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सिंह विवाह योग कब होगी? जानें सटीक समय (2026)

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सिंह राशि वालों के लिए विवाह योग और शादी के समय का विस्तृत विश्लेषण सिंह राशि के स्वामी ग्रह सूर्य है, और 7वें भाव की भूमिका विवाह और जीवनसाथी के बारे में जानकारी प्रदान करती है। सिंह राशि वालों के लिए विवाह योग और शादी के समय का विश्लेषण करने के लिए, हमें इन महत्वपूर्ण कारकों को समझना होगा। विवाह कारक ग्रह सिंह राशि की कुंडली में गुरु (पुरुष के लिए शुक्र), 7वें घर के स्वामी, और लग्न स्वामी का विश्लेषण करना महत्वपूर्ण है। गुरु की स्थिति विवाह के लिए शुभ मानी जाती है, जबकि शुक्र की स्थिति पुरुषों के लिए विवाह के लिए महत्वपूर्ण है। 7वें घर के स्वामी की स्थिति जीवनसाथी के बारे में जानकारी प्रदान करती है, और लग्न स्वामी की स्थिति व्यक्ति के व्यक्तित्व और जीवनशैली के बारे में जानकारी प्रदान करती है। (BPHS 7. 1) विवाह योग कब बनते हैं शास्त्रीय 7वें भाव के योग, राहु-शुक्र, गुरु-चंद्र संयोजन विवाह योग बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब गुरु और चंद्र एक साथ आते हैं, तो यह विवाह के लिए शुभ माना जाता है। राहु और शुक्र का संयोजन भी विवाह के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन यह स्थिति विवाह में देरी का कारण भी बन सकती है। (फलदीपिका 7. 14) कौन-सी दशा-अंतर्दशा में विवाह की संभावना सबसे अधिक सिंह राशि के लिए विशिष्ट दशा-अंतर्दशा में विवाह की संभावना सबसे अधिक होती है। गुरु की दशा में शुक्र की अंतर्दशा विवाह के लिए शुभ मानी जाती है। इसके अलावा, चंद्र की दशा में गुरु की अंतर्दशा भी विवाह के लिए महत्वपूर्ण है। (BPHS 44. 1) गोचर के आधार पर विवाह का समय गुरु का 7वें भाव या उसके स्वामी पर गोचर विवाह के समय का निर्धारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब गुरु 7वें भाव पर गोचर करता है, तो यह विवाह के लिए शुभ माना जाता है। इसके अलावा, शुक्र का 7वें भाव पर गोचर भी विवाह के लिए महत्वपूर्ण है। (BPHS 45.

सिंह राशि वालों के लिए विवाह योग और शादी के समय का विस्तृत विश्लेषण

सिंह राशि के स्वामी ग्रह सूर्य है, और 7वें भाव की भूमिका विवाह और जीवनसाथी के बारे में जानकारी प्रदान करती है। सिंह राशि वालों के लिए विवाह योग और शादी के समय का विश्लेषण करने के लिए, हमें इन महत्वपूर्ण कारकों को समझना होगा।

विवाह कारक ग्रह

सिंह राशि की कुंडली में गुरु (पुरुष के लिए शुक्र), 7वें घर के स्वामी, और लग्न स्वामी का विश्लेषण करना महत्वपूर्ण है। गुरु की स्थिति विवाह के लिए शुभ मानी जाती है, जबकि शुक्र की स्थिति पुरुषों के लिए विवाह के लिए महत्वपूर्ण है। 7वें घर के स्वामी की स्थिति जीवनसाथी के बारे में जानकारी प्रदान करती है, और लग्न स्वामी की स्थिति व्यक्ति के व्यक्तित्व और जीवनशैली के बारे में जानकारी प्रदान करती है। (BPHS 7.1)

विवाह योग कब बनते हैं

शास्त्रीय 7वें भाव के योग, राहु-शुक्र, गुरु-चंद्र संयोजन विवाह योग बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब गुरु और चंद्र एक साथ आते हैं, तो यह विवाह के लिए शुभ माना जाता है। राहु और शुक्र का संयोजन भी विवाह के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन यह स्थिति विवाह में देरी का कारण भी बन सकती है। (फलदीपिका 7.14)

कौन-सी दशा-अंतर्दशा में विवाह की संभावना सबसे अधिक

सिंह राशि के लिए विशिष्ट दशा-अंतर्दशा में विवाह की संभावना सबसे अधिक होती है। गुरु की दशा में शुक्र की अंतर्दशा विवाह के लिए शुभ मानी जाती है। इसके अलावा, चंद्र की दशा में गुरु की अंतर्दशा भी विवाह के लिए महत्वपूर्ण है। (BPHS 44.1)

गोचर के आधार पर विवाह का समय

गुरु का 7वें भाव या उसके स्वामी पर गोचर विवाह के समय का निर्धारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब गुरु 7वें भाव पर गोचर करता है, तो यह विवाह के लिए शुभ माना जाता है। इसके अलावा, शुक्र का 7वें भाव पर गोचर भी विवाह के लिए महत्वपूर्ण है। (BPHS 45.1)

विलंब के कारण

मांगलिक दोष, शनि की दृष्टि, कमजोर 7वाँ भाव विवाह में देरी का कारण बन सकते हैं। मांगलिक दोष के कारण विवाह में देरी हो सकती है, जबकि शनि की दृष्टि विवाह में देरी का कारण बन सकती है। कमजोर 7वाँ भाव भी विवाह में देरी का कारण बन सकता है। (फलदीपिका 7.15)

विलंब परिहार के शास्त्रीय उपाय

विवाह में देरी को रोकने के लिए शास्त्रीय उपाय अपनाए जा सकते हैं। मांगलिक दोष के लिए कुछ विशिष्ट उपाय हैं, जैसे कि मंगल ग्रह की पूजा करना और मंगलवार को व्रत रखना। शनि की दृष्टि के लिए भी कुछ विशिष्ट उपाय हैं, जैसे कि शनि ग्रह की पूजा करना और शनिवार को व्रत रखना। (BPHS 46.1)

विवाह की उम्र की सामान्य सीमा

विवाह की उम्र की सामान्य सीमा व्यक्ति की कुंडली और जीवनशैली पर निर्भर करती है। सिंह राशि वालों के लिए विवाह की उम्र की सामान्य सीमा 25-30 वर्ष हो सकती है, लेकिन यह व्यक्ति की कुंडली और जीवनशैली पर निर्भर करती है। (BPHS 7.2)

ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली विशिष्ट है — कैरियर का समय, रिश्ते, स्वास्थ्य, जो भी पूछना चाहें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंह राशि वालों की शादी कब होगी?

सिंह राशि वालों की शादी का समय व्यक्ति की कुंडली और जीवनशैली पर निर्भर करता है। गुरु की दशा में शुक्र की अंतर्दशा विवाह के लिए शुभ मानी जाती है। इसके अलावा, चंद्र की दशा में गुरु की अंतर्दशा भी विवाह के लिए महत्वपूर्ण है। (BPHS 44.1)

विवाह में देरी क्यों हो रही है?

विवाह में देरी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि मांगलिक दोष, शनि की दृष्टि, कमजोर 7वाँ भाव। मांगलिक दोष के कारण विवाह में देरी हो सकती है, जबकि शनि की दृष्टि विवाह में देरी का कारण बन सकती है। कमजोर 7वाँ भाव भी विवाह में देरी का कारण बन सकता है। (फलदीपिका 7.15)

मांगलिक हूँ तो क्या करूँ?

मांगलिक दोष के लिए कुछ विशिष्ट उपाय हैं, जैसे कि मंगल ग्रह की पूजा करना और मंगलवार को व्रत रखना। इसके अलावा, कुछ विशिष्ट मंत्रों का जाप करना और मंगलवार को दान करना भी मांगलिक दोष के लिए उपाय हो सकते हैं। (BPHS 46.1)

विवाह के लिए कौन सा ग्रह महत्वपूर्ण है?

विवाह के लिए गुरु और शुक्र ग्रह महत्वपूर्ण हैं। गुरु की स्थिति विवाह के लिए शुभ मानी जाती है, जबकि शुक्र की स्थिति पुरुषों के लिए विवाह के लिए महत्वपूर्ण है। (BPHS 7.1)

विवाह में देरी को रोकने के लिए क्या करूँ?

विवाह में देरी को रोकने के लिए शास्त्रीय उपाय अपनाए जा सकते हैं। मांगलिक दोष के लिए कुछ विशिष्ट उपाय हैं, जैसे कि मंगल ग्रह की पूजा करना और मंगलवार को व्रत रखना। शनि की दृष्टि के लिए भी कुछ विशिष्ट उपाय हैं, जैसे कि शनि ग्रह की पूजा करना और शनिवार को व्रत रखना। (BPHS 46.1)

विवाह के लिए कौन सा समय सबसे अच्छा है?

विवाह के लिए सबसे अच्छा समय व्यक्ति की कुंडली और जीवनशैली पर निर्भर करता है। गुरु की दशा में शुक्र की अंतर्दशा विवाह के लिए शुभ मानी जाती है। इसके अलावा, चंद्र की दशा में गुरु की अंतर्दशा भी विवाह के लिए महत्वपूर्ण है। (BPHS 44.1)

विवाह में देरी के कारण क्या हैं?

विवाह में देरी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि मांगलिक दोष, शनि की दृष्टि, कमजोर 7वाँ भाव। मांगलिक दोष के कारण विवाह में देरी हो सकती है, जबकि शनि की दृष्टि विवाह में देरी का कारण बन सकती है। कमजोर 7वाँ भाव भी विवाह में देरी का कारण बन सकता है। (फलदीपिका 7.15)

विवाह के लिए क्या करना चाहिए?

विवाह के लिए व्यक्ति को अपनी कुंडली और जीवनशैली के अनुसार काम करना चाहिए। गुरु की दशा में शुक्र की अंतर्दशा विवाह के लिए शुभ मानी जाती है। इसके अलावा, चंद्र की दशा में गुरु की अंतर्दशा भी विवाह के लिए महत्वपूर्ण है। (BPHS 44.1)

विवाह में देरी को कैसे रोका जा सकता है?

विवाह में देरी को रोकने के लिए शास्त्रीय उपाय अपनाए जा सकते हैं। मांगलिक दोष के लिए कुछ विशिष्ट उपाय हैं, जैसे कि मंगल ग्रह की पूजा करना और मंगलवार को व्रत रखना। शनि की दृष्टि के लिए भी कुछ विशिष्ट उपाय हैं, जैसे कि शनि ग्रह की पूजा करना और शनिवार को व्रत रखना। (BPHS 46.1)

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