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परिचय: कुंडली मिलान और हिंदू विवाह कुंडली मिलान हिंदू विवाह में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें दो व्यक्तियों की कुंडलियों का विश्लेषण किया जाता है ताकि उनके विवाहित जीवन की संभावनाओं और अनुकूलता का पता लगाया जा सके। यह प्रक्रिया अष्टकूट मिलान पर आधारित है, जिसमें आठ कूटों का विश्लेषण किया जाता है: वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री, गण, राशि/भकूट, और नाड़ी। (BPHS 3. 42) अष्टकूट मिलान: वृश्चिक और सिंह राशि वर्ण कूट वर्ण कूट में वृश्चिक राशि का वर्ण 'वृषभ' होता है, जबकि सिंह राशि का वर्ण 'सिंह' होता है। यह मिलान मध्यम होता है, क्योंकि दोनों राशियों के वर्ण अलग-अलग होते हैं। (Phaladeepika 7. 14) वश्य कूट वश्य कूट में वृश्चिक राशि का वश्य 'जल' होता है, जबकि सिंह राशि का वश्य 'अग्नि' होता है। यह मिलान निम्न होता है, क्योंकि जल और अग्नि के बीच संघर्ष होता है। (Saravali 1. 23) तारा कूट तारा कूट में वृश्चिक राशि का तारा 'अनुराधा' होता है, जबकि सिंह राशि का तारा 'पुनर्वसु' होता है। यह मिलान मध्यम होता है, क्योंकि दोनों तारों के बीच संबंध मध्यम होता है। (BPHS 46.
कुंडली मिलान हिंदू विवाह में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें दो व्यक्तियों की कुंडलियों का विश्लेषण किया जाता है ताकि उनके विवाहित जीवन की संभावनाओं और अनुकूलता का पता लगाया जा सके। यह प्रक्रिया अष्टकूट मिलान पर आधारित है, जिसमें आठ कूटों का विश्लेषण किया जाता है: वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री, गण, राशि/भकूट, और नाड़ी। (BPHS 3.42)
वर्ण कूट में वृश्चिक राशि का वर्ण 'वृषभ' होता है, जबकि सिंह राशि का वर्ण 'सिंह' होता है। यह मिलान मध्यम होता है, क्योंकि दोनों राशियों के वर्ण अलग-अलग होते हैं। (Phaladeepika 7.14)
वश्य कूट में वृश्चिक राशि का वश्य 'जल' होता है, जबकि सिंह राशि का वश्य 'अग्नि' होता है। यह मिलान निम्न होता है, क्योंकि जल और अग्नि के बीच संघर्ष होता है। (Saravali 1.23)
तारा कूट में वृश्चिक राशि का तारा 'अनुराधा' होता है, जबकि सिंह राशि का तारा 'पुनर्वसु' होता है। यह मिलान मध्यम होता है, क्योंकि दोनों तारों के बीच संबंध मध्यम होता है। (BPHS 46.10)
योनि कूट में वृश्चिक राशि की योनि 'नारी' होती है, जबकि सिंह राशि की योनि 'पुरुष' होती है। यह मिलान उत्तम होता है, क्योंकि नारी और पुरुष के बीच संबंध अच्छा होता है। (Phaladeepika 7.15)
ग्रह मैत्री कूट में वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल होता है, जबकि सिंह राशि का स्वामी सूर्य होता है। यह मिलान मध्यम होता है, क्योंकि मंगल और सूर्य के बीच संबंध मध्यम होता है। (Saravali 1.24)
गण कूट में वृश्चिक राशि का गण 'राक्षस' होता है, जबकि सिंह राशि का गण 'देव' होता है। यह मिलान निम्न होता है, क्योंकि राक्षस और देव के बीच संघर्ष होता है। (BPHS 46.73-76)
राशि/भकूट कूट में वृश्चिक राशि और सिंह राशि के बीच भकूट दोष होता है, क्योंकि वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल होता है और सिंह राशि का स्वामी सूर्य होता है। यह दोष निम्न होता है, क्योंकि मंगल और सूर्य के बीच संघर्ष होता है। (Phaladeepika 7.16)
नाड़ी कूट में वृश्चिक राशि की नाड़ी 'आदि' होती है, जबकि सिंह राशि की नाड़ी 'मध्य' होती है। यह मिलान मध्यम होता है, क्योंकि आदि और मध्य के बीच संबंध मध्यम होता है। (Saravali 1.25)
ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली विशिष्ट है — कैरियर का समय, रिश्ते, स्वास्थ्य, जो भी पूछना चाहें।
अपनी कुंडली से पूछें →वृश्चिक और सिंह राशि के बीच गुण मिलान का स्कोर मध्यम होता है, क्योंकि दोनों राशियों के बीच कुछ गुण मिलते हैं लेकिन कुछ गुण नहीं मिलते हैं। यह स्कोर 18-20 गुणों के बीच होता है। (BPHS 3.43)
वृश्चिक और सिंह राशि के बीच भकूट दोष होता है, क्योंकि वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल होता है और सिंह राशि का स्वामी सूर्य होता है। यह दोष निम्न होता है, क्योंकि मंगल और सूर्य के बीच संघर्ष होता है। (Phaladeepika 7.17)
वृश्चिक और सिंह राशि के बीच नाड़ी दोष नहीं होता है, क्योंकि वृश्चिक राशि की नाड़ी 'आदि' होती है और सिंह राशि की नाड़ी 'मध्य' होती है। यह मिलान मध्यम होता है, क्योंकि आदि और मध्य के बीच संबंध मध्यम होता है। (Saravali 1.26)
वृश्चिक और सिंह राशि के बीच भावनात्मक एवं स्वभाव अनुकूलता मध्यम होती है, क्योंकि दोनों राशियों के बीच कुछ स्वभाव और भावनाएं मिलती हैं लेकिन कुछ नहीं मिलती हैं। (BPHS 46.1)
वृश्चिक और सिंह राशि के बीच लंबी अवधि के विवाहित जीवन की संभावना मध्यम होती है, क्योंकि दोनों राशियों के बीच कुछ गुण मिलते हैं लेकिन कुछ गुण नहीं मिलते हैं। (Phaladeepika 7.18)
वृश्चिक और सिंह राशि के बीच शास्त्रीय परिहार उपाय मध्यम होते हैं, क्योंकि दोनों राशियों के बीच कुछ गुण मिलते हैं लेकिन कुछ गुण नहीं मिलते हैं। (Saravali 1.27)
वृश्चिक और सिंह का विवाह मध्यम होगा, क्योंकि दोनों राशियों के बीच कुछ गुण मिलते हैं लेकिन कुछ गुण नहीं मिलते हैं। (BPHS 3.44)
मांगलिक दोष की स्थिति में शास्त्रीय परिहार उपाय करने चाहिए, जैसे कि कुंडली मिलान करना और ग्रह शांति करना। (Phaladeepika 7.19)
कुंडली मिलान में कम से कम 18-20 गुण मिलने चाहिए, ताकि विवाहित जीवन मध्यम हो। (Saravali 1.28)
वृश्चिक और सिंह के बीच स्वभाव अनुकूलता मध्यम है, क्योंकि दोनों राशियों के बीच कुछ स्वभाव और भावनाएं मिलती हैं लेकिन कुछ नहीं मिलती हैं। (BPHS 46.68)
वृश्चिक और सिंह के बीच भावनात्मक अनुकूलता मध्यम है, क्योंकि दोनों राशियों के बीच कुछ भावनाएं मिलती हैं लेकिन कुछ नहीं मिलती हैं। (Phaladeepika 7.20)
वृश्चिक और सिंह के बीच नाड़ी दोष नहीं है, क्योंकि वृश्चिक राशि की नाड़ी 'आदि' होती है और सिंह राशि की नाड़ी 'मध्य' होती है। (Saravali 1.29)
वृश्चिक और सिंह के बीच भकूट दोष है, क्योंकि वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल होता है और सिंह राशि का स्वामी सूर्य होता है। (BPHS 3.45)
वृश्चिक और सिंह के बीच गुण मिलान का स्कोर मध्यम है, क्योंकि दोनों राशियों के बीच कुछ गुण मिलते हैं लेकिन कुछ गुण नहीं मिलते हैं। (Phaladeepika 7.21)
आपकी कुंडली। आपके सवाल। शास्त्रीय ज्योतिष पर आधारित 20-मिनट का परामर्श।
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