30 सेकंड में अपनी मुफ़्त कुंडली देखें
जन्म विवरण डालें — तुरंत अपनी कुंडली और मुफ़्त रीडिंग पाएँ, फिर 3 मिनट मुफ़्त सवाल पूछें। पूरा 20-मिनट का परामर्श ₹49 में — सिर्फ़ अगर आप चाहें।
अपनी कुंडली पर जाँचें🧮 मुफ़्त कुंडली मिलान कैलकुलेटर (36 गुण, अंग्रेज़ी में) → अपनी कुंडली पर जाँचें💞 विवाह मुहूर्त 2026-27 — सभी शुभ तिथियाँ और समय →कोई साइन-अप नहीं। या पूरा फ़ॉर्म खोलें.
✓ मुफ़्त कुंडली·✓ 3 मिनट मुफ़्त परामर्श·✓ ₹49 में 20-मिनट का परामर्श·✓ कोई OTP नहीं
तुला और मीन राशि के लिए tula meen kundli milan में वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री जैसे आठ कूटों का विश्लेषण किया जाता है। निःशुल्क देखें।
तुला (शुक्र की वायु राशि) और मीन (गुरु की जल राशि) का मिलान कागज़ पर थोड़ा कठिन दिखता है, क्योंकि भकूट में यह जोड़ी 6/8 पर बैठती है और भकूट के 7 में से 0 अंक मिलते हैं। पर यह पूरी तस्वीर नहीं है। राशि तो मिलान का सिर्फ़ एक हिस्सा है। अंतिम फ़ैसला दोनों के जन्म नक्षत्र और पूरी कुंडली देखकर ही होता है। नीचे इस जोड़ी को कूट-दर-कूट खोलकर देखते हैं।
कुंडली मिलान वर और वधू की जन्म कुंडलियों की तुलना की वह परंपरा है, जिससे स्वभाव, सोच और जीवन की दिशा की अनुकूलता परखी जाती है। इसका सबसे प्रचलित रूप अष्टकूट मिलान है, जिसमें आठ कूटों के कुल 36 अंक होते हैं।
हिंदू विवाह को सिर्फ़ दो लोगों का नहीं, दो परिवारों का मेल माना जाता है। इसलिए बड़े-बुज़ुर्ग शादी से पहले मिलान कराते हैं। पर मिलान एक मार्गदर्शन है, फ़ैसला सुनाने वाली अदालत नहीं। यह बताता है कि रिश्ते में कहाँ तालमेल सहज होगा और कहाँ आपको थोड़ा ज़्यादा ध्यान देना पड़ेगा।
पहले एक ज़रूरी बात। आठ में से कुछ कूट राशि से तय होते हैं और कुछ जन्म नक्षत्र से। इसलिए इस पेज पर राशि के आधार पर सिर्फ़ वही कूट खुलकर बताए जा सकते हैं जो राशि से बनते हैं।
वश्य (2 अंक) चंद्र राशि से तय होता है, जन्म नक्षत्र से नहीं। तुला राशि मानव (नर) समूह की है और मीन राशि जलचर समूह की। अलग-अलग समूह होने से पूरे 2 अंक नहीं बनते। प्रचलित तालिकाओं में इस संयोजन का सही अंक एक जैसा नहीं मिलता और वर-वधू के क्रम पर भी निर्भर करता है। इसलिए यहाँ कोई संख्या नहीं लिखी जा रही। बस इतना पक्का है कि एक ही समूह की जोड़ी को पूरे 2 अंक मिलते हैं।
तारा (3), योनि (4), गण (6) और नाड़ी (8) जन्म नक्षत्र से तय होते हैं, राशि से नहीं। एक ही राशि में कई नक्षत्र आते हैं, इसलिए तुला या मीन राशि का होना इन चारों में से किसी का जवाब नहीं देता। इनके लिए आपको दोनों का सही जन्म नक्षत्र चाहिए।
राशि से तय होने वाले कूटों की तस्वीर यह है:
36 में से कुल अंक यहाँ नहीं लिखा जा सकता, क्योंकि उसके लिए दोनों के जन्म नक्षत्र चाहिए। नक्षत्र जुड़ते ही तारा, योनि, गण और नाड़ी के अंक बनते हैं और कुल योग पूरा होता है। इसलिए अपना असली स्कोर जानने के लिए दोनों का सही जन्म विवरण डालकर मिलान करवाना ज़रूरी है।
तुला-मीन जोड़ी में भकूट 6/8 का बनता है। परंपरा में 2/12, 5/9 और 6/8 की स्थितियाँ भकूट दोष वाली मानी जाती हैं, और 6/8 को इनमें सबसे ज़्यादा गंभीरता से देखा जाता है। इसी वजह से इस जोड़ी को भकूट में 0 अंक मिलते हैं।
शास्त्रीय परिहार की एक आम शर्त यह है कि दोनों राशियों का स्वामी एक ही ग्रह हो या वे आपस में मित्र हों। तब भकूट दोष कट जाता है। इस जोड़ी में यह शर्त पूरी नहीं होती। तुला का स्वामी शुक्र है और मीन का गुरु, और ग्रह मैत्री में भी उन्हें सिर्फ़ 0.5 अंक मिले हैं। यानी इस आधार पर भकूट का परिहार नहीं बनता।
इसका मतलब यह नहीं कि रिश्ता असंभव है। इसका मतलब बस इतना है कि आपको बाकी बातें, यानी नक्षत्र आधारित कूट, दोनों कुंडलियों के ग्रह और दशा, ज़्यादा ध्यान से देखनी चाहिए।
ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली अलग है: विवाह का समय, रिश्ते, जो भी पूछना चाहें।
अपनी कुंडली मुफ़्त देखें →नाड़ी (8 अंक) कुंडली मिलान का सबसे भारी कूट है, और यह जन्म नक्षत्र से तय होता है, राशि से नहीं। इसलिए तुला या मीन राशि का कोई भी व्यक्ति किसी भी नाड़ी का हो सकता है।
नाड़ी दोष तब बनता है जब वर और वधू दोनों की नाड़ी एक ही हो। उस स्थिति में नाड़ी के अंक 0 रहते हैं। नाड़ी अलग-अलग हो तो पूरे 8 अंक मिलते हैं और यह दोष नहीं बनता। इसके शास्त्रीय परिहार भी बताए गए हैं, जिन्हें दोनों कुंडलियाँ देखकर ही लागू किया जा सकता है। इसलिए जब तक दोनों के जन्म नक्षत्र पता न हों, इस पर कुछ कहना उचित नहीं।
तत्वों के हिसाब से तुला वायु है और मीन जल। वायु विचार, संवाद और संतुलन की ओर झुकती है, जबकि जल भावना, संवेदना और गहराई की ओर। यह फ़र्क रिश्ते में खींचतान भी ला सकता है और पूरकता भी।
शुक्र और गुरु की आपसी स्थिति सहज नहीं है, इसलिए छोटी बातों पर नज़रिए का टकराव हो सकता है। वहाँ धैर्य और खुला संवाद सबसे काम आता है।
राशि के आँकड़े अकेले यह तय नहीं करते कि विवाह कितना चलेगा। भकूट में कम अंक एक सावधानी का संकेत है, भविष्यवाणी नहीं। असली तस्वीर नक्षत्र आधारित चारों कूटों, दोनों कुंडलियों में सप्तम भाव और उसके स्वामी की स्थिति और चल रही दशाओं से बनती है।
जो जोड़े एक-दूसरे का स्वभाव समझकर चलते हैं, वे कम अंकों के बावजूद अच्छा निभा लेते हैं। और ऊँचे अंकों वाले रिश्ते भी बिना समझ के उलझ सकते हैं। मिलान एक नक्शा है, सफ़र आपको खुद तय करना है।
अगर आपकी जोड़ी में अंक कम आते हैं, तो घबराने की ज़रूरत नहीं। पहले यह देखें कि कमी कहाँ से आ रही है।
राशि के आधार पर यह जोड़ी भकूट में 6/8 पर है और 0 अंक पाती है, इसलिए इसे सावधानी से देखना चाहिए। पर विवाह का असली अंदाज़ा दोनों के जन्म नक्षत्र और पूरी कुंडली से ही लगता है।
मीन राशि तुला से 6वीं है और तुला मीन से 8वीं, यानी 6/8 का संबंध। यह भकूट दोष वाली स्थिति मानी जाती है और इसमें 7 में से 0 अंक मिलते हैं।
एक आम परिहार तब माना जाता है जब दोनों राशियों का स्वामी एक हो या वे मित्र हों। तुला का स्वामी शुक्र और मीन का गुरु हैं, और उनकी ग्रह मैत्री भी कमज़ोर (0.5 अंक) है, इसलिए यह शर्त यहाँ पूरी नहीं होती।
36 में से कितने अंक पर्याप्त हैं, यह अलग-अलग परंपराओं में थोड़ा अलग माना जाता है। पर कुल अंक तभी निकलता है जब दोनों के जन्म नक्षत्र पता हों, इसलिए सिर्फ़ राशि से कोई कुल संख्या नहीं बताई जा सकती।
तुला शूद्र वर्ण है और मीन ब्राह्मण। वर को 1 अंक तब मिलता है जब उसका वर्ण वधू के बराबर या ऊँचा हो। तुला वर की राशि हो तो 0 अंक, मीन वर की राशि हो तो 1 अंक।
शुक्र गुरु को सम मानता है और गुरु शुक्र को शत्रु। इस वजह से ग्रह मैत्री के 5 में से सिर्फ़ 0.5 अंक मिलते हैं।
वश्य चंद्र राशि से तय होता है। तुला मानव (नर) समूह की है और मीन जलचर समूह की, यानी दोनों अलग समूह में हैं। इसका सही अंक वर-वधू के क्रम पर भी निर्भर करता है, इसलिए यहाँ कोई संख्या नहीं दी गई।
नाड़ी दोष तब बनता है जब वर और वधू दोनों की नाड़ी एक ही हो। नाड़ी जन्म नक्षत्र से तय होती है, इसलिए यह तुला या मीन राशि से नहीं, दोनों के नक्षत्र से पता चलती है।
नहीं। राशि से सिर्फ़ वर्ण, ग्रह मैत्री, भकूट और वश्य जैसे कूट तय होते हैं। तारा, योनि, गण और नाड़ी जन्म नक्षत्र से बनते हैं, इसलिए पूरा मिलान दोनों के सही जन्म विवरण से ही संभव है।
सिर्फ़ अंक देखकर फ़ैसला न लें। पहले दोनों के नक्षत्र आधारित कूट, कुंडलियों में सप्तम भाव और दशा देखें, और किसी जानकार ज्योतिषी से परिहार की गुंजाइश समझें।
आपकी सटीक जन्म कुंडली और मुफ़्त रीडिंग, तुरंत। फिर अपने सवाल पूछें — 3 मिनट मुफ़्त, पूरा 20-मिनट का परामर्श ₹49 में।
मेरी मुफ़्त कुंडली देखें →