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मकर और मीन राशि के लिए makar meen kundli milan में वर्ण, वश्य, तारा जैसे आठ कूटों का विश्लेषण। जानें कुंडली मिलान के नतीजे। निःशुल्क देखें।
मकर और मीन की जोड़ी में सबसे पहले यह देखा जाता है कि मीन राशि मकर से 3वीं है और मकर राशि मीन से 11वीं, यानी 3/11 का संबंध बनता है। यह संबंध भकूट में पूरे 7 में से 7 अंक देता है, इसलिए जोड़ी की शुरुआत मज़बूत मानी जाती है। पूरा चित्र बाकी कूटों और दोनों के जन्म नक्षत्र से बनता है।
कुंडली मिलान वह परंपरा है जिसमें वर और वधू की चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र को आठ कसौटियों पर परखा जाता है। हिंदू विवाह में इसे इसलिए महत्व मिला कि शादी केवल दो लोगों का नहीं, दो परिवारों और दो स्वभावों का मेल है। मिलान से पहले ही पता चल जाता है कि स्वभाव, सोच और जीवन की लय कहाँ मिलती है और कहाँ थोड़ा तालमेल बिठाना पड़ेगा।
ध्यान रहे कि मिलान एक मार्गदर्शक है, फ़ैसला नहीं। यह बताता है कि रिश्ते में किन जगहों पर सहजता मिलेगी और किन जगहों पर समझदारी चाहिए। इस लेख में मकर और मीन की जोड़ी को उसी नज़र से देखा गया है।
अष्टकूट में आठ कसौटियाँ हैं: वर्ण (1 अंक), वश्य (2), तारा (3), योनि (4), ग्रह मैत्री (5), गण (6), भकूट (7) और नाड़ी (8)। इनमें से कुछ राशि से तय होते हैं और कुछ जन्म नक्षत्र से। यही फ़र्क इस जोड़ी को समझने की कुंजी है।
वश्य (2 अंक) जन्म नक्षत्र से नहीं, चंद्र राशि से तय होता है। मकर राशि का पहला आधा भाग (0° से 15°) चतुष्पद और दूसरा आधा (15° से 30°) जलचर है। मीन राशि जलचर है। चूँकि इस जोड़ी में मकर है, वश्य इस बात पर टिका है कि मकर वाले का चंद्रमा राशि के पहले आधे में है या दूसरे में। यह जन्म कुंडली देखे बिना नहीं कहा जा सकता। इसलिए यहाँ वश्य की कोई संख्या नहीं लिखी जा रही। इतना पक्का है कि एक ही समूह की जोड़ी को पूरे 2 अंक मिलते हैं।
तारा (3), योनि (4), गण (6) और नाड़ी (8) दोनों के जन्म नक्षत्र से तय होते हैं, राशि से नहीं। एक ही राशि में अलग-अलग नक्षत्र आते हैं, इसलिए किसी राशि को ये चारों नहीं दिए जा सकते। इन चार कूटों के लिए दोनों के जन्म नक्षत्र चाहिए।
राशि से तय होने वाले कूटों को जोड़कर देखें तो भकूट के 7 अंक पक्के हैं, ग्रह मैत्री के 3 अंक पक्के हैं और वर्ण में वर के हिसाब से 0 या 1 अंक मिलता है। वश्य के 2 अंक चंद्रमा के अंश पर निर्भर हैं।
36 में से कुल अंक इस जोड़ी के लिए अभी नहीं बताया जा सकता, क्योंकि तारा, योनि, गण और नाड़ी के 21 अंक दोनों के जन्म नक्षत्र से ही निकलेंगे। कुल गुण जानने के लिए अपने जन्म नक्षत्र के साथ पूरा मिलान करवाना ही रास्ता है।
ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली अलग है: विवाह का समय, रिश्ते, जो भी पूछना चाहें।
अपनी कुंडली मुफ़्त देखें →भकूट में 2/12, 5/9 और 6/8 के संबंध पर 0 अंक मिलते हैं, बाकी पर 7। मकर और मीन 3/11 के संबंध में हैं, इसलिए इस जोड़ी में भकूट दोष बनता ही नहीं और पूरे 7 अंक मिलते हैं। यह इस जोड़ी का सबसे मज़बूत पक्ष है।
शास्त्र में यह भी माना गया है कि जहाँ भकूट दोष बने, वहाँ दोनों राशियों का स्वामी एक ही ग्रह हो या दोनों के स्वामी आपस में मित्र हों तो दोष कट जाता है। यहाँ दोष है ही नहीं, इसलिए इस परिहार की ज़रूरत नहीं पड़ती।
नाड़ी जन्म नक्षत्र से तय होती है, राशि से नहीं। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि मकर या मीन राशि की कौन-सी नाड़ी है। नाड़ी दोष तब बनता है जब वर और वधू की नाड़ी एक ही हो, और तब इस कूट में 0 अंक मिलते हैं।
इसकी जाँच दोनों के जन्म नक्षत्र से ही होगी। यदि दोष निकले तो शास्त्र में परिहार माने गए हैं। इसके लिए किसी जानकार से दोनों कुंडलियाँ दिखवाना ठीक रहता है, क्योंकि परिहार नक्षत्र और चरण पर निर्भर करते हैं।
मकर पृथ्वी तत्व की राशि है और मीन जल तत्व की। पृथ्वी को जल से पोषण मिलता है और जल को पृथ्वी से आकार। मकर वाला साथी व्यावहारिक, अनुशासित और ज़िम्मेदार होता है, जबकि मीन वाला कोमल, भावुक और कल्पनाशील। एक ठोस ज़मीन देता है, दूसरा रिश्ते में गर्माहट।
स्वामी ग्रहों के हिसाब से शनि और गुरु एक-दूसरे को सम मानते हैं, यानी न दुश्मनी है न गहरी मित्रता। इसका मतलब है कि रिश्ता सहज चलेगा, पर गहराई समझ और समय से आएगी। मकर वाले को मीन की भावनाओं को सुनना सीखना होगा, और मीन वाले को मकर की सीधी बात को दिल पर नहीं लेना होगा।
भकूट के पूरे अंक और ग्रह मैत्री के 3 अंक इस जोड़ी को स्थिर शुरुआत देते हैं। 3/11 का संबंध सहयोग, संवाद और एक-दूसरे के काम में साथ देने से जुड़ा माना जाता है। लंबे साथ के लिए यह अच्छा आधार है।
पर लंबा विवाह केवल अंकों से नहीं चलता। दशा, गोचर और दोनों की कुंडली में सप्तम भाव की स्थिति भी असर डालती है। इसलिए जोड़ी का भविष्य पूरी कुंडली देखकर ही ठीक से कहा जा सकता है।
इस जोड़ी में भकूट पूरा है, इसलिए कमी की संभावना नक्षत्र वाले कूटों में ही रहती है। यदि पूरा मिलान करने पर कुल अंक कम आएँ या नाड़ी जैसा कोई दोष निकले, तो घबराने की ज़रूरत नहीं। शास्त्र में परिहार माने गए हैं, जो नक्षत्र और चरण के हिसाब से लगते हैं।
इस जोड़ी में भकूट के पूरे 7 अंक मिलते हैं और ग्रह मैत्री में 3 अंक। पृथ्वी और जल का मेल रिश्ते को स्थिरता और कोमलता दोनों देता है। बाकी तस्वीर जन्म नक्षत्र से साफ़ होगी।
अष्टकूट कुल 36 अंक का होता है। इस जोड़ी का कुल अंक तारा, योनि, गण और नाड़ी पर टिका है, जो जन्म नक्षत्र से तय होते हैं। इसलिए दोनों के नक्षत्र के बिना कुल संख्या नहीं बताई जा सकती।
नहीं। मीन मकर से 3वीं राशि है और मकर मीन से 11वीं, यानी 3/11। दोष केवल 2/12, 5/9 और 6/8 के संबंध में बनता है, इसलिए यहाँ पूरे 7 अंक मिलते हैं।
जब वर और वधू की नाड़ी एक ही हो। नाड़ी जन्म नक्षत्र से तय होती है, राशि से नहीं, इसलिए मकर या मीन राशि अकेली यह तय नहीं करती। जाँच के लिए दोनों के जन्म नक्षत्र चाहिए।
मकर वैश्य है और मीन ब्राह्मण। वर का वर्ण वधू के बराबर या ऊँचा हो तभी 1 अंक मिलता है। मकर वर हो तो 0 अंक, मीन वर हो तो 1 अंक।
वश्य चंद्र राशि से तय होता है और मकर में चंद्रमा के अंश पर निर्भर करता है। 0° से 15° पर चतुष्पद और 15° से 30° पर जलचर। मीन जलचर है। इसलिए अंश जाने बिना वश्य की संख्या नहीं कही जा सकती।
मांगलिक स्थिति दोनों कुंडलियों में मंगल के भाव से देखी जाती है। यदि एक में दोष हो और दूसरे में उसका शास्त्रीय संतुलन बन जाए, तो विवाह में बाधा नहीं मानी जाती। इसके लिए दोनों जन्म कुंडलियाँ साथ देखनी पड़ती हैं।
अंक अकेले फ़ैसला नहीं करते। परिहार, सप्तम भाव की स्थिति और दशा भी तौली जाती हैं। इसलिए केवल कुल अंक देखकर रिश्ता न तोड़ें; पूरा मिलान करवाएँ।
आपकी सटीक जन्म कुंडली और मुफ़्त रीडिंग, तुरंत। फिर अपने सवाल पूछें — 3 मिनट मुफ़्त, पूरा 20-मिनट का परामर्श ₹49 में।
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