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सिंह और मेष कुंडली मिलान: कितने गुण मिलते हैं 2026?

सिंह और मेष कुंडली मिलान: कितने गुण मिलते हैं 2026?

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परिचय: कुंडली मिलान और विवाह में उसका महत्व

सिंह और मेष की जोड़ी में भकूट के 7 में से 0 अंक मिलते हैं, पर दोनों राशियों के स्वामी सूर्य और मंगल आपस में मित्र हैं, इसलिए यह दोष आम तौर पर कट जाता है। यानी पहली नज़र में कमज़ोर दिखने वाली यह जोड़ी असल में काफ़ी संभावनाओं वाली है। नीचे सिंह और मेष का कुंडली मिलान कूट-दर-कूट समझाया गया है।

कुंडली मिलान दो लोगों की जन्म-कुंडलियों की तुलना है, जिससे देखा जाता है कि स्वभाव, सोच और जीवन की दिशा कितनी मेल खाती है। हिंदू विवाह में इसे इसलिए अहम माना गया है क्योंकि शादी दो लोगों का नहीं, दो परिवारों का रिश्ता होती है। मिलान से पहले ही पता चल जाता है कि कहाँ तालमेल सहज रहेगा और कहाँ आपको थोड़ा ज़्यादा समझ और धैर्य रखना पड़ेगा।

मिलान में अष्टकूट का आधार लिया जाता है, यानी आठ कसौटियाँ और कुल 36 अंक। इनमें से कुछ कूट राशि से तय होते हैं और कुछ जन्म नक्षत्र से। इस लेख में दोनों का फ़र्क़ साफ़ रखा गया है, ताकि आप किसी अंदाज़े पर नहीं, पक्की बातों पर भरोसा करें।

अष्टकूट मिलान: आठ कूट और सिंह-मेष का विश्लेषण

सिंह राशि का स्वामी सूर्य है और मेष का मंगल। दोनों अग्नि तत्व की राशियाँ हैं। यानी दोनों में ऊर्जा, हिम्मत और आगे बढ़ने की चाह स्वाभाविक रूप से है। अब आठों कूट एक-एक करके देखें।

राशि से तय होने वाले कूट

जन्म नक्षत्र से तय होने वाले कूट

तारा (3 अंक), योनि (4 अंक), गण (6 अंक) और नाड़ी (8 अंक), ये चारों कूट राशि से नहीं, दोनों के जन्म नक्षत्र से तय होते हैं। इसलिए सिंह या मेष राशि का कोई एक तय गण, योनि, तारा या नाड़ी नहीं होती। एक ही राशि में जन्मे अलग-अलग लोगों के नक्षत्र अलग हो सकते हैं, और इन चारों कूटों का नतीजा उसी से बदलता है। इन चारों के अंक जानने के लिए आपको दोनों के सही जन्म नक्षत्र चाहिए।

कितने गुण मिलते हैं

राशि से तय होने वाले कूटों का हिसाब यह है: वर्ण में 1 अंक, ग्रह मैत्री में 5 अंक और भकूट में 0 अंक। वश्य चंद्र राशि से तय होता है; मेष वर की स्थिति में उसके 2 में से 0 अंक हैं, जबकि सिंह वर की स्थिति में इस संयोजन का अंक एक जैसा नहीं मिलता, इसलिए कोई संख्या नहीं दी जा रही।

36 में से कुल गुण इस जोड़ी के लिए अभी नहीं बताए जा सकते। कुल अंक के लिए दोनों के जन्म नक्षत्र ज़रूरी हैं, क्योंकि तारा, योनि, गण और नाड़ी का 21 अंकों का हिस्सा उन्हीं से बनता है। इसलिए किसी से सुनी हुई "इतने गुण मिलते हैं" वाली बात पर मत जाइए। सही तस्वीर तभी बनेगी जब दोनों की जन्म तारीख़, समय और स्थान से कुंडली बने।

भकूट दोष की संभावना और परिहार

भकूट दोष तब माना जाता है जब दोनों राशियाँ आपस में 2/12, 5/9 या 6/8 के संबंध में हों। इन पर भकूट के 0 अंक मिलते हैं, बाकी संबंधों पर पूरे 7। सिंह और मेष का संबंध 9/5 का है, इसलिए इस जोड़ी में भकूट के अंक शून्य रहते हैं।

पर यहाँ परिहार की शर्त पूरी होती है। कई परंपराओं में माना गया है कि दोनों राशियों का स्वामी एक ही ग्रह हो या वे आपस में मित्र हों, तो भकूट दोष कट जाता है। सिंह का स्वामी सूर्य और मेष का स्वामी मंगल आपस में मित्र हैं। इसलिए इस जोड़ी में भकूट दोष का असर कम माना जाता है। फिर भी परिहार किस परंपरा में कितना मान्य है, यह आपके पारिवारिक पंडित की परंपरा पर निर्भर करता है। अगर आप चाहें तो अपनी कुंडली से इसकी पुष्टि करवा लें।

ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली अलग है: विवाह का समय, रिश्ते, जो भी पूछना चाहें।

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नाड़ी दोष

नाड़ी दोष का सीधा संबंध जन्म नक्षत्र से है, राशि से नहीं। इसलिए सिंह-मेष की जोड़ी में नाड़ी दोष होगा या नहीं, यह अकेली राशि देखकर नहीं कहा जा सकता। नाड़ी दोष तब बनता है जब वर और वधू दोनों की नाड़ी एक ही हो। नाड़ी के 8 अंक होते हैं, और एक ही नाड़ी होने पर ये अंक नहीं मिलते।

शास्त्रीय परिहार भी माने गए हैं। परंपराओं में कहा गया है कि कुछ स्थितियों में, जैसे दोनों के नक्षत्र अलग हों पर नाड़ी एक ही निकले, तो दोष का असर घटा हुआ माना जाता है। इसका सही निर्णय दोनों के नक्षत्र और चरण देखकर ही होता है। इसलिए जब तक आपके नक्षत्र पता न हों, इस दोष को लेकर घबराइए मत और बेवजह निश्चिंत भी मत हो जाइए।

भावनात्मक एवं स्वभाव अनुकूलता

दोनों राशियाँ अग्नि तत्व की हैं और दोनों के स्वामी मित्र हैं। इसलिए स्वभाव में एक स्वाभाविक गर्मजोशी और आपसी समझ बन जाती है। दोनों खुलकर बोलने वाले और फ़ैसले लेने में तेज़ होते हैं, तो एक-दूसरे की रफ़्तार से घबराते नहीं।

सूर्य की तरफ़ से सिंह में मान और नेतृत्व की चाह रहती है, जबकि मंगल की तरफ़ से मेष में जोश और सीधापन। यही ताक़त कभी-कभी टकराव भी बन सकती है। दोनों को अपनी बात मनवाने की आदत हो सकती है। इसलिए रिश्ते में यह बात काम आएगी:

लंबी अवधि के विवाहित जीवन की संभावना

ग्रह मैत्री के पूरे 5 अंक इस जोड़ी को लंबे समय तक चलने वाली समझ देते हैं। जिस जोड़ी में दोनों के स्वामी मित्र हों, वहाँ रोज़ की छोटी बातों में भी तालमेल बना रहता है। यह शादी की नींव को मज़बूत करता है।

लंबे साथ के लिए बस यह ध्यान रखना होगा कि दोनों की तेज़ ऊर्जा एक ही दिशा में लगे। जब दोनों किसी साझा लक्ष्य पर काम करते हैं, चाहे घर हो, करियर हो या परिवार, तो यह जोड़ी बहुत आगे जाती है। दशा और गोचर के असर से बीच-बीच में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं, पर बुनियादी मेल बना रहता है।

अंक कम हों तो शास्त्रीय परिहार और उपाय

अगर आपकी कुंडली में कुल अंक कम निकलें तो घबराइए नहीं। कई बार अंक कम होने पर भी परिहार बन जाते हैं, और असली मिलान केवल अंकों से नहीं, पूरी कुंडली से तय होता है। उपाय की जगह पहले यह देखिए:

उपाय के रूप में परंपरा में सूर्य और मंगल की शांति के लिए साधारण नियम माने जाते हैं, जैसे रविवार को सूर्य को जल देना और मंगलवार को हनुमान जी का स्मरण। ये मन को स्थिर रखने के साधन हैं। इन्हें किसी पक्के नतीजे की गारंटी न समझें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंह और मेष का विवाह कैसा रहेगा?

दोनों अग्नि राशियाँ हैं और स्वामी सूर्य-मंगल आपस में मित्र हैं, इसलिए आपसी समझ अच्छी रहती है। ग्रह मैत्री के पूरे 5 अंक मिलते हैं, पर दोनों के अहंकार को संभालना ज़रूरी रहेगा।

सिंह और मेष में कितने गुण मिलते हैं?

राशि से तय होने वाले कूटों में वर्ण के 1, ग्रह मैत्री के 5 और भकूट के 0 अंक मिलते हैं। कुल अंक तारा, योनि, गण और नाड़ी पर भी निर्भर है, जो जन्म नक्षत्र से तय होते हैं, इसलिए दोनों के नक्षत्र चाहिए।

कितने गुण मिलने चाहिए?

कुल 36 अंकों में से आम तौर पर आधे से ज़्यादा मिलना अच्छा माना जाता है, पर यह कोई कठोर सीमा नहीं है। परंपराओं में परिहार और पूरी कुंडली का विश्लेषण भी साथ देखा जाता है।

क्या सिंह-मेष में भकूट दोष बनता है?

इस जोड़ी में 9/5 का संबंध है, जिस पर भकूट के 0 अंक मिलते हैं। पर सूर्य और मंगल मित्र हैं, इसलिए कई परंपराओं में यह दोष कट जाता है।

क्या इस जोड़ी में नाड़ी दोष होता है?

यह राशि से नहीं, जन्म नक्षत्र से तय होता है। नाड़ी दोष तब बनता है जब वर-वधू दोनों की नाड़ी एक ही हो, इसलिए सही उत्तर के लिए आपको दोनों के नक्षत्र जानने होंगे।

मांगलिक दोष की स्थिति में क्या करें?

मांगलिक दोष मंगल की भाव स्थिति से देखा जाता है, केवल राशि से नहीं। अगर दोनों की कुंडली में मंगल की स्थिति संतुलित हो तो असर कम माना जाता है। इसके लिए दोनों की पूरी कुंडली किसी जानकार से दिखवाएँ।

क्या वर्ण मिलान में कोई समस्या है?

नहीं। सिंह और मेष दोनों क्षत्रिय वर्ण की राशियाँ हैं, इसलिए सिंह वर हो या मेष वर, वर्ण का 1 अंक मिलता है।

वश्य कूट के अंक कैसे तय होते हैं?

वश्य चंद्र राशि से तय होता है, नक्षत्र से नहीं। सिंह वनचर और मेष चतुष्पद समूह की राशि है। मेष वर की स्थिति में 2 में से 0 अंक मिलते हैं। सिंह वर की स्थिति में अलग-अलग तालिकाओं में एक जैसा अंक नहीं मिलता।

दोनों के स्वभाव में सबसे बड़ा टकराव कहाँ हो सकता है?

दोनों को अपनी बात ऊपर रखने की आदत हो सकती है। सिंह में मान की चाह और मेष में तेज़ी रहती है, इसलिए बहस जल्दी गरम हो सकती है। बारी-बारी से पहल करने और खुलकर तारीफ़ करने से यह संभल जाता है।

अपनी जोड़ी का सही मिलान कैसे जानें?

दोनों की सही जन्म तारीख़, समय और स्थान से कुंडली बनवाइए। उसी से जन्म नक्षत्र, तारा, योनि, गण, नाड़ी और कुल अंक सामने आएँगे।

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