30 सेकंड में अपनी मुफ़्त कुंडली देखें
जन्म विवरण डालें — तुरंत अपनी कुंडली और मुफ़्त रीडिंग पाएँ, फिर 3 मिनट मुफ़्त सवाल पूछें। पूरा 20-मिनट का परामर्श ₹49 में — सिर्फ़ अगर आप चाहें।
कोई साइन-अप नहीं। या पूरा फ़ॉर्म खोलें.
✓ मुफ़्त कुंडली·✓ 3 मिनट मुफ़्त परामर्श·✓ ₹49 में 20-मिनट का परामर्श·✓ कोई OTP नहीं
31 अक्टूबर 2026 से गुरु सिंह में। धनु चंद्र राशि से यह नौवाँ भाव है। जनवरी 2027 में वक्री गुरु कर्क में लौटता है। dhanu guru gochar: अपनी कुंडली में देखें।
धनु चंद्र राशि वाले जातकों के लिए गुरु ग्रह 31 अक्टूबर 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेगा। धनु राशि से गिनने पर सिंह राशि नौवाँ भाव है, जो भाग्य, धर्म और उच्च शिक्षा से जुड़ा है। ज्योतिष में गोचर के परिणाम मुख्य रूप से चंद्र राशि से देखे जाते हैं, क्योंकि चंद्रमा मन और हमारी भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है, और गोचर का प्रभाव हमारे दैनिक जीवन और मानसिक स्थिति पर कैसे पड़ता है, यह चंद्र राशि से ही पता चलता है।
अगर आपको अपनी चंद्र राशि नहीं पता है, तो आप अपनी जन्म कुंडली देखकर इसका पता लगा सकते हैं। जन्म कुंडली में चंद्रमा जिस राशि में बैठा होता है, वही आपकी चंद्र राशि कहलाती है। यह आपकी व्यक्तिगत ज्योतिषीय पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो गोचर के प्रभावों को समझने में मदद करता है।
धनु चंद्र राशि वालों के लिए गुरु का यह गोचर कई पड़ावों से होकर गुजरेगा:
धनु चंद्र राशि वालों के लिए गुरु का सिंह राशि में गोचर नौवें भाव में होता है। परंपरा में चंद्र राशि से नौवें भाव में गुरु का गोचर बेहद अनुकूल माना जाता है। इस दौरान आपको भाग्य का साथ मिल सकता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की संभावना रहती है।
सिंह राशि का स्वामी सूर्य है, जो गुरु का मित्र है। इसलिए सिंह राशि गुरु के लिए मित्र की राशि है। इस स्थिति में गुरु आपको शुभ फल देने में सक्षम होता है। इस दौर में आप निम्न बातों पर ध्यान दे सकते हैं:
ज्योतिष में गुरु की दृष्टियाँ भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, क्योंकि गुरु जहाँ बैठता है, वहाँ के साथ-साथ जिन भावों को देखता है, उन पर भी अपना शुभ प्रभाव डालता है। सिंह राशि में रहते हुए गुरु की दृष्टियाँ इन भावों पर पड़ेंगी:
ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली अलग है: कैरियर का समय, रिश्ते, जो भी पूछना चाहें।
अपनी कुंडली मुफ़्त देखें →जब गुरु वक्री होकर 25 जनवरी 2027 को कर्क राशि में वापस जाएगा और 26 जून 2027 तक वहीं रहेगा, तो यह धनु चंद्र राशि से आठवें भाव में गोचर करेगा। परंपरा में आठवें भाव का गोचर मिला-जुला माना जाता है।
कर्क राशि में गुरु उच्च का होता है, इसलिए इसकी शक्ति बढ़ जाती है। हालाँकि, आठवाँ भाव अचानक बदलाव, रुकावटों और अनिश्चितताओं से जुड़ा है। इस दौरान आपको निम्न बातों पर ध्यान देना पड़ सकता है:
यह समझना ज़रूरी है कि गोचर का असर हर व्यक्ति की पूरी कुंडली, जन्म के गुरु की स्थिति, लग्न और चल रही दशा से तय होता है। ऊपर बताई गई बातें सामान्य परंपरा पर आधारित हैं। अपनी कुंडली में यह देखना महत्वपूर्ण है कि जन्म के समय गुरु कहाँ था, आपकी लग्न राशि क्या है, और वर्तमान में कौन सी दशा चल रही है। ये सभी कारक मिलकर गोचर के वास्तविक प्रभाव को निर्धारित करते हैं। आप अपनी कुंडली मुफ़्त देखकर इन प्रभावों को और गहराई से समझ सकते हैं।
गुरु 31 अक्टूबर 2026 को सिंह राशि में आएगा और दो चरणों में, बीच में कर्क में वापसी के साथ, 26 नवंबर 2027 तक सिंह राशि में रहेगा। इसके बाद यह कन्या राशि में चला जाएगा।
वक्री गुरु का मतलब है कि पृथ्वी से देखने पर गुरु पीछे की ओर चलता हुआ दिखाई देता है। यह स्थिति 13 दिसंबर 2026 से शुरू होगी और ज्योतिष में इसे आत्म-चिंतन और पिछले निर्णयों पर विचार करने का समय माना जाता है।
धनु चंद्र राशि वालों के लिए गुरु का सिंह राशि में गोचर (नौवें भाव में) परंपरा में अनुकूल माना जाता है, खासकर भाग्य, धर्म और गुरुओं के सहयोग के लिए। हालाँकि, कर्क में वापसी के दौरान (आठवें भाव में) कुछ रुकावटें या अचानक बदलाव आ सकते हैं।
गुरु की दृष्टियाँ उन भावों पर शुभ प्रभाव डालती हैं जिन पर यह दृष्टि डालता है। सिंह राशि से गुरु की पाँचवीं दृष्टि धनु पर, सातवीं कुंभ पर और नौवीं मेष पर पड़ेगी, जो क्रमशः आपके व्यक्तित्व, संचार और संतान/शिक्षा के क्षेत्रों को प्रभावित करेंगी।
कर्क में वापसी के दौरान गुरु धनु राशि से आठवें भाव में रहेगा। यह समय अचानक बदलाव, रुकावटों और खर्चों पर ध्यान देने वाला हो सकता है, लेकिन कर्क में गुरु उच्च का होने से यह चुनौतियों के बावजूद कुछ सकारात्मक परिणाम भी दे सकता है।
आपकी चंद्र राशि जानने के लिए आपको अपनी जन्म कुंडली देखनी होगी। जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में स्थित होता है, वही आपकी चंद्र राशि होती है।
परंपरा में नौवें भाव में गुरु का गोचर शुभ माना जाता है, लेकिन गोचर का अंतिम प्रभाव आपकी जन्म कुंडली में गुरु की स्थिति, लग्न और चल रही दशा पर निर्भर करता है। हर व्यक्ति के लिए इसका अनुभव अलग हो सकता है।
सिंह राशि का स्वामी सूर्य गुरु का मित्र है, इसलिए सिंह राशि गुरु के लिए एक मित्र की राशि है। इस स्थिति में गुरु आमतौर पर अच्छे परिणाम देने में सक्षम होता है।
यह गोचर मुख्य रूप से आपके भाग्य, धर्म, उच्च शिक्षा, गुरुओं और बड़े-बुजुर्गों के साथ संबंधों को प्रभावित करेगा। दृष्टियों के कारण आपका व्यक्तित्व, संचार और संतान/शिक्षा से जुड़े मामले भी प्रभावित हो सकते हैं।
आपकी सटीक जन्म कुंडली और मुफ़्त रीडिंग, तुरंत। फिर अपने सवाल पूछें — 3 मिनट मुफ़्त, पूरा 20-मिनट का परामर्श ₹49 में।
मेरी मुफ़्त कुंडली देखें →