आपकी कुंडली, आपके सवाल — 20-मिनट का परामर्श
कुंडली कुछ सेकंडों में बन जाती है। 20 मिनट आपके लिए हैं — शास्त्रीय ज्योतिष से पूछें कि आपकी ग्रह स्थितियाँ कैरियर, रिश्तों, समय, और बाकी जीवन के लिए क्या कहती हैं।
परामर्श शुरू करें — ₹49 →✓ निःशुल्क 5-मिनट·✓ ₹199₹49 में 20-मिनट का परामर्श·✓ कोई OTP नहीं·✓ 10 भारतीय भाषाएँ
राहु का दूसरे भाव में स्थापन: अर्थ, प्रभाव एवं समाधान ज्योतिष शास्त्र में राहु को छाया ग्रह कहा जाता है, जो मनुष्य के जीवन में गूढ़ एवं अप्रत्याशित मोड़ लाने का कार्य करता है। दूसरे भाव में राहु का स्थापन जातक के जीवन में धन, वाणी, परिवार, मुख-मंडल एवं संवाद कौशल पर गहरा प्रभाव डालता है। यह स्थान जातक को असाधारण वक्ता तो बना सकता है, किंतु साथ ही धन-संचय में अनिश्चितता एवं मुख से निकली बातों के कारण उत्पन्न विवादों का भी कारण बन सकता है। इस लेख में हम दूसरे भाव में राहु के प्रभाव, उसके विभिन्न पहलुओं, दशा एवं गोचर में इसके प्रभाव तथा शास्त्रीय उपायों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यह विश्लेषण बृहत् पाराशर होरा शास्त्र एवं फलदीपिका जैसे शास्त्रीय ग्रंथों पर आधारित होगा। दूसरे भाव में राहु का सामान्य परिचय दूसरा भाव जातक के मुख, वाणी, धन, शिक्षा, परिवार एवं मुख-मंडल का प्रतिनिधित्व करता है। इस भाव में राहु का स्थापन जातक को असाधारण वक्ता एवं प्रभावशाली संवाद कौशल प्रदान कर सकता है। किंतु, राहु की प्रकृति छल एवं मोह की होती है, अतः यह जातक को धन के प्रति लालच, असत्य भाषण एवं मुख से निकली बातों के कारण उत्पन्न विवादों में भी फंसा सकता है। इस भाव में राहु के प्रभाव को समझने के लिए हमें राहु के स्वभाव एवं दूसरे भाव के स्वामी ग्रह के संयोग पर ध्यान देना आवश्यक है। यदि दूसरे भाव का स्वामी बलवान एवं शुभ ग्रहों से युक्त है, तो राहु के प्रभाव से उत्पन्न प्रतिकूलता कम हो सकती है। इसके विपरीत, यदि दूसरे भाव का स्वामी दुर्बल अथवा अशुभ ग्रहों से युक्त है, तो राहु के प्रभाव से धन हानि, मुख के रोग एवं परिवार में कलह की संभावना बढ़ जाती है। शास्त्रीय ग्रंथ बृहत् जातक में कहा गया है कि दूसरे भाव में स्थित राहु जातक को "अप्रत्याशित धन लाभ" एवं "अत्यधिक बोलने" का स्वभाव प्रदान करता है। किंतु, यदि दूसरे भाव में राहु के साथ कोई अशुभ ग्रह जैसे शनि अथवा मंगल भी स्थित हो, तो जातक को मुख के रोग एवं मुख से निकली बातों के कारण उत्पन्न कानूनी विवादों का सामना करना पड़ सकता है। व्यक्तित्व पर प्रभाव दूसरे भाव में राहु के जातक के व्यक्तित्व पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं: अत्यधिक वाचाल स्वभाव: जातक मुखर, प्रभावशाली वक्ता एवं संवाद कौशल से संपन्न होता है। किंतु, यह गुण कभी-कभी अत्यधिक बोलने एवं दूसरों को चुप न रहने देने के रूप में भी प्रकट होता है। धन के प्रति लालच एवं असुरक्षा: जातक धन के प्रति अत्यधिक मोह रखता है तथा धन-संचय में असुरक्षा की भावना रखता सकता है। यह लालच उसे गलत मार्गों पर भी ले जा सकता है। मुख-मंडल में तेजस्विता: जातक का मुख-मंडल तेजस्वी एवं प्रभावशाली होता है, किंतु मुख के रोग जैसे मुँहासे, मुख के छाले अथवा दांतों की समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं। शिक्षा एवं ज्ञान में रुचि: जातक को विदेशी भाषाओं अथवा उच्च शिक्षा में रुचि हो सकती है। किंतु, शिक्षा के क्षेत्र में भी जातक को असुरक्षा एवं आत्म-संदेह का सामना करना पड़ सकता है। परिवारिक संबंधों में उतार-चढ़ाव: परिवार के सदस्यों के साथ संबंधों में उतार-चढ़ाव आ सकता है। जातक परिवार के प्रति अत्यधिक मोह रख सकता है किंतु साथ ही परिवार के सदस्यों के साथ विवादों में भी शामिल हो सकता है। इस प्रकार, दूसरे भाव में राहु जातक को असाधारण व्यक्तित्व तो प्रदान करता है, किंतु साथ ही उसमें अनेक अंतर्विरोधी गुणों का समावेश भी करता है। करियर एवं व्यवसाय पर प्रभाव दूसरे भाव में राहु के जातक के करियर एवं व्यवसाय पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं: वक्तृत्व एवं संवाद कौशल का उपयोग: जातक को वक्तृत्व, लेखन, पत्रकारिता, शिक्षण अथवा मीडिया जैसे क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है। किंतु, इन क्षेत्रों में अत्यधिक प्रतिस्पर्धा एवं असुरक्षा की भावना भी उत्पन्न हो सकती है। धन-संचय में अनिश्चितता: जातक को धन-संचय में अत्यधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। धन का लाभ अप्रत्याशित ढंग से होता है तथा जातक को धन के प्रति अत्यधिक लालच एवं असुरक्षा की भावना भी रह सकती है। विदेशी व्यापार अथवा विदेश संबंधी व्यवसाय: जातक को विदेश व्यापार, आयात-निर्यात अथवा विदेश संबंधी व्यवसायों में सफलता मिल सकती है। किंतु, इन व्यवसायों में कानूनी एवं वित्तीय जोखिम भी शामिल होते हैं। स्वतंत्र व्यवसाय अथवा सलाहकारी भूमिकाएँ: जातक स्वतंत्र व्यवसाय अथवा सलाहकारी भूमिकाओं में सफल हो सकता है, किंतु उसे अपने व्यवसाय अथवा सलाह में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखनी होगी। अन्यथा, ग्राहकों अथवा सहयोगियों के साथ विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। धन-संबंधी जोखिम: जातक को धन-संबंधी जोखिम जैसे निवेश, जुआ, अथवा अनैतिक व्यवसायों में शामिल होने का मोह उत्पन्न हो सकता है। इस प्रकार, दूसरे भाव में राहु जातक को करियर के क्षेत्र में अनेक अवसर प्रदान करता है, किंतु साथ ही उसमें अनेक चुनौतियाँ एवं जोखिम भी शामिल होते हैं। जातक को अपने करियर के प्रति सजग एवं सतर्क रहना आवश्यक है। संबंध एवं वैवाहिक जीवन पर प्रभाव दूसरे भाव में राहु के जातक के संबंध एवं वैवाहिक जीवन पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं: विवाह में देरी अथवा असमान विवाह: जातक का विवाह देर से होता है अथवा जातक का विवाह अपनी जाति, धर्म अथवा सामाजिक स्तर से भिन्न व्यक्ति से होता है। विवाह के पश्चात् संबंधों में उतार-चढ़ाव: विवाह के पश्चात् जातक के संबंधों में उतार-चढ़ाव आ सकता है। विवाह में विश्वासघात, छल अथवा कानूनी विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। पति-पत्नी के मध्य अत्यधिक संवाद: पति-पत्नी के मध्य अत्यधिक संवाद होता है किंतु साथ ही अत्यधिक विवाद एवं कलह भी उत्पन्न हो सकती है। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि अथवा हानि: जातक को सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि मिल सकती है किंतु साथ ही समाज में बदनामी अथवा कानूनी विवादों का सामना भी करना पड़ सकता है। विवाह के पश्चात् धन-संबंधी विवाद: विवाह के पश्चात् धन-संबंधी विवाद उत्पन्न हो सकते हैं, विशेष रूप से संयुक्त खातों अथवा संपत्ति के बँटवारे को लेकर। इस प्रकार, दूसरे भाव में राहु जातक के वैवाहिक जीवन में अनेक अवसर एवं चुनौतियाँ दोनों प्रदान करता है। जातक को अपने वैवाहिक संबंधों में पारदर्शिता एवं विश्वास बनाए रखना आवश्यक है। स्वास्थ्य पर प्रभाव दूसरे भाव में राहु के जातक के स्वास्थ्य पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं: मुख एवं मुख-मंडल के रोग: मुख के रोग जैसे मुँहासे, मुख के छाले, दांतों की समस्याएँ, गले में संक्रमण अथवा मुख के कैंसर की संभावना बढ़ जाती है। वाणी संबंधी समस्याएँ: वाणी संबंधी समस्याएँ जैसे आवाज बैठना, बोलने में कठिनाई अथवा मुख से लार टपकना उत्पन्न हो सकती हैं। पाचन संबंधी समस्याएँ: पाचन संबंधी समस्याएँ जैसे अम्लता, अल्सर अथवा गैस उत्पन्न हो सकती हैं। मानसिक तनाव एवं चिंता: अत्यधिक बोलने एवं धन के प्रति लालच के कारण मानसिक तनाव एवं चिंता उत्पन्न हो सकती है। नेत्र संबंधी समस्याएँ: नेत्र संबंधी समस्याएँ जैसे निकट दृष्टि दोष अथवा मोतियाबिंद उत्पन्न हो सकती हैं। इस प्रकार, दूसरे भाव में राहु जातक के स्वास्थ्य पर अनेक प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। जातक को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना आवश्यक है तथा नियमित रूप से चिकित्सकीय परामर्श लेते रहना चाहिए। विभिन्न लग्नों में दूसरे भाव में राहु का प्रभाव राहु का प्रभाव लग्न एवं दूसरे भाव के स्वामी ग्रहों के संयोग पर निर्भर करता है। विभिन्न लग्नों में दूसरे भाव में राहु के प्रभाव को समझने के लिए हमें लग्न एवं दूसरे भाव के स्वामी ग्रहों के बल एवं स्थिति पर ध्यान देना आवश्यक है। मेष लग्न मेष लग्न में दूसरा भाव वृषभ राशि का होता है, जिसका स्वामी शुक्र होता है। यदि दूसरे भाव में राहु स्थित हो, तो जातक को धन-संचय में अत्यधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। किंतु, शुक्र का बल जातक को सुंदर मुख-मंडल एवं आकर्षक व्यक्तित्व प्रदान कर सकता है। इस स्थिति में जातक को वक्तृत्व कौशल एवं संवाद कौशल में सफलता मिल सकती है। किंतु, शुक्र के अशुभ ग्रहों से युक्त होने पर जातक को मुख के रोग एवं मुख से निकली बातों के कारण कानूनी विवादों का सामना भी करना पड़ सकता है। वृषभ लग्न वृषभ लग्न में दूसरा भाव मिथुन राशि का होता है, जिसका स्वामी बुध होता है। यदि दूसरे भाव में राहु स्थित हो, तो जातक अत्यधिक वक्ता एवं संवाद कौशल से संपन्न होता है। किंतु, बुध का अशुभ प्रभाव जातक को धन-संचय में कठिनाई एवं मुख के रोग उत्पन्न कर सकता है। इस स्थिति में जातक को लेखन, पत्रकारिता अथवा मीडिया जैसे क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है। किंतु, अत्यधिक बोलने के कारण जातक को दूसरों के साथ विवादों का सामना भी करना पड़ सकता है। मिथुन लग्न मिथुन लग्न में दूसरा भाव कर्क राशि का होता है, जिसका स्वामी चंद्रमा होता है। यदि दूसरे भाव में राहु स्थित हो, तो जातक अत्यधिक भावुक एवं संवेदनशील होता है। किंतु, चंद्रमा का अशुभ प्रभाव जातक को धन-संचय में कठिनाई एवं मुख के रोग उत्पन्न कर सकता है। इस स्थिति में जातक को लेखन, कविता अथवा संगीत जैसे क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है। किंतु, अत्यधिक भावुकता के कारण जातक को पारिवारिक संबंधों में कलह एवं विवादों का सामना भी करना पड़ सकता है। कर्क लग्न कर्क लग्न में दूसरा भाव सिंह राशि का होता है, जिसका स्वामी सूर्य होता है। यदि दूसरे भाव में राहु स्थित हो, तो जातक अत्यधिक प्रभावशाली वक्ता एवं नेता बन सकता है। किंतु, सूर्य का अशुभ प्रभाव जातक को धन-संचय में कठिनाई एवं मुख के रोग उत्पन्न कर सकता है। इस स्थिति में जातक को राजनीति, प्रशासन अथवा उच्च पदों से संबंधित क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है। किंतु, अत्यधिक आत्म-विश्वास एवं लालच के कारण जातक को समाज में बदनामी अथवा कानूनी विवादों का सामना भी करना पड़ सकता है। सिंह लग्न सिंह लग्न में दूसरा भाव कन्या राशि का होता है, जिसका स्वामी बुध होता है। यदि दूसरे भाव में राहु स्थित हो, तो जातक अत्यधिक बुद्धिमान एवं विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण वाला होता है। किंतु, बुध का अशुभ प्रभाव जातक को धन-संचय में कठिनाई एवं मुख के रोग उत्पन्न कर सकता है। इस स्थिति में जातक को लेखन, अनुसंधान अथवा तकनीकी क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है। किंतु, अत्यधिक विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के कारण जातक को दूसरों के साथ विवादों का सामना भी करना पड़ सकता है। कन्या लग्न कन्या लग्न में दूसरा भाव तुला राशि का होता है, जिसका स्वामी शुक्र होता है। यदि दूसरे भाव में राहु स्थित हो, तो जातक अत्यधिक आकर्षक एवं प्रभावशाली वक्ता होता है। किंतु, शुक्र का अशुभ प्रभाव जातक को धन-संचय में कठिनाई एवं मुख के रोग उत्पन्न कर सकता है। इस स्थिति में जातक को फैशन, सौंदर्य, कला अथवा मीडिया जैसे क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है। किंतु, अत्यधिक लालच एवं असुरक्षा के कारण जातक को दूसरों के साथ विवादों का सामना भी करना पड़ सकता है। राहु की दशा के प्रभाव राहु की दशा जातक के जीवन में अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है। दूसरे भाव में स्थित राहु की दशा जातक के धन, वाणी, मुख-मंडल एवं परिवार पर गहरा प्रभाव डालती है। दशा के दौरान उत्पन्न होने वाले प्रभाव जातक की कुंडली में स्थित अन्य ग्रहों एवं भावों पर निर्भर करते हैं। शास्त्रीय ग्रंथ बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार: "दूसरे भाव में स्थित राहु की दशा जातक को धन-संचय में अत्यधिक मेहनत कराती है। किंतु, यदि दूसरे भाव में चंद्रमा अथवा शुक्र स्थित हों, तो जातक को धन-संबंधी लाभ एवं अप्रत्याशित धन प्राप्ति होती है। इसके विपरीत, यदि दूसरे भाव में अशुभ ग्रह जैसे शनि अथवा मंगल स्थित हों, तो जातक को धन हानि, मुख के रोग एवं कानूनी विवादों का सामना करना पड़ सकता है।" (BPHS 3.
ज्योतिष शास्त्र में राहु को छाया ग्रह कहा जाता है, जो मनुष्य के जीवन में गूढ़ एवं अप्रत्याशित मोड़ लाने का कार्य करता है। दूसरे भाव में राहु का स्थापन जातक के जीवन में धन, वाणी, परिवार, मुख-मंडल एवं संवाद कौशल पर गहरा प्रभाव डालता है। यह स्थान जातक को असाधारण वक्ता तो बना सकता है, किंतु साथ ही धन-संचय में अनिश्चितता एवं मुख से निकली बातों के कारण उत्पन्न विवादों का भी कारण बन सकता है।
इस लेख में हम दूसरे भाव में राहु के प्रभाव, उसके विभिन्न पहलुओं, दशा एवं गोचर में इसके प्रभाव तथा शास्त्रीय उपायों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यह विश्लेषण बृहत् पाराशर होरा शास्त्र एवं फलदीपिका जैसे शास्त्रीय ग्रंथों पर आधारित होगा।
दूसरा भाव जातक के मुख, वाणी, धन, शिक्षा, परिवार एवं मुख-मंडल का प्रतिनिधित्व करता है। इस भाव में राहु का स्थापन जातक को असाधारण वक्ता एवं प्रभावशाली संवाद कौशल प्रदान कर सकता है। किंतु, राहु की प्रकृति छल एवं मोह की होती है, अतः यह जातक को धन के प्रति लालच, असत्य भाषण एवं मुख से निकली बातों के कारण उत्पन्न विवादों में भी फंसा सकता है।
इस भाव में राहु के प्रभाव को समझने के लिए हमें राहु के स्वभाव एवं दूसरे भाव के स्वामी ग्रह के संयोग पर ध्यान देना आवश्यक है। यदि दूसरे भाव का स्वामी बलवान एवं शुभ ग्रहों से युक्त है, तो राहु के प्रभाव से उत्पन्न प्रतिकूलता कम हो सकती है। इसके विपरीत, यदि दूसरे भाव का स्वामी दुर्बल अथवा अशुभ ग्रहों से युक्त है, तो राहु के प्रभाव से धन हानि, मुख के रोग एवं परिवार में कलह की संभावना बढ़ जाती है।
शास्त्रीय ग्रंथ बृहत् जातक में कहा गया है कि दूसरे भाव में स्थित राहु जातक को "अप्रत्याशित धन लाभ" एवं "अत्यधिक बोलने" का स्वभाव प्रदान करता है। किंतु, यदि दूसरे भाव में राहु के साथ कोई अशुभ ग्रह जैसे शनि अथवा मंगल भी स्थित हो, तो जातक को मुख के रोग एवं मुख से निकली बातों के कारण उत्पन्न कानूनी विवादों का सामना करना पड़ सकता है।
दूसरे भाव में राहु के जातक के व्यक्तित्व पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं:
इस प्रकार, दूसरे भाव में राहु जातक को असाधारण व्यक्तित्व तो प्रदान करता है, किंतु साथ ही उसमें अनेक अंतर्विरोधी गुणों का समावेश भी करता है।
दूसरे भाव में राहु के जातक के करियर एवं व्यवसाय पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं:
इस प्रकार, दूसरे भाव में राहु जातक को करियर के क्षेत्र में अनेक अवसर प्रदान करता है, किंतु साथ ही उसमें अनेक चुनौतियाँ एवं जोखिम भी शामिल होते हैं। जातक को अपने करियर के प्रति सजग एवं सतर्क रहना आवश्यक है।
दूसरे भाव में राहु के जातक के संबंध एवं वैवाहिक जीवन पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं:
इस प्रकार, दूसरे भाव में राहु जातक के वैवाहिक जीवन में अनेक अवसर एवं चुनौतियाँ दोनों प्रदान करता है। जातक को अपने वैवाहिक संबंधों में पारदर्शिता एवं विश्वास बनाए रखना आवश्यक है।
दूसरे भाव में राहु के जातक के स्वास्थ्य पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं:
इस प्रकार, दूसरे भाव में राहु जातक के स्वास्थ्य पर अनेक प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। जातक को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना आवश्यक है तथा नियमित रूप से चिकित्सकीय परामर्श लेते रहना चाहिए।
ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली विशिष्ट है — कैरियर का समय, रिश्ते, स्वास्थ्य, जो भी पूछना चाहें।
अपनी कुंडली से पूछें →राहु का प्रभाव लग्न एवं दूसरे भाव के स्वामी ग्रहों के संयोग पर निर्भर करता है। विभिन्न लग्नों में दूसरे भाव में राहु के प्रभाव को समझने के लिए हमें लग्न एवं दूसरे भाव के स्वामी ग्रहों के बल एवं स्थिति पर ध्यान देना आवश्यक है।
मेष लग्न में दूसरा भाव वृषभ राशि का होता है, जिसका स्वामी शुक्र होता है। यदि दूसरे भाव में राहु स्थित हो, तो जातक को धन-संचय में अत्यधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। किंतु, शुक्र का बल जातक को सुंदर मुख-मंडल एवं आकर्षक व्यक्तित्व प्रदान कर सकता है।
इस स्थिति में जातक को वक्तृत्व कौशल एवं संवाद कौशल में सफलता मिल सकती है। किंतु, शुक्र के अशुभ ग्रहों से युक्त होने पर जातक को मुख के रोग एवं मुख से निकली बातों के कारण कानूनी विवादों का सामना भी करना पड़ सकता है।
वृषभ लग्न में दूसरा भाव मिथुन राशि का होता है, जिसका स्वामी बुध होता है। यदि दूसरे भाव में राहु स्थित हो, तो जातक अत्यधिक वक्ता एवं संवाद कौशल से संपन्न होता है। किंतु, बुध का अशुभ प्रभाव जातक को धन-संचय में कठिनाई एवं मुख के रोग उत्पन्न कर सकता है।
इस स्थिति में जातक को लेखन, पत्रकारिता अथवा मीडिया जैसे क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है। किंतु, अत्यधिक बोलने के कारण जातक को दूसरों के साथ विवादों का सामना भी करना पड़ सकता है।
मिथुन लग्न में दूसरा भाव कर्क राशि का होता है, जिसका स्वामी चंद्रमा होता है। यदि दूसरे भाव में राहु स्थित हो, तो जातक अत्यधिक भावुक एवं संवेदनशील होता है। किंतु, चंद्रमा का अशुभ प्रभाव जातक को धन-संचय में कठिनाई एवं मुख के रोग उत्पन्न कर सकता है।
इस स्थिति में जातक को लेखन, कविता अथवा संगीत जैसे क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है। किंतु, अत्यधिक भावुकता के कारण जातक को पारिवारिक संबंधों में कलह एवं विवादों का सामना भी करना पड़ सकता है।
कर्क लग्न में दूसरा भाव सिंह राशि का होता है, जिसका स्वामी सूर्य होता है। यदि दूसरे भाव में राहु स्थित हो, तो जातक अत्यधिक प्रभावशाली वक्ता एवं नेता बन सकता है। किंतु, सूर्य का अशुभ प्रभाव जातक को धन-संचय में कठिनाई एवं मुख के रोग उत्पन्न कर सकता है।
इस स्थिति में जातक को राजनीति, प्रशासन अथवा उच्च पदों से संबंधित क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है। किंतु, अत्यधिक आत्म-विश्वास एवं लालच के कारण जातक को समाज में बदनामी अथवा कानूनी विवादों का सामना भी करना पड़ सकता है।
सिंह लग्न में दूसरा भाव कन्या राशि का होता है, जिसका स्वामी बुध होता है। यदि दूसरे भाव में राहु स्थित हो, तो जातक अत्यधिक बुद्धिमान एवं विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण वाला होता है। किंतु, बुध का अशुभ प्रभाव जातक को धन-संचय में कठिनाई एवं मुख के रोग उत्पन्न कर सकता है।
इस स्थिति में जातक को लेखन, अनुसंधान अथवा तकनीकी क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है। किंतु, अत्यधिक विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के कारण जातक को दूसरों के साथ विवादों का सामना भी करना पड़ सकता है।
कन्या लग्न में दूसरा भाव तुला राशि का होता है, जिसका स्वामी शुक्र होता है। यदि दूसरे भाव में राहु स्थित हो, तो जातक अत्यधिक आकर्षक एवं प्रभावशाली वक्ता होता है। किंतु, शुक्र का अशुभ प्रभाव जातक को धन-संचय में कठिनाई एवं मुख के रोग उत्पन्न कर सकता है।
इस स्थिति में जातक को फैशन, सौंदर्य, कला अथवा मीडिया जैसे क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है। किंतु, अत्यधिक लालच एवं असुरक्षा के कारण जातक को दूसरों के साथ विवादों का सामना भी करना पड़ सकता है।
राहु की दशा जातक के जीवन में अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है। दूसरे भाव में स्थित राहु की दशा जातक के धन, वाणी, मुख-मंडल एवं परिवार पर गहरा प्रभाव डालती है। दशा के दौरान उत्पन्न होने वाले प्रभाव जातक की कुंडली में स्थित अन्य ग्रहों एवं भावों पर निर्भर करते हैं।
शास्त्रीय ग्रंथ बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार:
"दूसरे भाव में स्थित राहु की दशा जातक को धन-संचय में अत्यधिक मेहनत कराती है। किंतु, यदि दूसरे भाव में चंद्रमा अथवा शुक्र स्थित हों, तो जातक को धन-संबंधी लाभ एवं अप्रत्याशित धन प्राप्ति होती है। इसके विपरीत, यदि दूसरे भाव में अशुभ ग्रह जैसे शनि अथवा मंगल स्थित हों, तो जातक को धन हानि, मुख के रोग एवं कानूनी विवादों का सामना करना पड़ सकता है।"
(BPHS 3.42)
राहु दशा के दौरान उत्पन्न होने वाले प्रभावों को निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:
आपकी कुंडली। आपके सवाल। शास्त्रीय ज्योतिष पर आधारित 20-मिनट का परामर्श।
परामर्श शुरू करें — ₹199 ₹49