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शुक्र 2वें भाव में — कुंडली में फल और उपाय

शुक्र 2वें भाव में — कुंडली में फल और उपाय

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शुक्र का द्वितीय भाव में स्थिति: जन्म कुंडली में अर्थ एवं प्रभाव

जन्म कुंडली में शुक्र का द्वितीय भाव में स्थित होना जातक के जीवन के अनेक पक्षों को प्रभावित करता है। द्वितीय भाव व्यक्ति की वाणी, धन-संपत्ति, परिवार, मुखमंडल की सुंदरता, भोजन एवं रसना (जीभ, स्वाद) से संबंधित होता है। शुक्र, जो कि 'कामदेव' एवं 'सौंदर्य का देवता' माना जाता है, जब इस भाव में स्थित होता है तब जातक को सुख-समृद्धि, सुंदर मुख, मधुर वाणी एवं उत्तम भोजन संबंधी रुचि प्राप्त होती है।

इस स्थिति में शुक्र जातक को सौंदर्यप्रिय, संगीतप्रेमी, कला एवं साहित्य के प्रति रुझान प्रदान करता है। साथ ही, यह धन-संपत्ति एवं पारिवारिक सुख में भी वृद्धि करता है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, द्वितीय भाव के स्वामी एवं स्थित ग्रह के आधार पर जातक की वाणी, मुखमंडल की सुंदरता एवं धन-संपत्ति का स्तर निर्धारित होता है।

द्वितीय भाव में शुक्र का सामान्य प्रभाव

द्वितीय भाव में शुक्र की स्थिति जातक के जीवन में निम्नलिखित प्रकार से प्रभाव डालती है:

विभिन्न लग्नों में शुक्र का द्वितीय भाव प्रभाव

लग्न कुंडली के आधार पर शुक्र के द्वितीय भाव में स्थित होने के प्रभाव भिन्न-भिन्न होते हैं। नीचे प्रमुख लग्नों में इसके प्रभाव का वर्णन किया जा रहा है:

मेष लग्न

वृषभ लग्न

मिथुन लग्न

कर्क लग्न

सिंह लग्न

कन्या लग्न

तुला लग्न

वृश्चिक लग्न

धनु लग्न

मकर लग्न

कुंभ लग्न

मीन लग्न

ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली विशिष्ट है — कैरियर का समय, रिश्ते, स्वास्थ्य, जो भी पूछना चाहें।

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शुक्र की दशा एवं अंतरदशा में द्वितीय भाव प्रभाव

जब जातक की कुंडली में शुक्र की दशा अथवा अंतरदशा चल रही हो, तब द्वितीय भाव से संबंधित क्षेत्रों में विशेष प्रभाव देखने को मिलते हैं। शुक्र की दशा लगभग 20 वर्षों तक रहती है, किंतु इसकी अंतरदशाएँ 2-3 वर्षों तक होती हैं। इस दौरान जातक को निम्नलिखित प्रकार के फल प्राप्त होते हैं:

शुक्र की दशा के सामान्य प्रभाव

शुक्र की अंतरदशा के विशेष प्रभाव

शुक्र की अंतरदशा के दौरान जातक को द्वितीय भाव से संबंधित क्षेत्रों में तीव्रता से विकास होता है। इसके प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं:

शुक्र का गोचर एवं द्वितीय भाव पर प्रभाव

जब शुक्र का गोचर द्वितीय भाव में होता है, तब जातक के जीवन में द्वितीय भाव से संबंधित क्षेत्रों में विशेष प्रभाव देखने को मिलते हैं। शुक्र का गोचर लगभग 1 वर्ष तक रहता है। इस दौरान जातक को निम्नलिखित प्रकार के फल प्राप्त होते हैं:

शुक्र के गोचर के सामान्य प्रभाव

शुक्र गोचर के विशेष प्रभाव

शुक्र के गोचर के दौरान जातक को द्वितीय भाव से संबंधित क्षेत्रों में विशेष लाभ प्राप्त होते हैं। इसके प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं:

स्वास्थ्य पर द्वितीय भाव में शुक्र का प्रभाव

द्वितीय भाव व्यक्ति के मुख, वाणी, दाँत, गला, ग्रंथियाँ एवं रसना (जीभ) से संबंधित होता है। शुक्र का द्वितीय भाव पर प्रभाव निम्नलिखित प्रकार से होता है:

सकारात्मक प्रभाव

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