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सिंह कुंडली मिलान: कितने गुण मिलते हैं सिंह जातक को?

सिंह कुंडली मिलान: कितने गुण मिलते हैं सिंह जातक को?

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सिंह राशि के जातकों के लिए कुंडली मिलान में वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री जैसे कूटों का विश्लेषण करते हैं। निःशुल्क देखें।

सिंह और सिंह राशि में कुंडली मिलान: परिचय

सिंह और सिंह की जोड़ी में राशि से तय होने वाले तीन कूट पूरे अंक देते हैं। ग्रह मैत्री में 5 में से 5, भकूट में 7 में से 7 और वश्य में 2 में से 2 अंक मिलते हैं। इसलिए सिंह-सिंह का मिलान राशि के स्तर पर काफ़ी मज़बूत दिखता है, पर असली तस्वीर दोनों के जन्म नक्षत्र से बनती है।

कुंडली मिलान वह प्रक्रिया है जिसमें वर और वधू की जन्म कुंडलियों को मिलाकर देखा जाता है कि दोनों का स्वभाव, सोच और जीवन की दिशा कितनी मेल खाती है। हिंदू शादी में इसे इसलिए अहमियत मिली कि शादी दो लोगों के साथ दो परिवारों का भी रिश्ता है। मिलान का मक़सद डराना नहीं, बल्कि रिश्ते की ताक़त और संभलकर चलने वाली जगहें पहले से दिखा देना है।

इस लेख में हम आठों कूट एक-एक करके देखेंगे, भकूट और नाड़ी दोष की स्थिति समझेंगे और अंत में परिहार और आम सवालों पर आएँगे।

अष्टकूट मिलान: आठ कूट क्या हैं

अष्टकूट मिलान में कुल 36 अंक होते हैं, जो आठ कूटों में बँटे हैं: वर्ण (1), वश्य (2), तारा (3), योनि (4), ग्रह मैत्री (5), गण (6), भकूट (7) और नाड़ी (8)। इनमें से कुछ राशि से तय होते हैं और कुछ जन्म नक्षत्र से। यही फ़र्क़ समझना इस लेख की सबसे ज़रूरी बात है।

सिंह और सिंह के लिए हर कूट का विश्लेषण

वर्ण: दोनों राशियाँ क्षत्रिय वर्ण की हैं। क्रम ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र का है, और वर को 1 अंक तब मिलता है जब उसका वर्ण वधू के बराबर या ऊँचा हो। यहाँ दोनों बराबर हैं, इसलिए 1 अंक मिलता है।

वश्य: सिंह राशि वनचर समूह में आती है, और यह समूह चंद्र राशि से तय होता है। दोनों वनचर हैं, इसलिए इस जोड़ी को 2 में से 2 अंक मिलते हैं।

तारा, योनि, गण और नाड़ी: ये चारों जन्म नक्षत्र से तय होते हैं। सिंह राशि में मघा, पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा फाल्गुनी के नक्षत्र आ सकते हैं, इसलिए सिंह-सिंह की किसी एक जोड़ी के लिए इन चारों कूटों का एक तय जवाब नहीं हो सकता। दोनों के असली जन्म नक्षत्र डालने पर ही ये अंक निकलेंगे।

ग्रह मैत्री: दोनों राशियों का स्वामी सूर्य है, यानी एक ही ग्रह। इस स्थिति में ग्रह मैत्री के 5 में से 5 अंक मिलते हैं।

भकूट: सिंह राशि सिंह से पहली है और दूसरी भी पहली, यानी 1/1 का संबंध। इस पर भकूट के 7 में से 7 अंक मिलते हैं (2/12, 5/9 और 6/8 पर 0 अंक, बाकी पर 7)।

कितने गुण मिलते हैं

राशि के आधार पर जो अंक पक्के हैं, वे ये हैं:

यानी राशि और चंद्र राशि वाले इन चार कूटों में सिंह-सिंह को पूरे अंक मिलते हैं। तारा (3), योनि (4), गण (6) और नाड़ी (8) के अंक बाकी हैं, और वे दोनों के जन्म नक्षत्र से ही तय होंगे। इसलिए इस जोड़ी के लिए 36 में से कुल कितने अंक बनेंगे, यह अभी नहीं कहा जा सकता। उसके लिए दोनों के जन्म नक्षत्र चाहिए।

भकूट दोष की संभावना

भकूट दोष तब बनता है जब दोनों राशियाँ एक-दूसरे से 2/12, 5/9 या 6/8 के संबंध में हों। सिंह-सिंह में दोनों राशियाँ एक ही हैं, इसलिए संबंध 1/1 का है और भकूट के पूरे 7 अंक मिलते हैं। यहाँ भकूट दोष बनता ही नहीं।

दोष बनने पर कई परंपराओं में परिहार यह माना जाता है कि दोनों राशियों का स्वामी एक ही ग्रह हो या वे आपस में मित्र हों। सिंह-सिंह में स्वामी एक ही ग्रह सूर्य है, इसलिए यह शर्त भी पहले से पूरी है। भकूट के मोर्चे पर इस जोड़ी को चिंता की कोई वजह नहीं है।

ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली अलग है: विवाह का समय, रिश्ते, जो भी पूछना चाहें।

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नाड़ी दोष

नाड़ी दोष राशि से नहीं, जन्म नक्षत्र से तय होता है। यह तब होता है जब वर और वधू दोनों की नाड़ी एक ही हो। सिंह राशि में तीनों नक्षत्र मघा, पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा फाल्गुनी आ सकते हैं, इसलिए सिर्फ़ राशि देखकर कोई नहीं कह सकता कि इस जोड़ी में नाड़ी दोष है या नहीं।

जाँच का सही तरीका यह है कि दोनों के जन्म नक्षत्र लेकर उनकी नाड़ी देखी जाए। अगर नाड़ी अलग निकले तो दोष नहीं बनता। अगर एक ही निकले तो किसी अनुभवी ज्योतिषी से परिहार के बारे में पूछना ठीक रहेगा, क्योंकि शास्त्रीय परंपराओं में कुछ स्थितियों में इसे हल्का माना गया है।

भावनात्मक और स्वभाव की अनुकूलता

दोनों का तत्व अग्नि है और दोनों का स्वामी सूर्य। इसका मतलब है कि सोचने का ढंग, आत्मसम्मान की भावना और नेतृत्व की आदत काफ़ी मिलती-जुलती होगी। दोनों एक-दूसरे को समझेंगे, क्योंकि दोनों की ज़रूरतें एक जैसी हैं: सम्मान, पहचान और अपनी बात रखने की जगह।

इसी मेल में एक चुनौती भी छिपी है। जब दोनों अपनी बात पर टिके रहें और कोई झुकना न चाहे, तो छोटी बात भी अहम का मसला बन सकती है। यह कमज़ोरी जोड़ी की किसी कमी से नहीं, बल्कि दोनों की एक जैसी ताक़त से आती है।

लंबी अवधि के विवाहित जीवन की संभावना

राशि के स्तर पर वर्ण, वश्य, ग्रह मैत्री और भकूट के पूरे अंक एक मज़बूत नींव दिखाते हैं। जिस रिश्ते में स्वामी एक हो और भकूट साफ़ हो, उसमें बुनियादी तालमेल आसानी से बैठता है। लंबे समय में रिश्ते की सेहत इस पर निर्भर करेगी कि दोनों अपनी तेज़ी को बाँटना सीखते हैं या नहीं।

एक और बात: राशि मिलान कुंडली का सिर्फ़ एक हिस्सा है। दशा, मंगल की स्थिति और सातवाँ भाव मिलकर पूरी तस्वीर बनाते हैं। इसलिए इस लेख को शुरुआत मानें, पूरा फ़ैसला नहीं।

अगर स्कोर कम निकले तो परिहार

सिंह-सिंह में राशि वाले कूट पूरे अंक देते हैं, इसलिए कमी आए तो वह तारा, योनि, गण या नाड़ी की तरफ़ से ही आएगी। ऐसी स्थिति में पहला कदम घबराना नहीं, बल्कि दोनों के जन्म नक्षत्र से असली अंक निकालना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंह और सिंह का विवाह कैसा रहेगा?

राशि के हिसाब से यह जोड़ी मज़बूत है, क्योंकि वर्ण, वश्य, ग्रह मैत्री और भकूट चारों में पूरे अंक मिलते हैं। असली परिणाम दोनों के जन्म नक्षत्र और पूरी कुंडली पर निर्भर करेगा।

सिंह और सिंह में भकूट दोष बनता है क्या?

नहीं। दोनों राशियाँ एक ही हैं, इसलिए संबंध 1/1 का है और भकूट के पूरे 7 अंक मिलते हैं। दोष तो 2/12, 5/9 या 6/8 के संबंध में बनता है।

कितने गुण मिलने चाहिए?

अक्सर 18 या उससे ज़्यादा अंक ठीक माने जाते हैं, पर यह एक सामान्य परंपरा है, कोई कड़ा नियम नहीं। सिंह-सिंह का कुल अंक जानने के लिए दोनों के जन्म नक्षत्र चाहिए।

नाड़ी दोष कब बनता है?

जब वर और वधू दोनों की नाड़ी एक ही हो। यह जन्म नक्षत्र से तय होता है, इसलिए सिर्फ़ राशि देखकर इसका पता नहीं चलता।

क्या एक ही राशि के लोग शादी कर सकते हैं?

हाँ। एक ही राशि में भकूट 1/1 बनता है और पूरे अंक मिलते हैं। असली जाँच जन्म नक्षत्र की होती है, क्योंकि एक राशि में तीन नक्षत्र तक आ सकते हैं।

मांगलिक दोष की स्थिति में क्या करें?

मांगलिक दोष मंगल की भाव-स्थिति से बनता है, राशि से नहीं। दोनों कुंडलियाँ किसी अनुभवी ज्योतिषी को दिखाएँ और देखें कि दोनों में मंगल की स्थिति संतुलित है या नहीं। अक्सर दोनों मांगलिक हों तो दोष का असर कम माना जाता है।

सिंह-सिंह में अहम का टकराव क्यों हो सकता है?

दोनों का स्वामी सूर्य है और दोनों अग्नि तत्व के हैं, इसलिए दोनों अपनी बात पर टिकने वाले होते हैं। यह ताक़त है, पर बातचीत में नरमी न रखी जाए तो बहस लंबी खिंच सकती है।

तारा, योनि और गण कैसे देखे जाते हैं?

ये तीनों जन्म नक्षत्र से तय होते हैं। दोनों का नक्षत्र जानकर ही इनके अंक और असर समझे जा सकते हैं।

ग्रह मैत्री में पूरे अंक कैसे मिलते हैं?

जब दोनों राशियों का स्वामी एक ही ग्रह हो, तो ग्रह मैत्री के 5 में से 5 अंक मिलते हैं। सिंह-सिंह में दोनों का स्वामी सूर्य है, इसलिए यह पूरा अंक पक्का है।

मिलान के बाद अगला कदम क्या है?

दोनों के जन्म नक्षत्र लेकर तारा, योनि, गण और नाड़ी का असली स्कोर निकालें, फिर दशा और सातवें भाव को जाँचें। इससे राशि वाली मज़बूत नींव के ऊपर पूरी तस्वीर बनती है।

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