस्य एवं गोपनीयता का सामना करना पड़ता है। धनु लग्न धनु लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत गहन एवं रहस्यमयी होती है। व्यक्ति को जीवन में अनेक गूढ़ रहस्यों को समझने की प्रवृत्ति होती है। व्यक्ति को व्यवसाय में लेखन, पत्रकारिता, अनुसंधान अथवा रहस्यमयी विषयों से संबंधित क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है। मकर लग्न मकर लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत शुभ फलदायी होती है। व्यक्ति को आत्मिक उन्नति, अध्यात्मिक ज्ञान एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। व्यक्ति को व्यवसाय में सफलता मिलती है। साथ ही, व्यक्ति को विदेश यात्रा एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंधों से लाभ मिलता है। कुम्भ लग्न कुम्भ लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है। व्यक्ति को जीवन में अनेक मानसिक पीड़ाओं एवं भावनात्मक संघर्षों का सामना करना पड़ता है। व्यक्ति को व्यवसाय में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव का अनुभव होता है। साथ ही, व्यक्ति को अपने संबंधों में रहस्य एवं गोपनीयता का सामना करना पड़ता है। मीन लग्न मीन लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत गहन एवं रहस्यमयी होती है। व्यक्ति को जीवन में अनेक गूढ़ रहस्यों को समझने की प्रवृत्ति होती है। व्यक्ति को व्यवसाय में लेखन, पत्रकारिता, अनुसंधान अथवा रहस्यमयी विषयों से संबंधित क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है। केतु की दशा के दौरान प्रभाव केतु की दशा के दौरान जातक के जीवन में अत्यंत गहन एवं रहस्यमयी परिवर्तन देखने को मिलते हैं। केतु की दशा लगभग 7 वर्षों तक चलती है। इस दौरान जातक को निम्नलिखित प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है: आत्मिक उन्नति: व्यक्ति को आत्मिक उन्नति, अध्यात्मिक ज्ञान एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। मानसिक संघर्ष: व्यक्ति को मानसिक पीड़ा, आत्मग्लानि एवं भावनात्मक संघर्ष का अनुभव हो सकता है। विदेश यात्रा: व्यक्ति को विदेश यात्रा अथवा अंतर्राष्ट्रीय संबंधों से लाभ मिल सकता है। व्यवसाय में उतार-चढ़ाव: व्यक्ति को व्यवसाय में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव का अनुभव हो सकता है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं: व्यक्ति को मानसिक अथवा शारीरिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। त्याग एवं बलिदान: व्यक्ति को अपने जीवन में त्याग एवं बलिदान की भावना विकसित हो सकती है। (BPHS 33. 63-74) के अनुसार, यदि केतु की दशा के दौरान व्यक्ति को किसी लाभकारी ग्रह से दृष्टि मिलती है, तो उसे मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। साथ ही, व्यक्ति के जीवन में धन एवं सुख की प्राप्ति होती है। केतु के गोचर के दौरान प्रभाव केतु का गोचर अत्यंत शक्तिशाली एवं प्रभावशाली होता है। जब केतु किसी राशि से गोचर करता है, तो उस राशि के स्वामी एवं उस राशि में स्थित ग्रहों पर प्रभाव डालता है। केतु के गोचर के दौरान जातक के जीवन में निम्नलिखित परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं: मानसिक शांति अथवा अशांति: व्यक्ति को मानसिक शांति अथवा अशांति का अनुभव हो सकता है। विदेश संबंधी गतिविधियां: व्यक्ति को विदेश यात्रा अथवा अंतर्राष्ट्रीय संबंधों से लाभ मिल सकता है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं: व्यक्ति को मानसिक अथवा शारीरिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। व्यवसाय में परिवर्तन: व्यक्ति को व्यवसाय में परिवर्तन अथवा नए अवसर मिल सकते हैं। आध्यात्मिक अनुभव: व्यक्ति को आध्यात्मिक अनुभव अथवा रहस्यमयी घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है। केतु का गोचर अत्यंत शक्तिशाली होता है। इस दौरान व्यक्ति को अपने जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझने की प्रवृत्ति होती है। साथ ही, व्यक्ति को आत्मिक उन्नति की ओर प्रवृत्त किया जाता है। केतु की 12वीं राशि में स्थिति के लिए शास्त्रीय उपाय सूर्य पूजा एवं शिव पूजा केतु को सूर्य एवं शिव का प्रतिनिधि माना जाता है। अतः व्यक्ति को सूर्य देव एवं भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। सूर्य देव की पूजा से व्यक्ति को आत्मिक उन्नति एवं मानसिक शांति प्राप्त होती है। भगवान शिव की पूजा से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। (BPHS 56.
ज्योतिष शास्त्र में केतु को छाया ग्रह कहा जाता है। यह मंगल और राहु के साथ मिलकर चंद्रमा के उत्तर एवं दक्षिण node के रूप में जाना जाता है। केतु की 12वीं राशि में स्थिति एक अत्यंत गहन एवं रहस्यमयी योग माना जाता है। यह स्थान मोक्ष, आत्मज्ञान, त्याग, विदेश, मृत्यु, मानसिक पीड़ा एवं आध्यात्मिक उत्थान का कारक है। आइए, इस लेख में हम केतु की 12वीं राशि में स्थिति के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा करें।
केतु की 12वीं राशि में स्थिति व्यक्ति को आत्मिक उन्नति की ओर प्रेरित करती है। 12वीं राशि को मोक्ष भाव कहा जाता है, जो जीवन के अंतिम उद्देश्यों, आत्मज्ञान एवं परमात्मा से मिलन का प्रतीक है। इस स्थिति में केतु व्यक्ति को जीवन के भौतिक बंधनों से मुक्त होने की ओर प्रवृत्त करता है। व्यक्ति में त्याग, संन्यास, अध्यात्म एवं रहस्यमयी शक्तियों का विकास होता है।
इस योग से व्यक्ति आत्मनिरीक्षण में अत्यंत रुचि रखता है। उसे जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझने की प्रवृत्ति होती है। साथ ही, व्यक्ति को मानसिक पीड़ा, भावनात्मक संघर्ष एवं आत्मग्लानि का अनुभव भी हो सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति को अपने जीवन के अंतिम उद्देश्यों की खोज में विदेश यात्रा, अध्यात्मिक साधना या मनन-चिंतन की ओर ध्यान केंद्रित करना पड़ सकता है।
केतु की 12वीं राशि में स्थिति वाले जातक का व्यक्तित्व अत्यंत गंभीर एवं रहस्यमयी होता है। ऐसे जातकों में निम्नलिखित विशेषताएं देखने को मिलती हैं:
केतु की 12वीं राशि में स्थिति वाला जातक व्यवसाय में निम्नलिखित क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकता है:
इस स्थिति में व्यक्ति को व्यवसाय में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। व्यक्ति को व्यवसाय में लाभ एवं हानि दोनों का अनुभव हो सकता है। साथ ही, व्यक्ति को व्यवसाय में विदेश संबंधी अवसर भी मिल सकते हैं।
केतु की 12वीं राशि में स्थिति वाले जातक के संबंध एवं विवाह पर निम्नलिखित प्रभाव देखने को मिलते हैं:
केतु की 12वीं राशि में स्थिति व्यक्ति के स्वास्थ्य पर निम्नलिखित प्रभाव डाल सकती है:
इस स्थिति में व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए। नियमित योग एवं ध्यान व्यक्ति के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार ला सकता है।
मेष लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत शुभ फलदायी होती है। इस स्थिति में जातक को आत्मिक उन्नति, अध्यात्मिक ज्ञान एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। व्यक्ति को जीवन में त्याग एवं संन्यास की भावना विकसित होती है। साथ ही, व्यक्ति को विदेश यात्रा एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंधों से लाभ मिलता है।
वृषभ लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है। व्यक्ति को जीवन में अनेक मानसिक पीड़ाओं एवं भावनात्मक संघर्षों का सामना करना पड़ता है। व्यक्ति को व्यवसाय में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव का अनुभव होता है। साथ ही, व्यक्ति को अपने संबंधों में रहस्य एवं गोपनीयता का सामना करना पड़ता है।
मिथुन लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत गहन एवं रहस्यमयी होती है। व्यक्ति को जीवन में अनेक गूढ़ रहस्यों को समझने की प्रवृत्ति होती है। व्यक्ति को व्यवसाय में लेखन, पत्रकारिता, अनुसंधान अथवा रहस्यमयी विषयों से संबंधित क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है।
कर्क लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत शुभ फलदायी होती है। व्यक्ति को आत्मिक उन्नति, अध्यात्मिक ज्ञान एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। व्यक्ति को अपने परिवार एवं घर से संबंधित क्षेत्रों में सफलता मिलती है। साथ ही, व्यक्ति को विदेश यात्रा एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंधों से लाभ मिलता है।
सिंह लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है। व्यक्ति को जीवन में अनेक मानसिक पीड़ाओं एवं भावनात्मक संघर्षों का सामना करना पड़ता है। व्यक्ति को व्यवसाय में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव का अनुभव होता है। साथ ही, व्यक्ति को अपने संबंधों में रहस्य एवं गोपनीयता का सामना करना पड़ता है।
कन्या लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत गहन एवं रहस्यमयी होती है। व्यक्ति को जीवन में अनेक गूढ़ रहस्यों को समझने की प्रवृत्ति होती है। व्यक्ति को व्यवसाय में लेखन, पत्रकारिता, अनुसंधान अथवा रहस्यमयी विषयों से संबंधित क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है।
तुला लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत शुभ फलदायी होती है। व्यक्ति को आत्मिक उन्नति, अध्यात्मिक ज्ञान एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। व्यक्ति को अपने संबंधों एवं विवाह में सफलता मिलती है। साथ ही, व्यक्ति को विदेश यात्रा एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंधों से लाभ मिलता है।
वृश्चिक लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है। व्यक्ति को जीवन में अनेक मानसिक पीड़ाओं एवं भावनात्मक संघर्षों का सामना करना पड़ता है। व्यक्ति को व्यवसाय में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव का अनुभव होता है। साथ ही, व्यक्ति को अपने संबंधों में रहस्य एवं गोपनीयता का सामना करना पड़ता है।
धनु लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत गहन एवं रहस्यमयी होती है। व्यक्ति को जीवन में अनेक गूढ़ रहस्यों को समझने की प्रवृत्ति होती है। व्यक्ति को व्यवसाय में लेखन, पत्रकारिता, अनुसंधान अथवा रहस्यमयी विषयों से संबंधित क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है।
मकर लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत शुभ फलदायी होती है। व्यक्ति को आत्मिक उन्नति, अध्यात्मिक ज्ञान एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। व्यक्ति को व्यवसाय में सफलता मिलती है। साथ ही, व्यक्ति को विदेश यात्रा एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंधों से लाभ मिलता है।
कुम्भ लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है। व्यक्ति को जीवन में अनेक मानसिक पीड़ाओं एवं भावनात्मक संघर्षों का सामना करना पड़ता है। व्यक्ति को व्यवसाय में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव का अनुभव होता है। साथ ही, व्यक्ति को अपने संबंधों में रहस्य एवं गोपनीयता का सामना करना पड़ता है।
मीन लग्न वाले जातकों के लिए केतु की 12वीं राशि में स्थिति अत्यंत गहन एवं रहस्यमयी होती है। व्यक्ति को जीवन में अनेक गूढ़ रहस्यों को समझने की प्रवृत्ति होती है। व्यक्ति को व्यवसाय में लेखन, पत्रकारिता, अनुसंधान अथवा रहस्यमयी विषयों से संबंधित क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है।
केतु की दशा के दौरान जातक के जीवन में अत्यंत गहन एवं रहस्यमयी परिवर्तन देखने को मिलते हैं। केतु की दशा लगभग 7 वर्षों तक चलती है। इस दौरान जातक को निम्नलिखित प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है:
(BPHS 33.63-74) के अनुसार, यदि केतु की दशा के दौरान व्यक्ति को किसी लाभकारी ग्रह से दृष्टि मिलती है, तो उसे मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। साथ ही, व्यक्ति के जीवन में धन एवं सुख की प्राप्ति होती है।
केतु का गोचर अत्यंत शक्तिशाली एवं प्रभावशाली होता है। जब केतु किसी राशि से गोचर करता है, तो उस राशि के स्वामी एवं उस राशि में स्थित ग्रहों पर प्रभाव डालता है। केतु के गोचर के दौरान जातक के जीवन में निम्नलिखित परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं:
केतु का गोचर अत्यंत शक्तिशाली होता है। इस दौरान व्यक्ति को अपने जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझने की प्रवृत्ति होती है। साथ ही, व्यक्ति को आत्मिक उन्नति की ओर प्रवृत्त किया जाता है।
ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली विशिष्ट है — कैरियर का समय, रिश्ते, स्वास्थ्य, जो भी पूछना चाहें।
अपनी कुंडली से पूछें →केतु को सूर्य एवं शिव का प्रतिनिधि माना जाता है। अतः व्यक्ति को सूर्य देव एवं भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। सूर्य देव की पूजा से व्यक्ति को आत्मिक उन्नति एवं मानसिक शांति प्राप्त होती है। भगवान शिव की पूजा से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
(BPHS 56.33-34) के अनुसार, यदि केतु की
आपकी कुंडली। आपके सवाल। शास्त्रीय ज्योतिष पर आधारित 20-मिनट का परामर्श।
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