आपकी कुंडली, आपके सवाल — 20-मिनट का परामर्श
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मेष राशि वालों के लिए विवाह योग और शादी के समय का विस्तृत विश्लेषण मेष राशि के जातकों के लिए विवाह एक महत्वपूर्ण जीवन घटना है, और इसके लिए ज्योतिष में विशेष योग और समय का विचार किया जाता है। मेष राशि के स्वामी ग्रह मंगल है, और 7वें भाव की भूमिका विवाह और जीवनसाथी के बारे में बताती है। (BPHS 3. 42) विवाह कारक ग्रह मेष राशि की कुंडली में गुरु (पुरुष के लिए शुक्र), 7वें घर के स्वामी, और लग्न स्वामी का विश्लेषण विवाह के लिए किया जाता है। गुरु की स्थिति और दृष्टि विवाह के योग को प्रभावित करती है, जबकि 7वें घर के स्वामी की स्थिति जीवनसाथी के स्वभाव और विवाह के समय को बताती है। (Phaladeepika 7. 14) विवाह योग कब बनते हैं शास्त्रीय 7वें भाव के योग, राहु-शुक्र, गुरु-चंद्र संयोजन विवाह के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। जब गुरु और शुक्र की दृष्टि 7वें भाव पर पड़ती है, तो विवाह के योग बनते हैं। इसके अलावा, राहु और शुक्र का संयोजन भी विवाह के लिए महत्वपूर्ण होता है। (BPHS 7. 1) कौन-सी दशा-अंतर्दशा में विवाह की संभावना सबसे अधिक मेष राशि के लिए विशिष्ट दशा-अंतर्दशा में विवाह की संभावना सबसे अधिक होती है। जब गुरु की दशा में शुक्र की अंतर्दशा चलती है, तो विवाह के योग बनते हैं। इसके अलावा, जब 7वें घर के स्वामी की दशा में गुरु की अंतर्दशा चलती है, तो भी विवाह के योग बनते हैं। (Saravali 41.
मेष राशि के जातकों के लिए विवाह एक महत्वपूर्ण जीवन घटना है, और इसके लिए ज्योतिष में विशेष योग और समय का विचार किया जाता है। मेष राशि के स्वामी ग्रह मंगल है, और 7वें भाव की भूमिका विवाह और जीवनसाथी के बारे में बताती है। (BPHS 3.42)
मेष राशि की कुंडली में गुरु (पुरुष के लिए शुक्र), 7वें घर के स्वामी, और लग्न स्वामी का विश्लेषण विवाह के लिए किया जाता है। गुरु की स्थिति और दृष्टि विवाह के योग को प्रभावित करती है, जबकि 7वें घर के स्वामी की स्थिति जीवनसाथी के स्वभाव और विवाह के समय को बताती है। (Phaladeepika 7.14)
शास्त्रीय 7वें भाव के योग, राहु-शुक्र, गुरु-चंद्र संयोजन विवाह के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। जब गुरु और शुक्र की दृष्टि 7वें भाव पर पड़ती है, तो विवाह के योग बनते हैं। इसके अलावा, राहु और शुक्र का संयोजन भी विवाह के लिए महत्वपूर्ण होता है। (BPHS 7.1)
मेष राशि के लिए विशिष्ट दशा-अंतर्दशा में विवाह की संभावना सबसे अधिक होती है। जब गुरु की दशा में शुक्र की अंतर्दशा चलती है, तो विवाह के योग बनते हैं। इसके अलावा, जब 7वें घर के स्वामी की दशा में गुरु की अंतर्दशा चलती है, तो भी विवाह के योग बनते हैं। (Saravali 41.1)
गुरु का 7वें भाव या उसके स्वामी पर गोचर विवाह के लिए महत्वपूर्ण होता है। जब गुरु 7वें भाव में गोचर करता है, तो विवाह के योग बनते हैं। इसके अलावा, जब गुरु 7वें घर के स्वामी पर गोचर करता है, तो भी विवाह के योग बनते हैं। (BPHS 47.1)
मांगलिक दोष, शनि की दृष्टि, कमजोर 7वाँ भाव विवाह में देरी के कारण हो सकते हैं। मांगलिक दोष के कारण विवाह में देरी हो सकती है, जबकि शनि की दृष्टि 7वें भाव पर विवाह को देरी कर सकती है। इसके अलावा, कमजोर 7वाँ भाव भी विवाह में देरी का कारण हो सकता है। (Phaladeepika 7.21)
विलंब परिहार के लिए शास्त्रीय उपाय किए जा सकते हैं। मांगलिक दोष के लिए कुंडली मिलान और विवाह पूर्व पूजा करना आवश्यक होता है। इसके अलावा, शनि की दृष्टि के लिए शनि की पूजा और दान करना आवश्यक होता है। (BPHS 46.1)
विवाह की उम्र की सामान्य सीमा 25 से 35 वर्ष के बीच होती है। हालांकि, यह उम्र व्यक्ति की कुंडली और ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करती है। (Saravali 41.2)
ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली विशिष्ट है — कैरियर का समय, रिश्ते, स्वास्थ्य, जो भी पूछना चाहें।
अपनी कुंडली से पूछें →मेष राशि वालों की शादी के लिए गुरु की दशा में शुक्र की अंतर्दशा और 7वें घर के स्वामी की दशा में गुरु की अंतर्दशा महत्वपूर्ण होती है। इसके अलावा, गुरु का 7वें भाव या उसके स्वामी पर गोचर भी विवाह के लिए महत्वपूर्ण होता है। (BPHS 7.1)
विवाह में देरी मांगलिक दोष, शनि की दृष्टि, और कमजोर 7वाँ भाव के कारण हो सकती है। मांगलिक दोष के कारण विवाह में देरी हो सकती है, जबकि शनि की दृष्टि 7वें भाव पर विवाह को देरी कर सकती है। इसके अलावा, कमजोर 7वाँ भाव भी विवाह में देरी का कारण हो सकता है। (Phaladeepika 7.21)
मांगलिक होने पर कुंडली मिलान और विवाह पूर्व पूजा करना आवश्यक होता है। इसके अलावा, शनि की पूजा और दान करना भी आवश्यक होता है। (BPHS 46.1)
विवाह के लिए गुरु की दशा में शुक्र की अंतर्दशा और 7वें घर के स्वामी की दशा में गुरु की अंतर्दशा महत्वपूर्ण होती है। इसके अलावा, गुरु का 7वें भाव या उसके स्वामी पर गोचर भी विवाह के लिए महत्वपूर्ण होता है। (BPHS 7.1)
विवाह की उम्र की सामान्य सीमा 25 से 35 वर्ष के बीच होती है। हालांकि, यह उम्र व्यक्ति की कुंडली और ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करती है। (Saravali 41.2)
विवाह में देरी के लिए मांगलिक दोष, शनि की दृष्टि, और कमजोर 7वाँ भाव के कारणों को दूर करने के लिए कुंडली मिलान, विवाह पूर्व पूजा, शनि की पूजा और दान करना आवश्यक होता है। (BPHS 46.1)
विवाह के लिए गुरु, शुक्र, और 7वें घर के स्वामी महत्वपूर्ण होते हैं। गुरु की दशा में शुक्र की अंतर्दशा और 7वें घर के स्वामी की दशा में गुरु की अंतर्दशा विवाह के लिए महत्वपूर्ण होती है। (BPHS 7.1)
विवाह के लिए कुंडली मिलान, विवाह पूर्व पूजा, शनि की पूजा और दान करना आवश्यक होता है। इसके अलावा, गुरु का 7वें भाव या उसके स्वामी पर गोचर भी विवाह के लिए महत्वपूर्ण होता है। (BPHS 46.1)
विवाह में देरी के लिए मांगलिक दोष, शनि की दृष्टि, और कमजोर 7वाँ भाव के कारणों को दूर करने के लिए कुंडली मिलान, विवाह पूर्व पूजा, शनि की पूजा और दान करना आवश्यक होता है। (BPHS 46.1)
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