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सूर्य 1वें भाव में — कुंडली में फल और उपाय

सूर्य 1वें भाव में — कुंडली में फल और उपाय

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सूर्य का प्रथम भाव में स्थापन : जातक के जीवन पर गहन प्रभाव ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा, पिता, राजा, आत्मसम्मान, शक्ति, प्रतिष्ठा, नेतृत्व शक्ति और जीवन शक्ति का कारक माना गया है। जब सूर्य जातक की कुंडली में प्रथम भाव में स्थापित होता है, तो यह जातक के व्यक्तित्व, जीवन पथ और सामाजिक स्थिति पर गहन प्रभाव डालता है। प्रथम भाव जातक के शरीर, स्वभाव, आरंभिक जीवन, माता-पिता विशेषतः पिता, और आत्म-प्रतिष्ठा का कारक होता है। इस लेख में हम सूर्य के प्रथम भाव में स्थापन के सभी पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण करेंगे, जिसमें जातक के व्यक्तित्व, करियर, स्वास्थ्य, संबंध, दशा, गोचर और शास्त्रीय उपायों पर प्रकाश डाला जाएगा। प्रथम भाव में सूर्य का सामान्य अर्थ जब सूर्य प्रथम भाव में स्थापित होता है, तो जातक में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, दृढ़ संकल्प, साहस और आत्म-सम्मान की प्रबल भावना उत्पन्न होती है। ऐसा जातक स्वयं को एक राजा या नेता के रूप में देखता है और दूसरों पर अपना प्रभाव छोड़ने की क्षमता रखता है। यह स्थिति जातक को प्रतिष्ठित, प्रभावशाली और आत्मनिर्भर बनाती है। जैसा कि बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में कहा गया है, "सूर्यो भवति राजा यस्य" (BPHS 3. 42) अर्थात् जिस जातक की कुंडली में सूर्य राजा की तरह स्थित होता है, वही जातक जीवन में प्रतिष्ठा और शक्ति प्राप्त करता है। प्रथम भाव में सूर्य के प्रमुख लक्षण आत्मविश्वासी और स्वतंत्र: ऐसा जातक स्वतंत्रता प्रेमी होता है और दूसरों के निर्देशों का पालन करने से बचता है। वह स्वयं अपने निर्णय लेने में विश्वास रखता है। नेतृत्व क्षमता: जन्म कुंडली में सूर्य का प्रथम भाव जातक को स्वाभाविक नेता बनाता है। उसे दूसरों का मार्गदर्शन करने और उन्हें प्रेरित करने की क्षमता प्राप्त होती है। आत्म-सम्मान में वृद्धि: जातक का आत्म-सम्मान अत्यधिक उच्च होता है, कभी-कभी अहंकार का रूप भी ले सकता है। उसे स्वयं की क्षमताओं पर पूर्ण विश्वास होता है। शारीरिक शक्ति और ऊर्जा: सूर्य ऊर्जा, प्रकाश और शक्ति का कारक है। अतः जातक शारीरिक रूप से सक्रिय, स्वस्थ और ऊर्जावान रहता है। माता-पिता विशेषतः पिता के साथ संबंध: सूर्य पिता का कारक है। अतः जातक के पिता के साथ संबंध सामान्यतः मधुर होते हैं, किंतु कभी-कभी अत्यधिक नियंत्रण या दबाव भी उत्पन्न हो सकता है। व्यक्तित्व पर प्रभाव सकारात्मक प्रभाव प्रथम भाव में सूर्य जातक के व्यक्तित्व में कई सकारात्मक गुणों का संचार करता है। ऐसा जातक ईमानदार, साहसी, दृढ़ निश्चयी, बुद्धिमान और प्रतिष्ठित होता है। उसे दूसरों का सम्मान और आदर प्राप्त होता है। प्रतिष्ठा और सम्मान: जातक समाज में प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त करता है। उसे सरकारी पद, राजनीति, या उच्च अधिकार वाले पदों पर सफलता मिल सकती है। नेतृत्व क्षमता: जातक में नेतृत्व की जन्मजात क्षमता होती है। वह टीमों का नेतृत्व करने, संगठनों का संचालन करने और दूसरों को प्रेरित करने में सक्षम होता है। आत्मविश्वास और साहस: जातक कठिन परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम होता है। उसे चुनौतियों का सामना करने में आनंद आता है। रचनात्मकता और बुद्धिमत्ता: जातक में रचनात्मक सोच और बुद्धिमत्ता का संचार होता है। उसे नए विचारों को जन्म देने और उन्हें सफलतापूर्वक कार्यान्वित करने की क्षमता प्राप्त होती है। नकारात्मक प्रभाव जहाँ तक सकारात्मक प्रभावों की बात है, वहीं कुछ नकारात्मक प्रभाव भी उत्पन्न हो सकते हैं, यदि सूर्य कमजोर या अशुभ ग्रहों से प्रभावित हो। अहंकार और घमंड: अत्यधिक आत्मविश्वास कभी-कभी अहंकार का रूप ले सकता है। जातक दूसरों को नीचा दिखाने या उनकी भावनाओं की उपेक्षा करने लग सकता है। अत्यधिक नियंत्रण: जातक दूसरों पर अपना नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास कर सकता है, जिससे संबंधों में तनाव उत्पन्न हो सकता है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं: अत्यधिक ऊर्जा का उपयोग करने से जातक को हृदय संबंधी समस्याएं, उच्च रक्तचाप, सिरदर्द, या थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। पिता से संबंधों में तनाव: यदि सूर्य अशुभ ग्रहों से प्रभावित हो, तो जातक और उसके पिता के बीच संबंधों में तनाव उत्पन्न हो सकता है। पिता के प्रति अत्यधिक अपेक्षाएं या नियंत्रण जातक के मन में असंतोष उत्पन्न कर सकता है। करियर और व्यवसाय पर प्रभाव करियर में सफलता के क्षेत्र प्रथम भाव में सूर्य जातक के करियर में उच्च सफलता प्राप्त करने के अवसर प्रदान करता है। ऐसा जातक उन क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करता है, जिनमें नेतृत्व, प्रतिष्ठा, सरकारी पद, राजनीति, सेना, प्रशासन, शिक्षा, या उच्च अधिकार वाले पद शामिल होते हैं। सरकारी नौकरी: जातक को सरकारी नौकरी, प्रशासनिक पद, या न्यायिक क्षेत्र में सफलता मिल सकती है। राजनीति और समाज सेवा: समाज में नेतृत्व करने और समाज सेवा करने की इच्छा उत्पन्न होती है। जातक राजनीति, सामाजिक कार्य, या गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से समाज में योगदान कर सकता है। उद्यमिता: जातक स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने और उसे सफलतापूर्वक संचालित करने में सक्षम होता है। शिक्षा और अनुसंधान: शिक्षा, अनुसंधान, या लेखन के क्षेत्र में जातक उच्च सफलता प्राप्त कर सकता है। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार, "सूर्यस्य प्रथम भावे स्थितस्य राजा भवति।" (BPHS 47. 7-11) अर्थात् प्रथम भाव में स्थित सूर्य जातक को राजा के समान प्रतिष्ठा और सफलता प्रदान करता है। करियर संबंधी चुनौतियाँ यद्यपि प्रथम भाव में सूर्य जातक के करियर में सफलता प्रदान करता है, किंतु कुछ चुनौतियाँ भी उत्पन्न हो सकती हैं, यदि सूर्य अशुभ ग्रहों से प्रभावित हो। अत्यधिक महत्वाकांक्षा: जातक अत्यधिक महत्वाकांक्षी हो सकता है, जिससे उसे असफलता का सामना करना पड़ सकता है। अत्यधिक आत्मविश्वास: जातक दूसरों के सुझावों को नकार सकता है, जिससे उसे गलत निर्णय लेने पड़ सकते हैं। प्रतिस्पर्धा और संघर्ष: जातक को अपने करियर में प्रतिस्पर्धा और संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है, विशेषतः उन क्षेत्रों में जहाँ नेतृत्व की आवश्यकता होती है। अत्यधिक कार्यभार: जातक स्वयं पर अत्यधिक कार्यभार ले सकता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। संबंध और वैवाहिक जीवन पर प्रभाव वैवाहिक जीवन में सूर्य प्रथम भाव में सूर्य जातक के वैवाहिक जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। ऐसा जातक प्रतिष्ठित, आत्मनिर्भर और स्वतंत्र होता है, किंतु वैवाहिक जीवन में उसे कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है। स्वतंत्रता की भावना: जातक दूसरों पर अत्यधिक निर्भर नहीं रहना चाहता। उसे अपने निर्णय स्वयं लेने में आनंद आता है। प्रतिष्ठा और सम्मान: जातक अपने जीवनसाथी से प्रतिष्ठा और सम्मान की अपेक्षा रखता है। उसे ऐसा जीवनसाथी चाहिए जो उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले। माता-पिता विशेषतः पिता के साथ संबंध: जातक के पिता के साथ संबंध वैवाहिक जीवन पर प्रभाव डाल सकते हैं। यदि पिता के साथ संबंध मधुर हैं, तो वैवाहिक जीवन भी सुखमय रहता है। किंतु यदि पिता के साथ संबंध तनावपूर्ण हैं, तो वैवाहिक जीवन में भी तनाव उत्पन्न हो सकता है। वैवाहिक जीवन में चुनौतियाँ यदि सूर्य अशुभ ग्रहों से प्रभावित हो, तो वैवाहिक जीवन में निम्नलिखित चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं: अत्यधिक नियंत्रण: जातक अपने जीवनसाथी पर अत्यधिक नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास कर सकता है, जिससे संबंधों में तनाव उत्पन्न हो सकता है। अहंकार और घमंड: जातक का अहंकार वैवाहिक जीवन में बाधा उत्पन्न कर सकता है। उसे अपने जीवनसाथी की भावनाओं और आवश्यकताओं की उपेक्षा करने की प्रवृत्ति हो सकती है। संघर्ष और विवाद: जातक को अपने जीवनसाथी के साथ संघर्ष और विवाद का सामना करना पड़ सकता है, विशेषतः उन मामलों में जहाँ निर्णय लेने की बात आती है। स्वास्थ्य पर प्रभाव सूर्य के प्रथम भाव में होने के स्वास्थ्य लाभ सूर्य ऊर्जा, शक्ति और जीवन शक्ति का कारक है। अतः प्रथम भाव में स्थित सूर्य जातक को शारीरिक शक्ति, ऊर्जा, और स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। ऐसा जातक सामान्यतः स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान रहता है। उच्च ऊर्जा स्तर: जातक को अत्यधिक ऊर्जा प्राप्त होती है, जिससे वह लंबे समय तक कार्य करने में सक्षम होता है। प्रतिरक्षा प्रणाली में वृद्धि: सूर्य प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है, जिससे जातक बीमारियों से बचा रहता है। हृदय और रक्त संबंधी स्वास्थ्य: सूर्य हृदय और रक्त संबंधी स्वास्थ्य का कारक है। अतः जातक का हृदय स्वस्थ रहता है और रक्तचाप सामान्य रहता है। आंखों और सिर का स्वास्थ्य: सूर्य सिर और आंखों का भी कारक है। अतः जातक की आंखें स्वस्थ रहती हैं और उसे सिरदर्द या माइग्रेन जैसे रोग कम परेशान करते हैं। स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ यद्यपि सूर्य जातक के स्वास्थ्य में सुधार करता है, किंतु कुछ स्थितियों में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ भी उत्पन्न हो सकती हैं, विशेषतः जब सूर्य अशुभ ग्रहों से प्रभावित हो। उच्च रक्तचाप: अत्यधिक ऊर्जा और तनाव के कारण जातक को उच्च रक्तचाप की समस्या हो सकती है। हृदय संबंधी रोग: सूर्य हृदय का कारक है। अतः अत्यधिक कार्यभार या तनाव के कारण जातक को हृदय संबंधी रोगों का सामना करना पड़ सकता है। सिरदर्द और माइग्रेन: अत्यधिक मानसिक तनाव या शारीरिक थकान के कारण जातक को सिरदर्द या माइग्रेन की समस्या हो सकती है। आंखों की समस्याएं: अत्यधिक स्क्रीन टाइम या मानसिक तनाव के कारण जातक की आंखों में कमजोरी या दृष्टि संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। विभिन्न लग्नों के साथ सूर्य का प्रथम भाव में प्रभाव प्रत्येक लग्न के साथ सूर्य के प्रथम भाव में स्थापन का प्रभाव अलग-अलग होता है। लग्न जातक के शरीर, स्वभाव, और आरंभिक जीवन का कारक होता है। अतः लग्न के अनुसार सूर्य के प्रभावों में भिन्नता उत्पन्न होती है। मेष लग्न मेष लग्न में सूर्य जातक को अत्यधिक ऊर्जावान, साहसी, और आत्मविश्वासी बनाता है। ऐसा जातक नेतृत्व क्षमता रखता है और सरकारी पदों या सेना में सफलता प्राप्त कर सकता है। किंतु अत्यधिक ऊर्जा के कारण उसे हृदय संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। वृषभ लग्न वृषभ लग्न में सूर्य जातक को स्थिर, धैर्यवान, और व्यवहारिक बनाता है। ऐसा जातक व्यवसाय में सफलता प्राप्त कर सकता है और उसे धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है। किंतु अत्यधिक आत्मविश्वास के कारण उसे अपने जीवनसाथी के साथ संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है। मिथुन लग्न मिथुन लग्न में सूर्य जातक को बुद्धिमान, संवादप्रिय, और रचनात्मक बनाता है। ऐसा जातक लेखन, शिक्षण, या मीडिया के क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकता है। किंतु अत्यधिक आत्मविश्वास के कारण उसे अपने सहकर्मियों के साथ संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है। कर्क लग्न कर्क लग्न में सूर्य जातक को भावुक, संवेदनशील, और परिवार के प्रति समर्पित बनाता है। ऐसा जातक परिवार के मुखिया के रूप में सफलता प्राप्त कर सकता है। किंतु अत्यधिक आत्मविश्वास के कारण उसे अपने परिवार के सदस्यों के साथ संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है। सिंह लग्न सिंह लग्न में सूर्य जातक का स्वाभाविक लग्न होता है। अतः इस स्थिति में सूर्य जातक को अत्यधिक प्रतिष्ठा, सम्मान, और सफलता प्रदान करता है। ऐसा जातक स्वयं के प्रति अत्यधिक आत्मविश्वासी होता है और समाज में प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त करता है। "सिंहस्य लग्ने सूर्यो राजा भवति।" (BPHS 41.

सूर्य का प्रथम भाव में स्थापन : जातक के जीवन पर गहन प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा, पिता, राजा, आत्मसम्मान, शक्ति, प्रतिष्ठा, नेतृत्व शक्ति और जीवन शक्ति का कारक माना गया है। जब सूर्य जातक की कुंडली में प्रथम भाव में स्थापित होता है, तो यह जातक के व्यक्तित्व, जीवन पथ और सामाजिक स्थिति पर गहन प्रभाव डालता है। प्रथम भाव जातक के शरीर, स्वभाव, आरंभिक जीवन, माता-पिता विशेषतः पिता, और आत्म-प्रतिष्ठा का कारक होता है। इस लेख में हम सूर्य के प्रथम भाव में स्थापन के सभी पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण करेंगे, जिसमें जातक के व्यक्तित्व, करियर, स्वास्थ्य, संबंध, दशा, गोचर और शास्त्रीय उपायों पर प्रकाश डाला जाएगा।

प्रथम भाव में सूर्य का सामान्य अर्थ

जब सूर्य प्रथम भाव में स्थापित होता है, तो जातक में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, दृढ़ संकल्प, साहस और आत्म-सम्मान की प्रबल भावना उत्पन्न होती है। ऐसा जातक स्वयं को एक राजा या नेता के रूप में देखता है और दूसरों पर अपना प्रभाव छोड़ने की क्षमता रखता है। यह स्थिति जातक को प्रतिष्ठित, प्रभावशाली और आत्मनिर्भर बनाती है।

जैसा कि बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में कहा गया है,

"सूर्यो भवति राजा यस्य" (BPHS 3.42)

अर्थात् जिस जातक की कुंडली में सूर्य राजा की तरह स्थित होता है, वही जातक जीवन में प्रतिष्ठा और शक्ति प्राप्त करता है।

प्रथम भाव में सूर्य के प्रमुख लक्षण

व्यक्तित्व पर प्रभाव

सकारात्मक प्रभाव

प्रथम भाव में सूर्य जातक के व्यक्तित्व में कई सकारात्मक गुणों का संचार करता है। ऐसा जातक ईमानदार, साहसी, दृढ़ निश्चयी, बुद्धिमान और प्रतिष्ठित होता है। उसे दूसरों का सम्मान और आदर प्राप्त होता है।

नकारात्मक प्रभाव

जहाँ तक सकारात्मक प्रभावों की बात है, वहीं कुछ नकारात्मक प्रभाव भी उत्पन्न हो सकते हैं, यदि सूर्य कमजोर या अशुभ ग्रहों से प्रभावित हो।

करियर और व्यवसाय पर प्रभाव

करियर में सफलता के क्षेत्र

प्रथम भाव में सूर्य जातक के करियर में उच्च सफलता प्राप्त करने के अवसर प्रदान करता है। ऐसा जातक उन क्षेत्रों में सफलता प्राप्त करता है, जिनमें नेतृत्व, प्रतिष्ठा, सरकारी पद, राजनीति, सेना, प्रशासन, शिक्षा, या उच्च अधिकार वाले पद शामिल होते हैं।

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार,

"सूर्यस्य प्रथम भावे स्थितस्य राजा भवति।" (BPHS 47.7-11)

अर्थात् प्रथम भाव में स्थित सूर्य जातक को राजा के समान प्रतिष्ठा और सफलता प्रदान करता है।

करियर संबंधी चुनौतियाँ

यद्यपि प्रथम भाव में सूर्य जातक के करियर में सफलता प्रदान करता है, किंतु कुछ चुनौतियाँ भी उत्पन्न हो सकती हैं, यदि सूर्य अशुभ ग्रहों से प्रभावित हो।

ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली विशिष्ट है — कैरियर का समय, रिश्ते, स्वास्थ्य, जो भी पूछना चाहें।

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संबंध और वैवाहिक जीवन पर प्रभाव

वैवाहिक जीवन में सूर्य

प्रथम भाव में सूर्य जातक के वैवाहिक जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। ऐसा जातक प्रतिष्ठित, आत्मनिर्भर और स्वतंत्र होता है, किंतु वैवाहिक जीवन में उसे कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है।

वैवाहिक जीवन में चुनौतियाँ

यदि सूर्य अशुभ ग्रहों से प्रभावित हो, तो वैवाहिक जीवन में निम्नलिखित चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं:

स्वास्थ्य पर प्रभाव

सूर्य के प्रथम भाव में होने के स्वास्थ्य लाभ

सूर्य ऊर्जा, शक्ति और जीवन शक्ति का कारक है। अतः प्रथम भाव में स्थित सूर्य जातक को शारीरिक शक्ति, ऊर्जा, और स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। ऐसा जातक सामान्यतः स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान रहता है।

स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ

यद्यपि सूर्य जातक के स्वास्थ्य में सुधार करता है, किंतु कुछ स्थितियों में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ भी उत्पन्न हो सकती हैं, विशेषतः जब सूर्य अशुभ ग्रहों से प्रभावित हो।

विभिन्न लग्नों के साथ सूर्य का प्रथम भाव में प्रभाव

प्रत्येक लग्न के साथ सूर्य के प्रथम भाव में स्थापन का प्रभाव अलग-अलग होता है। लग्न जातक के शरीर, स्वभाव, और आरंभिक जीवन का कारक होता है। अतः लग्न के अनुसार सूर्य के प्रभावों में भिन्नता उत्पन्न होती है।

मेष लग्न

मेष लग्न में सूर्य जातक को अत्यधिक ऊर्जावान, साहसी, और आत्मविश्वासी बनाता है। ऐसा जातक नेतृत्व क्षमता रखता है और सरकारी पदों या सेना में सफलता प्राप्त कर सकता है। किंतु अत्यधिक ऊर्जा के कारण उसे हृदय संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

वृषभ लग्न

वृषभ लग्न में सूर्य जातक को स्थिर, धैर्यवान, और व्यवहारिक बनाता है। ऐसा जातक व्यवसाय में सफलता प्राप्त कर सकता है और उसे धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है। किंतु अत्यधिक आत्मविश्वास के कारण उसे अपने जीवनसाथी के साथ संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है।

मिथुन लग्न

मिथुन लग्न में सूर्य जातक को बुद्धिमान, संवादप्रिय, और रचनात्मक बनाता है। ऐसा जातक लेखन, शिक्षण, या मीडिया के क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकता है। किंतु अत्यधिक आत्मविश्वास के कारण उसे अपने सहकर्मियों के साथ संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है।

कर्क लग्न

कर्क लग्न में सूर्य जातक को भावुक, संवेदनशील, और परिवार के प्रति समर्पित बनाता है। ऐसा जातक परिवार के मुखिया के रूप में सफलता प्राप्त कर सकता है। किंतु अत्यधिक आत्मविश्वास के कारण उसे अपने परिवार के सदस्यों के साथ संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है।

सिंह लग्न

सिंह लग्न में सूर्य जातक का स्वाभाविक लग्न होता है। अतः इस स्थिति में सूर्य जातक को अत्यधिक प्रतिष्ठा, सम्मान, और सफलता प्रदान करता है। ऐसा जातक स्वयं के प्रति अत्यधिक आत्मविश्वासी होता है और समाज में प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त करता है।

"सिंहस्य लग्ने सूर्यो राजा भवति।" (BPHS 41.4)

अर्थात् सिंह लग्न में सूर्य जातक को राजा के समान प्रतिष्ठा प्रदान करता है।

कन्या लग्न

कन्या लग्न में सूर्य जातक को विश्लेषणात्मक, व्यवस्थित, और कर्मठ बनाता है। ऐसा जातक सरकारी नौकरी

आपकी कुंडली। आपके सवाल।

आपकी कुंडली। आपके सवाल। शास्त्रीय ज्योतिष पर आधारित 20-मिनट का परामर्श।

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