30 सेकंड में अपनी मुफ़्त कुंडली देखें
जन्म विवरण डालें — तुरंत अपनी कुंडली और मुफ़्त रीडिंग पाएँ, फिर 3 मिनट मुफ़्त सवाल पूछें। पूरा 20-मिनट का परामर्श ₹49 में — सिर्फ़ अगर आप चाहें।
अपनी कुंडली पर जाँचें🧮 संतान योग कैलकुलेटर — अपनी कुंडली से मुफ़्त जाँचें →कोई साइन-अप नहीं। या पूरा फ़ॉर्म खोलें.
✓ मुफ़्त कुंडली·✓ 3 मिनट मुफ़्त परामर्श·✓ ₹49 में 20-मिनट का परामर्श·✓ कोई OTP नहीं
मकर राशि वालों के लिए makar santaan yog का विश्लेषण करें और जानें कि 5वाँ भाव, गुरु, और सप्तमेश की भूमिका संतान प्राप्ति में क्या है। निःशुल्क देखें।
मकर राशि के जातकों के लिए संतान का सुख मुख्य रूप से पाँचवें भाव, उसके स्वामी और कारक ग्रह गुरु की स्थिति से देखा जाता है। यहाँ गिनती मकर को लग्न मानकर की गई है। इस लेख में आपको वह सब मिलेगा जो कुंडली में देखा जाता है, पर अंतिम बात आपकी अपनी जन्म कुंडली ही तय करती है।
पाँचवाँ भाव संतान, बुद्धि और पूर्व पुण्य का भाव है। गुरु संतान का नैसर्गिक कारक ग्रह माना जाता है। सप्तमेश की भूमिका इसलिए जोड़ी जाती है कि संतान का प्रश्न अक्सर दाम्पत्य जीवन से जुड़ा होता है। पति-पत्नी के रिश्ते का भाव सातवाँ है, इसलिए उसके स्वामी की स्थिति पूरे चित्र को समझने में सहायक होती है।
मकर लग्न में पाँचवें भाव में वृषभ राशि आती है। वृषभ स्थिर और पृथ्वी तत्व की राशि है। इसका स्वभाव धैर्य, सुख-सुविधा और स्थिरता देने वाला माना जाता है। इसलिए इस लग्न में संतान का विषय अक्सर धीरे-धीरे, पर टिकाऊ ढंग से फलित होता देखा जाता है। यह एक सामान्य संकेत है, पक्का नियम नहीं।
वृषभ का स्वामी शुक्र है, इसलिए मकर लग्न में शुक्र पंचमेश बनता है। संतान के प्रश्न पर शुक्र की स्थिति, उसकी राशि, उस पर पड़ने वाली दृष्टियाँ और उसके साथ बैठे ग्रह देखे जाते हैं। शुक्र बलवान और शुभ दृष्ट हो तो पाँचवें भाव के फल सहज रहते हैं। पीड़ित हो तो उसी अनुपात में विचार की ज़रूरत पड़ती है। शुक्र किस भाव में है, यह आपकी कुंडली के अनुसार अलग-अलग होगा।
इस समय गुरु कर्क राशि में है। मकर राशि से गिनने पर कर्क सातवें भाव में पड़ता है। इसका अर्थ यह है कि गोचर में गुरु इस समय आपके दाम्पत्य भाव से गुज़र रहा है। इसे सामान्य गोचर-स्थिति की तरह समझें। इसके आधार पर कोई तारीख़ या पक्का वादा नहीं किया जा सकता।
जन्म कुंडली में गुरु किस राशि और भाव में है, वह बलवान है या पीड़ित, उसकी दृष्टि पाँचवें भाव या उसके स्वामी पर पड़ती है या नहीं, ये सब बातें अलग से परखी जाती हैं। गुरु की दृष्टि पाँचवें भाव, उसके स्वामी या स्वयं गुरु पर पड़ना शास्त्रीय परंपरा में शुभ माना जाता है।
संतान सुख का आकलन तीन स्तंभों पर टिका होता है: पाँचवाँ भाव, उसका स्वामी और कारक गुरु। इन तीनों का बल, उन पर पड़ने वाली दृष्टियाँ और उनके साथ बैठे ग्रह देखे जाते हैं। कोई एक संकेत अकेले निर्णायक नहीं होता। पूरी कुंडली का संतुलन देखा जाता है।
ये सामान्य शास्त्रीय संकेत हैं। हर कुंडली में इनका वज़न अलग होता है, इसलिए इन्हें अपनी कुंडली में स्वयं या किसी अनुभवी ज्योतिषी के साथ मिलाकर ही पढ़ें।
समय के विषय में केवल सामान्य सिद्धांत बताए जा सकते हैं। पाँचवें भाव के स्वामी यानी शुक्र की दशा या अंतर्दशा, गुरु की दशा या अंतर्दशा, और पाँचवें भाव में बैठे ग्रहों की दशाएँ संतान के विषय में सक्रिय मानी जाती हैं। जब इन में से कोई दशा चल रही हो और साथ ही गोचर का समर्थन मिले, तब संभावनाएँ अधिक प्रबल समझी जाती हैं।
गुरु का गोचर जब पाँचवें भाव, पंचमेश या उनसे संबंधित बिंदुओं पर शुभ प्रभाव डालता है, तो उसे सहायक माना जाता है। मकर लग्न में पाँचवाँ भाव वृषभ है, इसलिए गुरु जब वृषभ राशि से संबंध बनाता है तब इस पर ध्यान दिया जाता है। यह केवल एक संकेत है। अपनी चल रही दशा देखे बिना कोई निष्कर्ष न निकालें।
ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली अलग है: संतान का समय, आपके अपने योग, जो भी पूछना चाहें।
अपनी कुंडली मुफ़्त देखें →जब पाँचवाँ भाव, पंचमेश या गुरु पाप ग्रहों से पीड़ित हों, नीच राशि में हों या दुःस्थान में पड़ें, तो इस विषय में अधिक सावधानी से विचार किया जाता है। इसी तरह राहु, केतु या शनि का पाँचवें भाव से संबंध बनने पर परंपरा में अतिरिक्त परीक्षण की बात कही जाती है। गुरु का राहु जैसे छाया ग्रह से संबंध भी देखा जाता है। इसे ही सामान्य बोलचाल में गुरु ग्रहण योग कहते हैं। इसके असर की मात्रा कुंडली में ग्रहों के बल और अंशों पर निर्भर करती है।
परंपरा में गुरु और शुक्र की प्रसन्नता के लिए पूजा, दान, मंत्र-जप और सात्त्विक आचरण की सलाह दी जाती है। गुरुजनों का सम्मान, ज़रूरतमंद बच्चों की सहायता और शुभ कर्म को भी इस दिशा में अच्छा माना गया है। ये उपाय श्रद्धा और मानसिक संबल के लिए हैं। ये किसी निश्चित परिणाम की गारंटी नहीं हैं और चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प भी नहीं हैं।
राशि के आधार पर किया गया विश्लेषण सामान्य रूपरेखा देता है। संतान का वास्तविक समय हर व्यक्ति की अपनी कुंडली और दशा से तय होता है। एक ही मकर राशि के दो जातकों का फल अलग हो सकता है, क्योंकि लग्न, ग्रहों की डिग्री और दशा क्रम भिन्न होते हैं।
इन बिंदुओं को अपनी कुंडली में एक-एक करके देखें। जहाँ उलझन हो, वहाँ अनुभवी ज्योतिषी से पूरी कुंडली दिखाकर बात करना ज़्यादा भरोसेमंद रहेगा।
ज्योतिष मार्गदर्शन और आत्म-समझ का साधन है। यह परिस्थितियों को समझने का एक नज़रिया देता है। संतान का विषय अत्यंत निजी और भावनात्मक होता है। इसमें धैर्य, आपसी सहयोग और स्वास्थ्य संबंधी विषयों के लिए योग्य चिकित्सक की सलाह साथ-साथ चलनी चाहिए। कुंडली के संकेतों को आशा और सहारे की तरह लें, डर की तरह नहीं।
इसका कोई एक समय सबके लिए तय नहीं होता। सामान्य सिद्धांत के अनुसार पंचमेश शुक्र या गुरु की दशा-अंतर्दशा और पाँचवें भाव पर गुरु का शुभ गोचर अनुकूल माना जाता है। आपकी चल रही दशा आपकी अपनी कुंडली से ही पता चलेगी।
मकर लग्न में पाँचवें भाव में वृषभ राशि आती है और उसका स्वामी शुक्र है। यह भाव संतान, बुद्धि और पूर्व पुण्य का माना जाता है।
संतान का कारक ग्रह गुरु है, चाहे लग्न कोई भी हो। मकर लग्न में गुरु के साथ-साथ पंचमेश शुक्र की स्थिति भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण है।
गुरु इस समय कर्क राशि में है, जो मकर से गिनने पर सातवाँ भाव पड़ता है। यह गोचर की सामान्य स्थिति है और इसके आधार पर कोई तारीख़ तय नहीं की जा सकती।
परंपरा में पाँचवें भाव में राहु को अतिरिक्त विचार का संकेत माना जाता है, क्योंकि यह भाव संतान से जुड़ा है। पर इसका असर राहु की राशि, उस पर दृष्टियों और पंचमेश के बल पर निर्भर करता है। अकेले राहु के आधार पर निष्कर्ष न निकालें।
जब गुरु का राहु या केतु से संबंध बनता है तो उसे गुरु ग्रहण योग कहा जाता है। माना जाता है कि इससे गुरु के कारकत्व पर दबाव पड़ सकता है। इसकी तीव्रता डिग्री, भाव और अन्य शुभ दृष्टियों से बदलती है, इसलिए इसे कुंडली देखकर ही आँका जाता है।
पंचमेश के रूप में शुक्र का बल पाँचवें भाव के फलों को प्रभावित करता है। पर केवल शुक्र की कमज़ोरी से निष्कर्ष नहीं निकाला जाता। गुरु का बल, पाँचवें भाव की स्थिति और शुभ दृष्टियाँ मिलकर तस्वीर बनाती हैं।
उपाय परंपरा में श्रद्धा और मानसिक संबल के लिए बताए जाते हैं। वे किसी परिणाम की गारंटी नहीं देते। स्वास्थ्य या गर्भधारण से जुड़े प्रश्नों के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना सबसे ज़रूरी है।
पहले अपना लग्न तय करें। फिर पाँचवाँ भाव और उसका स्वामी, शुक्र और गुरु की स्थिति, उन पर पड़ने वाली दृष्टियाँ और चल रही दशा देखें। इन सबको साथ मिलाकर पढ़ना ही सही तरीका है।
आपकी सटीक जन्म कुंडली और मुफ़्त रीडिंग, तुरंत। फिर अपने सवाल पूछें — 3 मिनट मुफ़्त, पूरा 20-मिनट का परामर्श ₹49 में।
मेरी मुफ़्त कुंडली देखें →