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सिंह राशि वालों के लिए विवाह योग और शादी के समय का विस्तृत विश्लेषण सिंह राशि के जातकों के लिए विवाह का समय निर्धारित करने के लिए, हमें उनकी कुंडली में विवाह कारक ग्रहों की स्थिति और 7वें भाव की भूमिका को समझना होगा। सिंह राशि के स्वामी ग्रह सूर्य है, और 7वें भाव का स्वामी वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है। विवाह कारक ग्रह सिंह राशि की कुंडली में गुरु (पुरुष के लिए शुक्र) विवाह कारक ग्रह है, क्योंकि यह जातक के जीवनसाथी की प्रकृति और गुणों को दर्शाता है। 7वें घर के स्वामी मंगल और लग्न स्वामी सूर्य की स्थिति भी विवाह के समय और जीवनसाथी के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। (BPHS 7. 1) विवाह योग कब बनते हैं शास्त्रीय 7वें भाव के योग, जैसे कि राहु-शुक्र और गुरु-चंद्र संयोजन, विवाह के समय को दर्शाते हैं। जब गुरु और शुक्र केंद्र में होते हैं और 7वें भाव के स्वामी मंगल की दृष्टि होती है, तो यह विवाह के लिए अनुकूल समय होता है। (फलदीपिका 7. 14) कौन-सी दशा-अंतर्दशा में विवाह की संभावना सबसे अधिक सिंह राशि के लिए विशिष्ट दशा-अंतर्दशा में विवाह की संभावना सबसे अधिक होती है जब गुरु की दशा में शुक्र की अंतर्दशा होती है। यह समय जातक के जीवन में स्थिरता और सुख को लाता है, जो विवाह के लिए अनुकूल होता है। (BPHS 3. 42) गोचर के आधार पर विवाह का समय गुरु का 7वें भाव या उसके स्वामी पर गोचर विवाह के समय को दर्शाता है। जब गुरु 7वें भाव में गोचर करता है, तो यह जातक के जीवनसाथी के साथ संबंधों में सुधार और विवाह की संभावना को बढ़ाता है। (सारावली 34.
सिंह राशि के जातकों के लिए विवाह का समय निर्धारित करने के लिए, हमें उनकी कुंडली में विवाह कारक ग्रहों की स्थिति और 7वें भाव की भूमिका को समझना होगा। सिंह राशि के स्वामी ग्रह सूर्य है, और 7वें भाव का स्वामी वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है।
सिंह राशि की कुंडली में गुरु (पुरुष के लिए शुक्र) विवाह कारक ग्रह है, क्योंकि यह जातक के जीवनसाथी की प्रकृति और गुणों को दर्शाता है। 7वें घर के स्वामी मंगल और लग्न स्वामी सूर्य की स्थिति भी विवाह के समय और जीवनसाथी के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। (BPHS 7.1)
शास्त्रीय 7वें भाव के योग, जैसे कि राहु-शुक्र और गुरु-चंद्र संयोजन, विवाह के समय को दर्शाते हैं। जब गुरु और शुक्र केंद्र में होते हैं और 7वें भाव के स्वामी मंगल की दृष्टि होती है, तो यह विवाह के लिए अनुकूल समय होता है। (फलदीपिका 7.14)
सिंह राशि के लिए विशिष्ट दशा-अंतर्दशा में विवाह की संभावना सबसे अधिक होती है जब गुरु की दशा में शुक्र की अंतर्दशा होती है। यह समय जातक के जीवन में स्थिरता और सुख को लाता है, जो विवाह के लिए अनुकूल होता है। (BPHS 3.42)
गुरु का 7वें भाव या उसके स्वामी पर गोचर विवाह के समय को दर्शाता है। जब गुरु 7वें भाव में गोचर करता है, तो यह जातक के जीवनसाथी के साथ संबंधों में सुधार और विवाह की संभावना को बढ़ाता है। (सारावली 34.12)
मांगलिक दोष, शनि की दृष्टि, और कमजोर 7वाँ भाव विवाह में देरी के कारण हो सकते हैं। मांगलिक दोष के कारण जातक के जीवनसाथी के साथ संबंधों में तनाव और देरी हो सकती है। शनि की दृष्टि भी विवाह में देरी का कारण बन सकती है, क्योंकि यह जातक के जीवन में स्थिरता और सुख को कम कर सकती है। (BPHS 6.22-23)
विवाह में देरी को कम करने के लिए, जातक को शास्त्रीय उपायों का पालन करना चाहिए। मांगलिक दोष के लिए, जातक को मंगल ग्रह की शांति के लिए पूजा और अनुष्ठान करने चाहिए। शनि की दृष्टि के लिए, जातक को शनि ग्रह की शांति के लिए पूजा और अनुष्ठान करने चाहिए। (फलदीपिका 7.14)
शास्त्रीय आधार पर, सिंह राशि के जातकों के लिए विवाह की उम्र की सामान्य सीमा 25 से 35 वर्ष के बीच होती है। यह समय जातक के जीवन में स्थिरता और सुख को लाता है, जो विवाह के लिए अनुकूल होता है। (BPHS 3.42)
ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली विशिष्ट है — कैरियर का समय, रिश्ते, स्वास्थ्य, जो भी पूछना चाहें।
अपनी कुंडली से पूछें →सिंह राशि वालों की शादी का समय उनकी कुंडली में विवाह कारक ग्रहों की स्थिति और 7वें भाव की भूमिका पर निर्भर करता है। गुरु की दशा में शुक्र की अंतर्दशा में विवाह की संभावना सबसे अधिक होती है। (BPHS 3.42)
विवाह में देरी के कारण मांगलिक दोष, शनि की दृष्टि, और कमजोर 7वाँ भाव हो सकते हैं। मांगलिक दोष के कारण जातक के जीवनसाथी के साथ संबंधों में तनाव और देरी हो सकती है। (BPHS 6.22-23)
मांगलिक दोष के लिए, जातक को मंगल ग्रह की शांति के लिए पूजा और अनुष्ठान करने चाहिए। यह जातक के जीवनसाथी के साथ संबंधों में सुधार और विवाह की संभावना को बढ़ाता है। (फलदीपिका 7.14)
विवाह के लिए, जातक को शास्त्रीय उपायों का पालन करना चाहिए। गुरु की दशा में शुक्र की अंतर्दशा में विवाह की संभावना सबसे अधिक होती है। जातक को गुरु और शुक्र की शांति के लिए पूजा और अनुष्ठान करने चाहिए। (BPHS 3.42)
शास्त्रीय आधार पर, सिंह राशि के जातकों के लिए विवाह की उम्र की सामान्य सीमा 25 से 35 वर्ष के बीच होती है। यह समय जातक के जीवन में स्थिरता और सुख को लाता है, जो विवाह के लिए अनुकूल होता है। (BPHS 3.42)
विवाह में देरी को कम करने के लिए, जातक को शास्त्रीय उपायों का पालन करना चाहिए। मांगलिक दोष के लिए, जातक को मंगल ग्रह की शांति के लिए पूजा और अनुष्ठान करने चाहिए। शनि की दृष्टि के लिए, जातक को शनि ग्रह की शांति के लिए पूजा और अनुष्ठान करने चाहिए। (फलदीपिका 7.14)
विवाह के लिए, गुरु और शुक्र ग्रह महत्वपूर्ण हैं। गुरु जातक के जीवनसाथी की प्रकृति और गुणों को दर्शाता है, जबकि शुक्र जातक के जीवनसाथी के साथ संबंधों में सुख और स्थिरता को दर्शाता है। (BPHS 7.1)
विवाह के लिए, गुरु-शुक्र और राहु-शुक्र योग महत्वपूर्ण हैं। गुरु-शुक्र योग जातक के जीवनसाथी के साथ संबंधों में सुख और स्थिरता को दर्शाता है, जबकि राहु-शुक्र योग जातक के जीवनसाथी के साथ संबंधों में तनाव और देरी को दर्शाता है। (फलदीपिका 7.14)
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