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वृषभ राशि वालों के लिए विवाह योग और शादी का समय: शास्त्रीय विश्लेषण वृषभ राशि वाले जातकों के लिए विवाह एक महत्वपूर्ण जीवन-चरण है, जिसमें कुंडली के 7वें भाव की भूमिका सर्वोपरि होती है। यह भाव विवाह, जीवनसाथी, वैवाहिक जीवन, और सामाजिक संबंधों का कारक है। वृषभ राशि का स्वामी शुक्र है, जो प्रेम, सौंदर्य, और वैवाहिक सुख का कारक ग्रह माना जाता है। इस राशि के जातकों की कुंडली में 7वें भाव का स्वामी, लग्नेश, गुरु, चंद्र, और शुक्र के पारस्परिक संबंधों के आधार पर विवाह योग का निर्धारण किया जाता है। विवाह के समय का निर्धारण करते समय दशा-अंतर्दशा , गोचर , और कुंडली के अष्टकवर्ग जैसे शास्त्रीय सिद्धांतों का विशेष ध्यान रखा जाता है। आइए, वृषभ राशि वालों के लिए विवाह योग और शादी के समय का विस्तृत विश्लेषण करें। वृषभ राशि के स्वामी शुक्र और 7वें भाव की भूमिका वृषभ राशि का स्वामी शुक्र है, जो प्रेम, विवाह, और वैवाहिक सुख का प्रमुख कारक ग्रह है। यह ग्रह जितना बलवान और उच्च का होगा, विवाह योग उतना ही सुगम और शुभ होगा। यदि शुक्र मेष राशि में स्थित है, तो विवाह में देरी की संभावना बढ़ जाती है, क्योंकि शुक्र अपनी उच्च राशि में अधिक प्रभावी होता है। इसके विपरीत, शुक्र का तुला राशि में स्थित होना विवाह के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। 7वाँ भाव भी विवाह का प्रमुख कारक है। यदि 7वाँ भाव बलवान है, तो विवाह शीघ्र होता है। इसके विपरीत, यदि 7वाँ भाव कमजोर है या उसमें अशुभ ग्रहों की दृष्टि है, तो विवाह में विलंब हो सकता है। वृषभ राशि वालों के लिए, 7वाँ भाव वृषभ, कन्या, धनु, या मीन राशि में होने पर विवाह योग अधिक मजबूत बनता है। विवाह कारक ग्रहों का विश्लेषण 1. 7वें भाव के स्वामी का प्रभाव वृषभ राशि वालों के लिए, 7वें भाव के स्वामी का विश्लेषण करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि 7वें भाव के स्वामी शुक्र हैं, तो विवाह योग अत्यंत शुभ माना जाता है। शुक्र का 7वें भाव में स्थित होना विवाह के लिए सर्वोत्तम स्थिति है। इसके अलावा, यदि 7वें भाव के स्वामी गुरु हैं, तो विवाह योग में वृद्धि होती है, क्योंकि गुरु विवाह का भी कारक ग्रह है। यदि 7वें भाव के स्वामी शनि हैं, तो विवाह में विलंब हो सकता है, लेकिन शनि की दृष्टि यदि शुभ ग्रहों से हो, तो विलंब के बाद विवाह अत्यंत स्थायी होता है। 2. लग्नेश का प्रभाव लग्नेश का 7वें भाव या उसके स्वामी पर दृष्टि होना विवाह योग को मजबूत करता है। वृषभ लग्न वालों के लिए, लग्नेश शुक्र ही होता है। यदि शुक्र 7वें भाव में स्थित है, तो विवाह योग अत्यंत शुभ होता है। इसके अलावा, यदि लग्नेश गुरु है, तो विवाह योग में वृद्धि होती है, क्योंकि गुरु विवाह का कारक ग्रह है। यदि लग्नेश शनि है, तो विवाह में विलंब हो सकता है, लेकिन शनि की दृष्टि यदि शुभ ग्रहों से हो, तो विलंब के बाद विवाह अत्यंत स्थायी होता है। 3. गुरु और शुक्र का संयोग गुरु और शुक्र का संयोग विवाह योग के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि गुरु और शुक्र एक ही भाव में स्थित हैं, या एक-दूसरे की दृष्टि में हैं, तो विवाह योग अत्यंत मजबूत होता है। गुरु विवाह का कारक ग्रह है, जबकि शुक्र प्रेम और विवाह का प्रमुख कारक ग्रह है। इन दोनों ग्रहों का संयोग विवाह के लिए अत्यंत शुभ होता है। यदि गुरु और शुक्र 5वें, 7वें, या 9वें भाव में स्थित हैं, तो विवाह योग अत्यंत मजबूत होता है। इसके विपरीत, यदि ये ग्रह 6ठे, 8वें, या 12वें भाव में स्थित हैं, तो विवाह में विलंब हो सकता है। विवाह योग कब बनते हैं: शास्त्रीय सिद्धांत 1.
वृषभ राशि वाले जातकों के लिए विवाह एक महत्वपूर्ण जीवन-चरण है, जिसमें कुंडली के 7वें भाव की भूमिका सर्वोपरि होती है। यह भाव विवाह, जीवनसाथी, वैवाहिक जीवन, और सामाजिक संबंधों का कारक है। वृषभ राशि का स्वामी शुक्र है, जो प्रेम, सौंदर्य, और वैवाहिक सुख का कारक ग्रह माना जाता है। इस राशि के जातकों की कुंडली में 7वें भाव का स्वामी, लग्नेश, गुरु, चंद्र, और शुक्र के पारस्परिक संबंधों के आधार पर विवाह योग का निर्धारण किया जाता है।
विवाह के समय का निर्धारण करते समय दशा-अंतर्दशा, गोचर, और कुंडली के अष्टकवर्ग जैसे शास्त्रीय सिद्धांतों का विशेष ध्यान रखा जाता है। आइए, वृषभ राशि वालों के लिए विवाह योग और शादी के समय का विस्तृत विश्लेषण करें।
वृषभ राशि का स्वामी शुक्र है, जो प्रेम, विवाह, और वैवाहिक सुख का प्रमुख कारक ग्रह है। यह ग्रह जितना बलवान और उच्च का होगा, विवाह योग उतना ही सुगम और शुभ होगा। यदि शुक्र मेष राशि में स्थित है, तो विवाह में देरी की संभावना बढ़ जाती है, क्योंकि शुक्र अपनी उच्च राशि में अधिक प्रभावी होता है। इसके विपरीत, शुक्र का तुला राशि में स्थित होना विवाह के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
7वाँ भाव भी विवाह का प्रमुख कारक है। यदि 7वाँ भाव बलवान है, तो विवाह शीघ्र होता है। इसके विपरीत, यदि 7वाँ भाव कमजोर है या उसमें अशुभ ग्रहों की दृष्टि है, तो विवाह में विलंब हो सकता है। वृषभ राशि वालों के लिए, 7वाँ भाव वृषभ, कन्या, धनु, या मीन राशि में होने पर विवाह योग अधिक मजबूत बनता है।
वृषभ राशि वालों के लिए, 7वें भाव के स्वामी का विश्लेषण करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि 7वें भाव के स्वामी शुक्र हैं, तो विवाह योग अत्यंत शुभ माना जाता है। शुक्र का 7वें भाव में स्थित होना विवाह के लिए सर्वोत्तम स्थिति है। इसके अलावा, यदि 7वें भाव के स्वामी गुरु हैं, तो विवाह योग में वृद्धि होती है, क्योंकि गुरु विवाह का भी कारक ग्रह है।
यदि 7वें भाव के स्वामी शनि हैं, तो विवाह में विलंब हो सकता है, लेकिन शनि की दृष्टि यदि शुभ ग्रहों से हो, तो विलंब के बाद विवाह अत्यंत स्थायी होता है।
लग्नेश का 7वें भाव या उसके स्वामी पर दृष्टि होना विवाह योग को मजबूत करता है। वृषभ लग्न वालों के लिए, लग्नेश शुक्र ही होता है। यदि शुक्र 7वें भाव में स्थित है, तो विवाह योग अत्यंत शुभ होता है। इसके अलावा, यदि लग्नेश गुरु है, तो विवाह योग में वृद्धि होती है, क्योंकि गुरु विवाह का कारक ग्रह है।
यदि लग्नेश शनि है, तो विवाह में विलंब हो सकता है, लेकिन शनि की दृष्टि यदि शुभ ग्रहों से हो, तो विलंब के बाद विवाह अत्यंत स्थायी होता है।
गुरु और शुक्र का संयोग विवाह योग के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि गुरु और शुक्र एक ही भाव में स्थित हैं, या एक-दूसरे की दृष्टि में हैं, तो विवाह योग अत्यंत मजबूत होता है। गुरु विवाह का कारक ग्रह है, जबकि शुक्र प्रेम और विवाह का प्रमुख कारक ग्रह है। इन दोनों ग्रहों का संयोग विवाह के लिए अत्यंत शुभ होता है।
यदि गुरु और शुक्र 5वें, 7वें, या 9वें भाव में स्थित हैं, तो विवाह योग अत्यंत मजबूत होता है। इसके विपरीत, यदि ये ग्रह 6ठे, 8वें, या 12वें भाव में स्थित हैं, तो विवाह में विलंब हो सकता है।
विवाह योग का निर्धारण करते समय 7वें भाव की स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि 7वाँ भाव बलवान है, तो विवाह शीघ्र होता है। इसके विपरीत, यदि 7वाँ भाव कमजोर है या अशुभ ग्रहों की दृष्टि से युक्त है, तो विवाह में विलंब हो सकता है।
वृषभ राशि वालों के लिए, 7वाँ भाव वृषभ, कन्या, धनु, या मीन राशि में होने पर विवाह योग अधिक मजबूत बनता है। इसके अलावा, यदि 7वाँ भाव मेष, वृश्चिक, या कुंभ राशि में है, तो विवाह में विलंब हो सकता है।
राहु और शुक्र का संयोग विवाह योग के लिए शुभ नहीं माना जाता। राहु अशुभ ग्रह है, और इसका शुक्र के साथ संयोग विवाह में कलह, असहमति, और वैवाहिक जीवन में कठिनाइयों का कारण बन सकता है। यदि कुंडली में राहु और शुक्र का संयोग है, तो विवाह में विलंब हो सकता है, या विवाह के पश्चात वैवाहिक जीवन में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
इस संयोग के निवारण के लिए शुक्र ग्रह की पूजा, गुरु मंत्र जाप, और दान-पुण्य का विशेष महत्व है।
गुरु और चंद्र का संयोग विवाह योग के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। गुरु विवाह का कारक ग्रह है, जबकि चंद्र मनोभावों और प्रेम का कारक ग्रह है। इन दोनों ग्रहों का संयोग विवाह के लिए अत्यंत शुभ होता है। यदि गुरु और चंद्र एक ही भाव में स्थित हैं, या एक-दूसरे की दृष्टि में हैं, तो विवाह योग अत्यंत मजबूत होता है।
इस संयोग के प्रभाव से विवाह शीघ्र होता है, और वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है।
ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली विशिष्ट है — कैरियर का समय, रिश्ते, स्वास्थ्य, जो भी पूछना चाहें।
अपनी कुंडली से पूछें →वृषभ राशि वालों के लिए शुक्र दशा विवाह के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। शुक्र दशा के दौरान विवाह योग बनने की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है। यदि शुक्र दशा के दौरान गुरु गोचर भी है, तो विवाह शीघ्र होता है।
शुक्र दशा की अवधि 20 वर्ष होती है, और इस दौरान विवाह योग बनने की संभावना रहती है। यदि कुंडली में शुक्र बलवान है, तो विवाह शुक्र दशा के दौरान ही होता है।
गुरु दशा भी विवाह के लिए शुभ मानी जाती है, विशेषकर यदि गुरु कुंडली में बलवान है। गुरु दशा के दौरान विवाह योग बनने की संभावना रहती है, लेकिन शुक्र दशा जितनी प्रभावी नहीं होती। यदि गुरु दशा के दौरान शुक्र गोचर भी है, तो विवाह योग और भी मजबूत हो जाता है।
गुरु दशा की अवधि 16 वर्ष होती है, और इस दौरान विवाह योग बनने की संभावना रहती है।
चंद्र दशा विवाह के लिए मध्यम प्रभावी होती है। चंद्र दशा के दौरान विवाह योग बनने की संभावना रहती है, लेकिन इसके लिए कुंडली में अन्य कारक ग्रहों का भी सहयोग आवश्यक है। यदि चंद्र दशा के दौरान गुरु गोचर या शुक्र गोचर है, तो विवाह योग और भी मजबूत हो जाता है।
चंद्र दशा की अवधि 10 वर्ष होती है, और इस दौरान विवाह योग बनने की संभावना रहती है।
गुरु गोचर विवाह के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि गुरु गोचर के दौरान कुंडली में विवाह योग बने हुए हैं, तो विवाह शीघ्र होता है। गुरु गोचर के दौरान 7वें भाव या उसके स्वामी पर गुरु की दृष्टि होना विवाह योग को और भी मजबूत करता है।
गुरु गोचर की अवधि 1 वर्ष 4 माह होती है, और इस दौरान विवाह योग बनने की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है।
शुक्र गोचर भी विवाह के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि शुक्र गोचर के दौरान कुंडली में विवाह योग बने हुए हैं, तो विवाह शीघ्र होता है। शुक्र गोचर के दौरान 7वें भाव या उसके स्वामी पर शुक्र की दृष्टि होना विवाह योग को और भी मजबूत करता है।
शुक्र गोचर की अवधि 1 वर्ष होती है, और इस दौरान विवाह योग बनने की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है।
शनि गोचर विवाह के लिए मध्यम प्रभावी होता है। शनि गोचर के दौरान विवाह योग बनने की संभावना रहती है, लेकिन इसके लिए कुंडली में अन्य कारक ग्रहों का भी सहयोग आवश्यक है। यदि शनि गोचर के दौरान गुरु गोचर या शुक्र गोचर भी है, तो विवाह योग और भी मजबूत हो जाता है।
शनि गोचर की अवधि 2 वर्ष 6 माह होती है, और इस दौरान विवाह योग बनने की संभावना रहती है।
मांगलिक दोष विवाह में विलंब का प्रमुख कारण माना जाता है। यदि कुंडली में मंगल 4थे, 7वें, या 8वें भाव में स्थित है, या मंगल की दृष्टि 7वें भाव पर है, तो मांगलिक दोष उत्पन्न होता है। इस दोष के कारण विवाह में विलंब होता है, और विवाह के पश्चात वैवाहिक जीवन में कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं।
मांगलिक दोष के निवारण के लिए मंगल ग्रह की पूजा, मंगलवार व्रत, और दान-पुण्य का विशेष महत्व है।
शनि की दृष्टि 7वें भाव पर विवाह में विलंब का कारण बन सकती है। शनि अशुभ ग्रह है, और इसकी दृष्टि 7वें भाव पर होने से विवाह में कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं। यदि शनि 7वें भाव या उसके स्वामी पर दृष्टि डालता है, तो विवाह में विलंब होता है, और वैवाहिक जीवन में कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं।
शनि की दृष्टि के निवारण के लिए शनि ग्रह की पूजा, शनिवार व्रत, और दान-पुण्य का विशेष महत्व है।
यदि 7वाँ भाव कमजोर है, तो विवाह में विलंब होता है। 7वाँ भाव कमजोर होने के कारण निम्नलिखित हो सकते हैं:
वृषभ राशि वालों के लिए शुक्र ग्रह की पूजा अत्यंत लाभकारी है। शुक्र ग्रह की पूजा करने से विवाह योग मजबूत होता है, और विवाह में विलंब समाप्त होता है। शुक्र ग्रह की पूजा के लिए शुक्रवार को शुक्र ग्रह के मंत्र का जाप करें।
शुक्र ग्रह का बीज मंत्र: ॐ द्रां दीं क्लीं श्रीं शुक्राय नमः
गुरु मंत्र जाप विवाह योग को मजबूत करता है। गुरु ग्रह की पूजा करने से विवाह में विलंब समाप्त होता है, और वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। गुरु ग्रह का बीज मंत्र: ॐ ग्रां ग्रीं गौरवे नमः
गुरु ग्रह की पूजा के लिए गुरुवार को विशेष महत्व है।
विवाह से पूर्व कुंडली मिलान करना अत्यंत आवश्यक है। कुंडली मिलान में अष्टकूट और दशकूट का विशेष महत्व है। यदि कुंडली मिलान में 28 से अधिक अंक हैं, तो विवाह योग अत्यंत शुभ होता है।
कुंडली मिलान में वृषभ राशि वालों के लिए वृषभ, कन्या, धनु, या मीन राशि वाले जीवनसाथी का मिलान सर्वोत्तम होता है।
दान-पुण्य विवाह में विलंब को समाप्त करता है। विवाह में विलंब होने पर गाय, भूमि, या वस्त्र दान करें। इसके अलावा, कन्या भ्रूण हत्या निवारण के लिए भी दान-पुण्य का विशेष महत्व है।
विवाह की उम्र का निर्धारण ग्रह दशाओं, गोचर, और कुंडली के बल के आधार पर किया जाता है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, विवाह की उम्र निम्नलिखित होती
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