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मकर और सिंह राशि के लिए makar singh kundli milan में वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री जैसे कूटों का विश्लेषण। जानें कुंडली मिलान के परिणाम। निःशुल्क देखें।
मकर और सिंह की जोड़ी पारंपरिक अष्टकूट की नज़र से चुनौती भरी है, क्योंकि राशि से तय होने वाले कूटों में ग्रह मैत्री और भकूट दोनों पर 0 अंक मिलते हैं। पर राशि अकेली पूरी कहानी नहीं कहती: तारा, योनि, गण और नाड़ी दोनों के जन्म नक्षत्र से तय होते हैं, इसलिए असली तस्वीर कुंडलियों से ही बनती है। इस लेख में आप देखेंगे कि इस जोड़ी में क्या सुधर सकता है और क्या सावधानी माँगता है।
कुंडली मिलान वर और वधू की जन्म कुंडलियों की तुलना है, ताकि स्वभाव, सोच और जीवन की लय का मेल पहले से परखा जा सके। इसमें अष्टकूट के आठ पैमाने देखे जाते हैं, और साथ में मंगल की स्थिति, सप्तम भाव और दशा का तालमेल भी देखा जाता है।
यह कोई पास-फेल की परीक्षा नहीं है। यह एक नक्शा है, जो बताता है कि रिश्ते में किस जगह सहज चलना होगा और कहाँ थोड़ा सँभलकर।
मकर राशि का स्वामी शनि है और तत्व पृथ्वी है। सिंह राशि का स्वामी सूर्य है और तत्व अग्नि है। शनि और सूर्य आपस में शत्रु माने जाते हैं, इसलिए दोनों राशियों के बीच खिंचाव स्वाभाविक है। मकर संयम, धीमी रफ़्तार और ज़िम्मेदारी की राशि है, जबकि सिंह खुलकर जीने, पहचान और मान की राशि है।
इसका मतलब यह नहीं कि रिश्ता चल नहीं सकता। इसका मतलब है कि दोनों को एक-दूसरे का तरीक़ा समझने में समय देना होगा।
मकर का वर्ण वैश्य है और सिंह का क्षत्रिय। क्रम ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र का है। वर को 1 अंक तब मिलता है जब उसका वर्ण वधू के बराबर या ऊँचा हो। अगर मकर वर की राशि हो तो 0 अंक मिलता है। अगर सिंह वर की राशि हो तो 1 अंक मिलता है।
वश्य चंद्र राशि से तय होता है, जन्म नक्षत्र से नहीं। मकर राशि का पहला आधा भाग (0° से 15°) चतुष्पद है और दूसरा आधा भाग (15° से 30°) जलचर। सिंह राशि वनचर है। इसलिए मकर वाले साथी का वश्य इस पर टिकता है कि चंद्रमा राशि के पहले आधे में है या दूसरे में, और यह जन्म कुंडली के बिना पता नहीं चलता। इस संयोजन का वश्य अंक अलग-अलग तालिकाओं में एक जैसा नहीं मिलता, इसलिए यहाँ कोई संख्या नहीं दी जा रही। इतना पक्का है कि एक ही समूह की जोड़ी को पूरे 2 अंक मिलते हैं।
तारा दोनों के जन्म नक्षत्रों की आपसी गिनती से बनता है। यह राशि से तय नहीं होता, इसलिए इस जोड़ी का तारा अंक बिना नक्षत्र जाने नहीं बताया जा सकता।
योनि शारीरिक और स्वभावगत तालमेल का पैमाना है। यह भी जन्म नक्षत्र से तय होती है, राशि से नहीं।
शनि सूर्य को शत्रु मानता है और सूर्य शनि को। इसलिए ग्रह मैत्री में इस जोड़ी को 5 में से 0 अंक मिलते हैं। यह सोच, बातचीत और रोज़ के फ़ैसलों में असहमति का संकेत है।
गण (देव, मनुष्य, राक्षस) जन्म नक्षत्र से तय होता है। राशि देखकर किसी को गण नहीं दिया जा सकता।
सिंह राशि मकर से 8वीं है और मकर राशि सिंह से 6वीं, यानी 8/6 का संबंध। इस पर भकूट के 7 में से 0 अंक मिलते हैं। इसकी चर्चा अगले खंड में है।
नाड़ी भी जन्म नक्षत्र से तय होती है। इसके लिए अलग खंड नीचे है।
राशि से तय होने वाले कूटों का हाल यह है:
तारा, योनि, गण और नाड़ी के अंक दोनों के जन्म नक्षत्र जाने बिना नहीं निकलते। इसी वजह से इस जोड़ी का 36 में से कुल अंक राशि देखकर नहीं बताया जा सकता। उसके लिए दोनों के जन्म नक्षत्र चाहिए।
ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली अलग है: विवाह का समय, रिश्ते, जो भी पूछना चाहें।
अपनी कुंडली मुफ़्त देखें →इस जोड़ी में 6/8 का संबंध है, यानी भकूट दोष बनता है। परंपरा में 2/12, 5/9 और 6/8 के संबंध पर भकूट को 0 अंक मिलते हैं, बाकी पर 7। 6/8 को स्वास्थ्य और आपसी तनाव से जोड़कर देखा गया है।
कई परंपराओं में दोनों राशियों का स्वामी एक ही ग्रह हो या वे आपस में मित्र हों तो भकूट दोष कट जाता है। शनि और सूर्य शत्रु हैं और स्वामी भी अलग, इसलिए यह परिहार इस जोड़ी में लागू नहीं होता। यहाँ दोष को दूसरे तरीक़ों से संभालना होगा, जैसे दोनों कुंडलियों में चंद्रमा की स्थिति और सप्तम भाव की मज़बूती देखकर।
नाड़ी जन्म नक्षत्र से तय होती है, राशि से नहीं, इसलिए मकर-सिंह का नाम सुनकर किसी को कोई नाड़ी नहीं दी जा सकती। नाड़ी दोष तब बनता है जब वर और वधू दोनों की नाड़ी एक ही हो। तब नाड़ी के 8 में से 0 अंक मिलते हैं।
अगर दोनों की नाड़ी अलग निकलती है, तो यह दोष है ही नहीं। अगर एक ही निकलती है, तो परंपरा में कुछ परिहार माने गए हैं, जैसे दोनों का जन्म नक्षत्र एक होना पर चरण अलग होना। ऐसे में किसी जानकार से दोनों कुंडलियाँ दिखाकर राय लेना ठीक रहता है।
मकर का साथी अक्सर चुपचाप मेहनत करने वाला, हिसाब से चलने वाला होता है। सिंह का साथी खुलकर प्यार और सराहना चाहता है। मकर को लगेगा कि सिंह दिखावा ज़्यादा करता है। सिंह को लगेगा कि मकर ठंडा और नपा-तुला है।
पर यही फ़र्क़ ताक़त भी बन सकता है। मकर घर को टिकाऊ बनाता है और सिंह उसमें गर्मजोशी और आत्मविश्वास लाता है। शर्त यह है कि मकर साथी तारीफ़ के दो शब्द कहना सीखे, और सिंह साथी मकर की धीमी रफ़्तार को कमज़ोरी न समझे।
राशि की नज़र से यह जोड़ी आसान नहीं है, क्योंकि ग्रह मैत्री और भकूट दोनों पर अंक नहीं मिलते। पर लंबे विवाह की असली तस्वीर पूरी कुंडली से बनती है: सप्तम भाव और उसका स्वामी, मंगल की स्थिति, शुक्र और गुरु की मज़बूती, और विवाह के समय चलती दशाएँ।
अगर दोनों कुंडलियों में ये पक्ष मज़बूत हैं, तो राशि की कमी काफ़ी हद तक संभल जाती है। इसलिए सिर्फ़ राशि देखकर फ़ैसला न करें, दोनों की पूरी कुंडली मिलवाएँ।
परिहार का मतलब है कि कुछ स्थितियों में दोष का असर कम माना जाता है। भकूट के लिए स्वामी एक हो या मित्र हों, वाला परिहार इस जोड़ी में नहीं मिलता, इसलिए सहारा दूसरी जगहों से लेना होगा।
रोज़मर्रा के स्तर पर भी कुछ चीज़ें काम आती हैं: सूर्य के लिए सुबह की धूप में कुछ समय बिताना, शनि के लिए नियमित और अनुशासित दिनचर्या, और आपस में फ़ैसले मिलकर लेने की आदत। ये उपाय सहारा हैं, इन्हें कुंडली देखने का विकल्प न मानें।
राशि की नज़र से इसमें ग्रह मैत्री और भकूट पर 0 अंक हैं, इसलिए शुरुआती तालमेल में मेहनत लगेगी। पर पूरी कुंडली, नक्षत्र और दशा देखे बिना कोई अंतिम फ़ैसला नहीं किया जा सकता।
अष्टकूट में कुल 36 अंक होते हैं, और कुल संख्या दोनों के जन्म नक्षत्र पर निर्भर करती है। इसलिए सिर्फ़ राशियों से कुल अंक नहीं बताए जा सकते। अंक के साथ दोष और परिहार भी देखे जाते हैं।
हाँ, 6/8 का संबंध बनता है, जिस पर भकूट के 7 में से 0 अंक मिलते हैं। शनि और सूर्य शत्रु हैं, इसलिए स्वामी वाला परिहार लागू नहीं होता।
यह सोच और बातचीत में फ़र्क़ का संकेत है, रिश्ता टूटने की भविष्यवाणी नहीं। दोनों कुंडलियों में चंद्रमा और सप्तम भाव मज़बूत हों तो यह कमी काफ़ी सँभल जाती है।
जब वर और वधू दोनों की नाड़ी एक ही हो, तब नाड़ी के 8 में से 0 अंक मिलते हैं। नाड़ी जन्म नक्षत्र से तय होती है, राशि से नहीं।
मकर राशि का पहला आधा (0° से 15°) चतुष्पद है और दूसरा आधा (15° से 30°) जलचर। चंद्रमा किस आधे में है, यह जन्म कुंडली से ही पता चलता है, इसलिए वश्य अंक राशि अकेली नहीं तय करती।
पहले दोनों कुंडलियों में मंगल की स्थिति ठीक से जाँचें। अगर दोनों मांगलिक हों तो परंपरा में इसे संतुलित माना जाता है। अकेले एक का मांगलिक होना कुंडली देखकर तय करने की बात है।
यह वैचारिक टकराव का संकेत देती है: एक अनुशासन चाहता है, दूसरा सम्मान और खुलापन। समझदारी से बात करने की आदत डाल लें तो यह टकराव काफ़ी कम हो जाता है।
दोनों की चल रही दशा, गुरु और शुक्र की स्थिति और सप्तम भाव पर गोचर देखें। जिस समय दशा सहायक हो, उस समय किया विवाह रिश्ते को बेहतर शुरुआत देता है।
दोनों की सही जन्म तारीख़, समय और जगह के साथ पूरी कुंडली बनवाएँ। उससे नक्षत्र, तारा, योनि, गण, नाड़ी और मंगल की स्थिति सब साफ़ हो जाएगी, और तब असली अंक और दोष दिखेंगे।
आपकी सटीक जन्म कुंडली और मुफ़्त रीडिंग, तुरंत। फिर अपने सवाल पूछें — 3 मिनट मुफ़्त, पूरा 20-मिनट का परामर्श ₹49 में।
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