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केतु 8वें भाव में — कुंडली में फल और उपाय

केतु 8वें भाव में — कुंडली में फल और उपाय

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केतु का 8वें भाव में स्थित होना: जन्म कुंडली में महत्व एवं प्रभाव जन्म कुंडली में केतु का 8वें भाव में स्थित होना एक अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी योग है। केतु, जो चंद्रमा के दक्षिणी. node हैं, को "छाया ग्रह" कहा जाता है। यह ग्रह व्यक्ति को जीवन में गहरे आध्यात्मिक अनुभवों, रहस्यमयी घटनाओं एवं अज्ञात शक्तियों के प्रति आकर्षित करता है। 8वां भाव स्वयं भी मृत्यु, पुनर्जन्म, अंधकार, अन्तर्निहित शक्ति, विदेश, रहस्य, गुप्त संचय, तथा अप्रत्याशित परिवर्तनों का कारक है। जब केतु इस भाव में स्थित होता है, तो जातक के जीवन में इन सभी विषयों का गहरा प्रभाव पड़ता है। केतु का यह योग जातक को जीवन के गहरे रहस्यों को समझने की तीव्र इच्छा प्रदान करता है। यह व्यक्ति को जीवन के अंतिम सत्य, मृत्यु के पश्चात् के जीवन, तथा अदृश्य शक्तियों के प्रति जिज्ञासु बनाता है। साथ ही, यह योग जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तनों, अचानक लाभ-हानि, तथा गुप्त शक्तियों के उपयोग की क्षमता भी प्रदान करता है। (BPHS 3. 33-34) के अनुसार, केतु के 8वें भाव में स्थित होने पर जातक को जीवन में गहरे मनोवैज्ञानिक अनुभवों, रहस्यमयी घटनाओं, तथा अन्तर्निहित शक्तियों का अनुभव होता है। यह व्यक्ति को जीवन के गहरे सत्य को समझने की क्षमता प्रदान करता है, परंतु साथ ही जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तनों एवं चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है। इस योग के प्रभावों को समझने के लिए हमें केतु एवं 8वें भाव के स्वभाव, उनके पारस्परिक संबंध, तथा कुंडली में अन्य ग्रहों के साथ उनके संबंधों का विश्लेषण करना आवश्यक है। केतु का 8वें भाव में स्थित होना: व्यक्तित्व, करियर, संबंध एवं स्वास्थ्य पर प्रभाव व्यक्तित्व पर प्रभाव केतु का 8वें भाव में स्थित होना जातक के व्यक्तित्व में गहन परिवर्तन लाता है। ऐसे जातक अत्यंत गहन विचारक होते हैं, जो जीवन के गहरे रहस्यों एवं अदृश्य शक्तियों में विश्वास रखते हैं। ये व्यक्ति जीवन में आध्यात्मिकता, मनोविज्ञान, ज्योतिष, एवं विज्ञान के गहरे विषयों में रुचि लेते हैं। इनका व्यक्तित्व रहस्यमय एवं गंभीर होता है, तथा ये लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। केतु के प्रभाव से जातक में आत्मनिरीक्षण की तीव्र प्रवृत्ति होती है। ये व्यक्ति अपने जीवन के गहरे अनुभवों, भूतकाल के कर्मों, तथा जीवन के उद्देश्य पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हैं। इनका व्यक्तित्व अत्यंत संवेदनशील एवं भावुक होता है, परंतु बाहरी रूप से ये शांत एवं गंभीर दिखाई देते हैं। (Phaladeepika 7. 14) के अनुसार, केतु के 8वें भाव में स्थित होने पर जातक को जीवन में गहरे मनोवैज्ञानिक अनुभवों का सामना करना पड़ सकता है। ये व्यक्ति जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तनों के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं, तथा इनके व्यक्तित्व में एक प्रकार का "रहस्यमय आकर्षण" होता है। करियर एवं व्यवसाय पर प्रभाव केतु का 8वें भाव में स्थित होना करियर के क्षेत्र में अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी प्रभाव डालता है। ऐसे जातकों को करियर के क्षेत्र में गुप्त शक्तियों, मनोविज्ञान, ज्योतिष, विज्ञान, अनुसंधान, एवं अन्वेषण जैसे क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है। ये व्यक्ति जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तनों, जैसे नौकरी में अचानक बदलाव, व्यवसाय में लाभ-हानि, अथवा नए क्षेत्र में प्रवेश करने के प्रति आकर्षित होते हैं। केतु के प्रभाव से जातक को करियर के क्षेत्र में गुप्त ज्ञान, अनुसंधान, एवं अन्वेषण जैसे क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है। ये व्यक्ति जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तनों के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं, तथा इनके करियर में कई बार अचानक एवं अप्रत्याशित मोड़ आते हैं। इस योग के अंतर्गत जातक को मनोविज्ञान, ज्योतिष, विज्ञान, अनुसंधान, एवं अन्वेषण जैसे क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है। साथ ही, ये व्यक्ति जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तनों, जैसे नौकरी में अचानक बदलाव, व्यवसाय में लाभ-हानि, अथवा नए क्षेत्र में प्रवेश करने के प्रति आकर्षित होते हैं। (Brihat Parashara Hora Shastra 3.

केतु का 8वें भाव में स्थित होना: जन्म कुंडली में महत्व एवं प्रभाव

जन्म कुंडली में केतु का 8वें भाव में स्थित होना एक अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी योग है। केतु, जो चंद्रमा के दक्षिणी.node हैं, को "छाया ग्रह" कहा जाता है। यह ग्रह व्यक्ति को जीवन में गहरे आध्यात्मिक अनुभवों, रहस्यमयी घटनाओं एवं अज्ञात शक्तियों के प्रति आकर्षित करता है। 8वां भाव स्वयं भी मृत्यु, पुनर्जन्म, अंधकार, अन्तर्निहित शक्ति, विदेश, रहस्य, गुप्त संचय, तथा अप्रत्याशित परिवर्तनों का कारक है। जब केतु इस भाव में स्थित होता है, तो जातक के जीवन में इन सभी विषयों का गहरा प्रभाव पड़ता है।

केतु का यह योग जातक को जीवन के गहरे रहस्यों को समझने की तीव्र इच्छा प्रदान करता है। यह व्यक्ति को जीवन के अंतिम सत्य, मृत्यु के पश्चात् के जीवन, तथा अदृश्य शक्तियों के प्रति जिज्ञासु बनाता है। साथ ही, यह योग जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तनों, अचानक लाभ-हानि, तथा गुप्त शक्तियों के उपयोग की क्षमता भी प्रदान करता है।

(BPHS 3.33-34) के अनुसार, केतु के 8वें भाव में स्थित होने पर जातक को जीवन में गहरे मनोवैज्ञानिक अनुभवों, रहस्यमयी घटनाओं, तथा अन्तर्निहित शक्तियों का अनुभव होता है। यह व्यक्ति को जीवन के गहरे सत्य को समझने की क्षमता प्रदान करता है, परंतु साथ ही जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तनों एवं चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है।

इस योग के प्रभावों को समझने के लिए हमें केतु एवं 8वें भाव के स्वभाव, उनके पारस्परिक संबंध, तथा कुंडली में अन्य ग्रहों के साथ उनके संबंधों का विश्लेषण करना आवश्यक है।


केतु का 8वें भाव में स्थित होना: व्यक्तित्व, करियर, संबंध एवं स्वास्थ्य पर प्रभाव

व्यक्तित्व पर प्रभाव

केतु का 8वें भाव में स्थित होना जातक के व्यक्तित्व में गहन परिवर्तन लाता है। ऐसे जातक अत्यंत गहन विचारक होते हैं, जो जीवन के गहरे रहस्यों एवं अदृश्य शक्तियों में विश्वास रखते हैं। ये व्यक्ति जीवन में आध्यात्मिकता, मनोविज्ञान, ज्योतिष, एवं विज्ञान के गहरे विषयों में रुचि लेते हैं। इनका व्यक्तित्व रहस्यमय एवं गंभीर होता है, तथा ये लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

केतु के प्रभाव से जातक में आत्मनिरीक्षण की तीव्र प्रवृत्ति होती है। ये व्यक्ति अपने जीवन के गहरे अनुभवों, भूतकाल के कर्मों, तथा जीवन के उद्देश्य पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हैं। इनका व्यक्तित्व अत्यंत संवेदनशील एवं भावुक होता है, परंतु बाहरी रूप से ये शांत एवं गंभीर दिखाई देते हैं।

(Phaladeepika 7.14) के अनुसार, केतु के 8वें भाव में स्थित होने पर जातक को जीवन में गहरे मनोवैज्ञानिक अनुभवों का सामना करना पड़ सकता है। ये व्यक्ति जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तनों के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं, तथा इनके व्यक्तित्व में एक प्रकार का "रहस्यमय आकर्षण" होता है।

करियर एवं व्यवसाय पर प्रभाव

केतु का 8वें भाव में स्थित होना करियर के क्षेत्र में अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी प्रभाव डालता है। ऐसे जातकों को करियर के क्षेत्र में गुप्त शक्तियों, मनोविज्ञान, ज्योतिष, विज्ञान, अनुसंधान, एवं अन्वेषण जैसे क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है। ये व्यक्ति जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तनों, जैसे नौकरी में अचानक बदलाव, व्यवसाय में लाभ-हानि, अथवा नए क्षेत्र में प्रवेश करने के प्रति आकर्षित होते हैं।

केतु के प्रभाव से जातक को करियर के क्षेत्र में गुप्त ज्ञान, अनुसंधान, एवं अन्वेषण जैसे क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है। ये व्यक्ति जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तनों के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं, तथा इनके करियर में कई बार अचानक एवं अप्रत्याशित मोड़ आते हैं।

इस योग के अंतर्गत जातक को मनोविज्ञान, ज्योतिष, विज्ञान, अनुसंधान, एवं अन्वेषण जैसे क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है। साथ ही, ये व्यक्ति जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तनों, जैसे नौकरी में अचानक बदलाव, व्यवसाय में लाभ-हानि, अथवा नए क्षेत्र में प्रवेश करने के प्रति आकर्षित होते हैं।

(Brihat Parashara Hora Shastra 3.35) के अनुसार, केतु के 8वें भाव में स्थित होने पर जातक को जीवन में गुप्त ज्ञान, अनुसंधान, एवं अन्वेषण जैसे क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है। ये व्यक्ति जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तनों के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं, तथा इनके करियर में कई बार अचानक एवं अप्रत्याशित मोड़ आते हैं।

विवाह एवं संबंधों पर प्रभाव

केतु का 8वें भाव में स्थित होना विवाह एवं संबंधों के क्षेत्र में अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी प्रभाव डालता है। ऐसे जातकों के विवाह में अप्रत्याशित घटनाएं, जैसे विवाह में विलंब, विवाह के पश्चात् जीवन में अचानक परिवर्तन, अथवा विवाहेतर संबंधों जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।

केतु के प्रभाव से जातक का विवाह जीवन अत्यंत रहस्यमय एवं अप्रत्याशित होता है। ये व्यक्ति जीवन में गहरे मनोवैज्ञानिक अनुभवों, रहस्यमयी घटनाओं, एवं अन्तर्निहित शक्तियों के प्रति आकर्षित होते हैं। इनके संबंध अत्यंत गहन एवं भावुक होते हैं, परंतु साथ ही इनमें अप्रत्याशित परिवर्तनों एवं चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है।

इस योग के अंतर्गत जातक को विवाह के पश्चात् जीवन में गहरे मनोवैज्ञानिक अनुभवों, रहस्यमयी घटनाओं, एवं अन्तर्निहित शक्तियों का अनुभव होता है। साथ ही, इनके विवाह में अप्रत्याशित घटनाएं, जैसे विवाह में विलंब, विवाह के पश्चात् जीवन में अचानक परिवर्तन, अथवा विवाहेतर संबंधों जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।

(Saravali 3.18) के अनुसार, केतु के 8वें भाव में स्थित होने पर जातक के विवाह जीवन में अप्रत्याशित घटनाएं उत्पन्न हो सकती हैं। ये व्यक्ति जीवन में गहरे मनोवैज्ञानिक अनुभवों, रहस्यमयी घटनाओं, एवं अन्तर्निहित शक्तियों के प्रति आकर्षित होते हैं।

स्वास्थ्य पर प्रभाव

केतु का 8वें भाव में स्थित होना स्वास्थ्य के क्षेत्र में अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी प्रभाव डालता है। ऐसे जातकों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, जैसे मानसिक तनाव, अवसाद, अनिद्रा, अथवा गुप्त रोगों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, केतु के प्रभाव से जातक को जीवन में अप्रत्याशित स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं, जैसे अचानक बीमारियां, अथवा गुप्त रोगों का सामना करना पड़ सकता है।

केतु के कारण जातक के स्वास्थ्य में अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी प्रभाव उत्पन्न होते हैं। ये व्यक्ति जीवन में मानसिक तनाव, अवसाद, अनिद्रा, अथवा गुप्त रोगों के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं। इनके स्वास्थ्य में अप्रत्याशित परिवर्तन, जैसे अचानक बीमारियां, अथवा गुप्त रोगों का सामना करना पड़ सकता है।

(Phaladeepika 7.15) के अनुसार, केतु के 8वें भाव में स्थित होने पर जातक को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, जैसे मानसिक तनाव, अवसाद, अनिद्रा, अथवा गुप्त रोगों का सामना करना पड़ सकता है। ये व्यक्ति जीवन में अप्रत्याशित स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं।


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विभिन्न लग्नों के साथ केतु के 8वें भाव में स्थित होने के प्रभाव

मेष लग्न

मेष लग्न वालों के लिए केतु का 8वें भाव में स्थित होना अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी योग है। ऐसे जातकों को जीवन में अत्यंत साहसिक एवं जोखिम भरे निर्णय लेने की प्रवृत्ति होती है। ये व्यक्ति जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तनों, जैसे अचानक नौकरी बदलना, व्यवसाय में नुकसान, अथवा विदेश यात्रा जैसे अनुभवों से गुजर सकते हैं।

मेष लग्न वालों के लिए केतु का 8वें भाव में स्थित होना अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी योग है। ऐसे जातकों को जीवन में अत्यंत साहसिक एवं जोखिम भरे निर्णय लेने की प्रवृत्ति होती है। ये व्यक्ति जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तनों, जैसे अचानक नौकरी बदलना, व्यवसाय में नुकसान, अथवा विदेश यात्रा जैसे अनुभवों से गुजर सकते हैं।

इस योग के अंतर्गत जातक को जीवन में गहरे मनोवैज्ञानिक अनुभवों, रहस्यमयी घटनाओं, एवं अन्तर्निहित शक्तियों का अनुभव होता है। साथ ही, इनके करियर एवं स्वास्थ्य में अप्रत्याशित परिवर्तन उत्पन्न हो सकते हैं।

(Brihat Parashara Hora Shastra 3.36) के अनुसार, मेष लग्न वालों के लिए केतु का 8वें भाव में स्थित होना अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी योग है। ऐसे जातकों को जीवन में अत्यंत साहसिक एवं जोखिम भरे निर्णय लेने की प्रवृत्ति होती है।

सिंह लग्न

सिंह लग्न वालों के लिए केतु का 8वें भाव में स्थित होना अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी योग है। ऐसे जातकों को जीवन में अत्यंत गहन एवं भावुक अनुभव होते हैं। ये व्यक्ति जीवन में गहरे मनोवैज्ञानिक अनुभवों, रहस्यमयी घटनाओं, एवं अन्तर्निहित शक्तियों के प्रति आकर्षित होते हैं।

सिंह लग्न वालों के लिए केतु का 8वें भाव में स्थित होना अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी योग है। ऐसे जातकों को जीवन में अत्यंत गहन एवं भावुक अनुभव होते हैं। ये व्यक्ति जीवन में गहरे मनोवैज्ञानिक अनुभवों, रहस्यमयी घटनाओं, एवं अन्तर्निहित शक्तियों के प्रति आकर्षित होते हैं। इनके करियर में अप्रत्याशित परिवर्तन, जैसे नौकरी बदलना अथवा व्यवसाय में नुकसान, उत्पन्न हो सकते हैं।

इस योग के अंतर्गत जातक को जीवन में अत्यंत गहन एवं भावुक अनुभव होते हैं। ये व्यक्ति जीवन में गहरे मनोवैज्ञानिक अनुभवों, रहस्यमयी घटनाओं, एवं अन्तर्निहित शक्तियों के प्रति आकर्षित होते हैं।

(Saravali 3.19) के अनुसार, सिंह लग्न वालों के लिए केतु का 8वें भाव में स्थित होना अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी योग है। ऐसे जातकों को जीवन में अत्यंत गहन एवं भावुक अनुभव होते हैं।

कन्या लग्न

कन्या लग्न वालों के लिए केतु का 8वें भाव में स्थित होना अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी योग है। ऐसे जातकों को जीवन में अत्यंत गहन एवं विश्लेषणात्मक अनुभव होते हैं। ये व्यक्ति जीवन में गहरे मनोवैज्ञानिक अनुभवों, रहस्यमयी घटनाओं, एवं अन्तर्निहित शक्तियों के प्रति आकर्षित होते हैं।

कन्या लग्न वालों के लिए केतु का 8वें भाव में स्थित होना अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी योग है। ऐसे जातकों को जीवन में अत्यंत गहन एवं विश्लेषणात्मक अनुभव होते हैं। ये व्यक्ति जीवन में गहरे मनोवैज्ञानिक अनुभवों, रहस्यमयी घटनाओं, एवं अन्तर्निहित शक्तियों के प्रति आकर्षित होते हैं। इनके करियर में अप्रत्याशित परिवर्तन, जैसे नौकरी बदलना अथवा व्यवसाय में नुकसान, उत्पन्न हो सकते हैं।

इस योग के अंतर्गत जातक को जीवन में अत्यंत गहन एवं विश्लेषणात्मक अनुभव होते हैं। ये व्यक्ति जीवन में गहरे मनोवैज्ञानिक अनुभवों, रहस्यमयी घटनाओं, एवं अन्तर्निहित शक्तियों के प्रति आकर्षित होते हैं।

(Phaladeepika 7.16) के अनुसार, कन्या लग्न वालों के लिए केतु का 8वें भाव में स्थित होना अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी योग है। ऐसे जातकों को जीवन में अत्यंत गहन एवं विश्लेषणात्मक अनुभव होते हैं।

मकर लग्न

मकर लग्न वालों के लिए केतु का 8वें भाव में स्थित होना अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी योग है। ऐसे जातकों को जीवन में अत्यंत गहन एवं स्थिर अनुभव होते हैं। ये व्यक्ति जीवन में गहरे मनोवैज्ञानिक अनुभवों, रहस्यमयी घटनाओं, एवं अन्तर्निहित शक्तियों के प्रति आकर्षित होते हैं।

मकर लग्न वालों के लिए केतु का 8वें भाव में स्थित होना अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी योग है। ऐसे जातकों को जीवन में अत्यंत गहन एवं स्थिर अनुभव होते हैं। ये व्यक्ति जीवन में गहरे मनोवैज्ञानिक अनुभवों, रहस्यमयी घटनाओं, एवं अन्तर्निहित शक्तियों के प्रति आकर्षित होते हैं। इनके करियर में अप्रत्याशित परिवर्तन, जैसे नौकरी बदलना अथवा व्यवसाय में नुकसान, उत्पन्न हो सकते हैं।

इस योग के अंतर्गत जातक को जीवन में अत्यंत गहन एवं स्थिर अनुभव होते हैं। ये व्यक्ति जीवन में गहरे मनोवैज्ञानिक अनुभवों, रहस्यमयी घटनाओं, एवं अन्तर्निहित शक्तियों के प्रति आकर्षित होते हैं।

(Brihat Parashara Hora Shastra 3.37) के अनुसार, मकर लग्न वालों के लिए केतु का 8वें भाव में स्थित होना अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी योग है। ऐसे जातकों को जीवन में अत्यंत गहन एवं स्थिर अनुभव होते हैं।


केतु की दशा के दौरान प्रभाव

केतु की दशा जातक के जीवन में अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी प्रभाव उत्पन्न करती है।ised by the dasha lord. (BPHS 3.42) के अनुसार, केतु की दशा के दौरान जातक को जीवन में अप्रत्याशित परिवर्तन, गहन मनोवैज्ञानिक अनुभव, एवं अन्तर्निहित शक्तियों का अनुभव होता है।

केतु की दशा के दौरान जातक को जीवन में अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी अनुभव होते हैं। ये व्यक्ति जीवन में गहरे मनोवैज्ञानिक अनुभवों, रहस्यमयी घटनाओं, एवं अन्तर्निहित शक्तियों के प्रति आकर्षित होते हैं। इनके करियर, विवाह, एवं स्वास्थ्य में अप्रत्याशित परिवर्तन उत्पन्न हो सकते हैं।

केतु की दशा के दौरान जातक को जीवन में अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी अनुभव होते हैं। ये व्यक्ति जीवन में गहरे मनोवैज्ञानिक अनुभवों, रहस्यमयी घटनाओं, एवं अन्तर्निहित शक्तियों के प्रति आकर्षित होते हैं। इनके करियर में अप्रत्याशित परिवर्तन, जैसे नौकरी बदलना अथवा व्यवसाय में नुकसान, उत्पन्न हो सकते हैं।

केतु की दशा की अवधि लगभग 7 वर्ष होती है। इस दौरान जातक को जीवन में अत्यंत गहन एवं परिवर्तनकारी अनुभव होते हैं। ये व्यक्ति जीवन में गहरे

आपकी कुंडली। आपके सवाल।

आपकी कुंडली। आपके सवाल। शास्त्रीय ज्योतिष पर आधारित 20-मिनट का परामर्श।

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