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वृषभ और वृश्चिक कुंडली मिलान में vrishabh vrishchik kundli milan का महत्व जानें। भाव, ग्रह, दशा का विश्लेषण करें और संगतता की जांच करें। निःशुल्क देखें।
वृषभ और वृश्चिक आमने-सामने की राशियाँ हैं, यानी एक-दूसरे से सातवीं। इस जोड़ी को भकूट में पूरे 7 में से 7 अंक मिलते हैं, पर आगे के कूट नक्षत्र पर टिके हैं, इसलिए कुल गुण बाद में तय होंगे। नीचे आप देखेंगे कि राशि से कौन-से कूट तय होते हैं, कहाँ अंक पक्के हैं और कहाँ आपके जन्म नक्षत्र की ज़रूरत पड़ेगी।
कुंडली मिलान दो लोगों की जन्म कुंडलियों को मिलाकर देखने की परंपरा है कि स्वभाव, सोच और ज़िंदगी की चाल कितनी मेल खाती है। शादी सिर्फ़ दो लोगों का नहीं, दो परिवारों और दो आदतों का जुड़ना है। मिलान इसी जुड़ाव की मोटी तस्वीर देता है।
इसका एक तरीक़ा अष्टकूट है, जिसमें आठ कूटों पर कुल 36 अंक बँटे होते हैं। कुछ कूट चंद्र राशि से तय होते हैं और कुछ जन्म नक्षत्र से। यह फ़र्क़ समझना ज़रूरी है, क्योंकि एक ही राशि के दो लोगों के नक्षत्र अलग होने पर नतीजे बदल जाते हैं।
वृषभ का स्वामी शुक्र है और तत्व पृथ्वी। इस राशि का स्वभाव टिकाऊ, आराम पसंद और भरोसेमंद माना जाता है। वृषभ वाले को घर, खाना, सुकून और स्थिरता चाहिए होती है।
वृश्चिक का स्वामी मंगल है और तत्व जल। यह राशि गहरी, चुप और तीव्र भावनाओं वाली मानी जाती है। वृश्चिक वाला कम बोलता है, पर महसूस बहुत करता है।
पृथ्वी और जल का मेल अक्सर उपजाऊ माना जाता है: पानी ज़मीन को सींचता है और ज़मीन पानी को ठहराव देती है। फिर भी शुक्र और मंगल की चाल अलग है, इसलिए दोनों की जुगलबंदी में थोड़ा खिंचाव भी रहता है।
नीचे हर कूट अलग देखें। जो कूट राशि से तय होते हैं, उनके पक्के आँकड़े दिए हैं। जो नक्षत्र पर टिके हैं, उनके लिए आपके जन्म नक्षत्र चाहिए।
ग्रह मैत्री में 5 में से 3 अंक मिलते हैं, और भकूट में 7 में से पूरे 7। वर्ण का अंक इस पर टिका है कि वर कौन है। अगर वृषभ वर की राशि हो तो वर्ण में 0 अंक मिलता है, क्योंकि वैश्य वधू के ब्राह्मण वर्ण से नीचे पड़ता है। अगर वृश्चिक वर की राशि हो तो 1 अंक मिलता है।
वश्य चंद्र राशि से तय होता है। अगर वृषभ वर की राशि हो तो वश्य में 2 में से 1 अंक मिलता है। वृश्चिक वर की राशि होने पर इस संयोजन का वश्य अंक प्रचलित तालिकाओं में एक जैसा नहीं मिलता, इसलिए उसकी कोई संख्या यहाँ नहीं दी जा रही।
इसलिए इस जोड़ी का कुल अंक आप तभी जान पाएँगे जब दोनों के जन्म नक्षत्र हाथ में हों। राशि जानकर कुल गुण बता देना सही नहीं होगा।
ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली अलग है: विवाह का समय, रिश्ते, जो भी पूछना चाहें।
अपनी कुंडली मुफ़्त देखें →भकूट दोष तब बनता है जब दोनों राशियाँ एक-दूसरे से 2/12, 5/9 या 6/8 की दूरी पर हों। इन तीनों पर भकूट के 0 अंक मिलते हैं, बाक़ी स्थितियों में पूरे 7।
वृषभ और वृश्चिक एक-दूसरे से 7/7 की दूरी पर हैं। यह दोष वाली दूरी नहीं है, इसलिए इस जोड़ी में भकूट दोष नहीं बनता और पूरे 7 अंक मिलते हैं। परिहार की ज़रूरत तभी पड़ती है जब दोष बन जाए। कई परंपराओं में दोनों राशियों का स्वामी एक ही ग्रह हो या वे आपस में मित्र हों तो भकूट दोष कट जाता है, पर यहाँ वह स्थिति आती ही नहीं।
नाड़ी दोष तब होता है जब दोनों की नाड़ी एक ही हो। नाड़ी जन्म नक्षत्र से तय होती है, इसलिए वृषभ या वृश्चिक राशि को कोई नाड़ी नहीं दी जा सकती। एक ही राशि के अलग-अलग नक्षत्र वालों की नाड़ी अलग हो सकती है।
इसका मतलब यह है कि वृषभ-वृश्चिक जोड़ी में नाड़ी दोष है या नहीं, यह सिर्फ़ दोनों के जन्म नक्षत्र देखकर पता चलेगा। राशि सुनकर यह कहना कि दोष है या नहीं, अधूरी बात होगी। अगर दोष निकले तो उसके शास्त्रीय परिहार जानकार ज्योतिषी से पूरी कुंडली देखकर ही तय कराएँ।
वृषभ धीमा, ठहरा हुआ और भरोसा देने वाला होता है। वृश्चिक गहरा और अंदर से जलता हुआ, पर बाहर से शांत दिखता है। दोनों वफ़ादारी को बहुत मानते हैं, और यही इस जोड़ी की सबसे बड़ी ताक़त है।
टकराव की जगह अक्सर यह बनती है:
जहाँ दोनों साफ़ बात करना सीख लेते हैं, वहाँ यह रिश्ता मज़बूत और टिकाऊ बनता है।
सामने की सातवीं राशियों में आकर्षण और खिंचाव दोनों होते हैं। यह जोड़ी साथ रहते-रहते एक-दूसरे की कमी पूरी करती है: वृषभ स्थिरता देता है, वृश्चिक गहराई। लंबे समय में टिकने का बड़ा आधार आपसी भरोसा और खुली बातचीत है।
पर सिर्फ़ राशि पर भरोसा करके शादी का फ़ैसला नहीं करना चाहिए। दशा, गोचर, मंगल की स्थिति और दोनों के नक्षत्र पूरी तस्वीर बनाते हैं। इसलिए राशि की यह अनुकूलता एक अच्छी शुरुआत है, अंतिम फ़ैसला नहीं।
नक्षत्र वाले कूटों में अंक कम आ जाएँ तो घबराएँ नहीं। कुल अंक कम होने का मतलब रिश्ता न चलना नहीं है। कुछ बातें ध्यान में रखें:
दोनों सामने की सातवीं राशियाँ हैं, इसलिए आकर्षण और वफ़ादारी का मेल बनता है। भकूट के पूरे 7 अंक मिलते हैं। पर शादी कैसी चलेगी, यह दोनों के नक्षत्र और पूरी कुंडली देखकर ही बताया जा सकता है।
अलग-अलग परंपराओं में अलग न्यूनतम सीमा बताई जाती है, कोई एक तय संख्या सब जगह नहीं चलती। असली बात यह है कि भकूट और नाड़ी जैसे भारी कूट में दोष न हो और बाक़ी कुंडली भी साथ दे।
नहीं। दोनों की दूरी 7/7 है, जो दोष वाली दूरी (2/12, 5/9, 6/8) नहीं है। इसलिए भकूट के पूरे 7 अंक मिलते हैं।
नाड़ी जन्म नक्षत्र से तय होती है, राशि से नहीं। दोनों की नाड़ी एक ही हो तो नाड़ी दोष माना जाता है। इसके लिए दोनों के जन्म नक्षत्र चाहिए।
शुक्र और मंगल एक-दूसरे को सम मानते हैं, इसलिए ग्रह मैत्री के 5 में से 3 अंक मिलते हैं।
वृषभ वैश्य और वृश्चिक ब्राह्मण है। वर को 1 अंक तब मिलता है जब उसका वर्ण वधू के बराबर या ऊँचा हो। वृषभ वर की राशि हो तो 0 अंक, और वृश्चिक वर की राशि हो तो 1 अंक मिलता है।
वश्य चंद्र राशि से तय होता है। वृषभ चतुष्पद और वृश्चिक कीट है। वृषभ वर की राशि हो तो 2 में से 1 अंक मिलता है। वृश्चिक वर की राशि होने पर इस संयोजन का वश्य अंक प्रचलित तालिकाओं में एक जैसा नहीं मिलता।
इसलिए दोनों के जन्म नक्षत्र जाने बिना 36 में से कुल अंक नहीं बताया जा सकता।
मंगल की स्थिति जन्म कुंडली से देखी जाती है, राशि से नहीं। दोनों की कुंडली में मंगल की स्थिति जाँचें। दोनों तरफ़ दोष हो तो वह आपस में संतुलित माना जाता है। इसका फ़ैसला पूरी कुंडली देखकर किसी जानकार से कराएँ।
नहीं। राशि सिर्फ़ शुरुआती तस्वीर देती है। नक्षत्र वाले कूट, मंगल की स्थिति, सातवाँ भाव और चल रही दशा मिलकर असली नतीजा बनाते हैं।
आपकी सटीक जन्म कुंडली और मुफ़्त रीडिंग, तुरंत। फिर अपने सवाल पूछें — 3 मिनट मुफ़्त, पूरा 20-मिनट का परामर्श ₹49 में।
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