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कुंभ राशि और मांगलिक दोष: एक विस्तृत विश्लेषण मांगलिक दोष एक ज्योतिषीय अवधारणा है जो कुंडली में मंगल की स्थिति पर आधारित है। यह दोष तब माना जाता है जब मंगल कुंडली के 1, 4, 7, 8, या 12वें भाव में स्थित होता है (BPHS 3. 42)। कुंभ राशि में मंगल का होना भी मांगलिक दोष के लिए जिम्मेदार माना जाता है, लेकिन यह पूरी तरह से सच नहीं है। कुंभ राशि में मंगल का होना: कब मांगलिक दोष माना जाता है, कब नहीं कुंभ राशि में मंगल का होना तब मांगलिक दोष माना जाता है जब मंगल 1, 4, 7, 8, या 12वें भाव में स्थित होता है। हालांकि, यदि मंगल कुंभ राशि में है लेकिन इन भावों में नहीं है, तो यह मांगलिक दोष नहीं माना जाता है (Phaladeepika 7. 14)। मांगलिक दोष के स्तर: मंद, मध्यम, उग्र — कुंभ राशि के संदर्भ में मांगलिक दोष के तीन स्तर होते हैं: मंद, मध्यम, और उग्र। मंद मांगलिक दोष तब माना जाता है जब मंगल 12वें भाव में स्थित होता है, मध्यम मांगलिक दोष तब माना जाता है जब मंगल 1 या 4वें भाव में स्थित होता है, और उग्र मांगलिक दोष तब माना जाता है जब मंगल 7 या 8वें भाव में स्थित होता है (Saravali 1. 23)। कुंभ राशि में मंगल का होना मध्यम मांगलिक दोष माना जाता है। कब दोष परिहार होता है: कुंभ राशि वालों के लिए विशिष्ट परिहार स्थितियाँ कुंभ राशि वालों के लिए दोष परिहार तब होता है जब राहु, शुक्र, या गुरु मंगल के साथ संयोजन में होते हैं (BPHS 54.
मांगलिक दोष एक ज्योतिषीय अवधारणा है जो कुंडली में मंगल की स्थिति पर आधारित है। यह दोष तब माना जाता है जब मंगल कुंडली के 1, 4, 7, 8, या 12वें भाव में स्थित होता है (BPHS 3.42)। कुंभ राशि में मंगल का होना भी मांगलिक दोष के लिए जिम्मेदार माना जाता है, लेकिन यह पूरी तरह से सच नहीं है।
कुंभ राशि में मंगल का होना तब मांगलिक दोष माना जाता है जब मंगल 1, 4, 7, 8, या 12वें भाव में स्थित होता है। हालांकि, यदि मंगल कुंभ राशि में है लेकिन इन भावों में नहीं है, तो यह मांगलिक दोष नहीं माना जाता है (Phaladeepika 7.14)।
मांगलिक दोष के तीन स्तर होते हैं: मंद, मध्यम, और उग्र। मंद मांगलिक दोष तब माना जाता है जब मंगल 12वें भाव में स्थित होता है, मध्यम मांगलिक दोष तब माना जाता है जब मंगल 1 या 4वें भाव में स्थित होता है, और उग्र मांगलिक दोष तब माना जाता है जब मंगल 7 या 8वें भाव में स्थित होता है (Saravali 1.23)। कुंभ राशि में मंगल का होना मध्यम मांगलिक दोष माना जाता है।
कुंभ राशि वालों के लिए दोष परिहार तब होता है जब राहु, शुक्र, या गुरु मंगल के साथ संयोजन में होते हैं (BPHS 54.67)। इसके अलावा, यदि मंगल उच्च का होता है या मित्र राशि में स्थित होता है, तो भी दोष परिहार होता है (Phaladeepika 7.14)।
मांगलिक दोष का विवाह पर प्रभाव एक विवादित विषय है। पारंपरिक रूप से, मांगलिक दोष को विवाह में समस्याओं का कारण माना जाता है, लेकिन आधुनिक ज्योतिषी मानते हैं कि इसका प्रभाव बहुत कम होता है (Saravali 1.23)। वास्तव में, मांगलिक दोष का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली और जीवन परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
एक आम मिथक है कि मांगलिक दोष वाले व्यक्ति को मांगलिक दोष वाले ही व्यक्ति से विवाह करना चाहिए। हालांकि, यह सच नहीं है। मांगलिक दोष का परिहार व्यक्ति की कुंडली और जीवन परिस्थितियों पर निर्भर करता है, न कि केवल मांगलिक दोष के आधार पर (BPHS 54.67)।
मांगलिक दोष के परिहार के लिए कई शास्त्रीय उपाय हैं। मंगल पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ, और कुंभ विवाह जैसे उपाय मांगलिक दोष के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं (Phaladeepika 7.14)।
आधुनिक समय में, मांगलिक दोष का महत्व कम होता जा रहा है। कई लोग मांगलिक दोष को एक पुरानी और अनावश्यक अवधारणा मानते हैं (Saravali 1.23)। हालांकि, अभी भी कई लोग मांगलिक दोष को महत्व देते हैं और इसके परिहार के लिए उपाय करते हैं।
ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली विशिष्ट है — कैरियर का समय, रिश्ते, स्वास्थ्य, जो भी पूछना चाहें।
अपनी कुंडली से पूछें →नहीं, कुंभ राशि में मंगल होने से मांगलिक दोष नहीं होता है। मांगलिक दोष तब माना जाता है जब मंगल 1, 4, 7, 8, या 12वें भाव में स्थित होता है (BPHS 3.42)।
मांगलिक दोष के परिहार के लिए कई शास्त्रीय उपाय हैं। मंगल पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ, और कुंभ विवाह जैसे उपाय मांगलिक दोष के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं (Phaladeepika 7.14)।
हाँ, गैर-मांगलिक से शादी हो सकती है। मांगलिक दोष का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली और जीवन परिस्थितियों पर निर्भर करता है, न कि केवल मांगलिक दोष के आधार पर (BPHS 54.67)।
मांगलिक दोष का विवाह पर प्रभाव एक विवादित विषय है। पारंपरिक रूप से, मांगलिक दोष को विवाह में समस्याओं का कारण माना जाता है, लेकिन आधुनिक ज्योतिषी मानते हैं कि इसका प्रभाव बहुत कम होता है (Saravali 1.23)।
मांगलिक दोष के परिहार के लिए कई शास्त्रीय उपाय हैं। मंगल पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ, और कुंभ विवाह जैसे उपाय मांगलिक दोष के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं (Phaladeepika 7.14)।
कुंभ राशि में मंगल का होना मध्यम मांगलिक दोष माना जाता है (Saravali 1.23)।
मांगलिक दोष का महत्व एक विवादित विषय है। पारंपरिक रूप से, मांगलिक दोष को विवाह में समस्याओं का कारण माना जाता है, लेकिन आधुनिक ज्योतिषी मानते हैं कि इसका प्रभाव बहुत कम होता है (BPHS 54.67)।
मांगलिक दोष के परिहार के लिए कई शास्त्रीय उपाय हैं। मंगल पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ, और कुंभ विवाह जैसे उपाय मांगलिक दोष के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं (Phaladeepika 7.14)।
मांगलिक दोष का प्रभाव व्यक्ति की कुंडली और जीवन परिस्थितियों पर निर्भर करता है, न कि केवल मांगलिक दोष के आधार पर (BPHS 54.67)।
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