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31 अक्टूबर 2026 से गुरु सिंह में। कन्या चंद्र राशि से यह बारहवाँ भाव है। जनवरी 2027 में वक्री गुरु कर्क में लौटता है। kanya guru gochar: अपनी कुंडली देखें।
31 अक्टूबर 2026 को गुरु सिंह राशि में प्रवेश कर रहा है। कन्या चंद्र राशि वाले जातकों के लिए, सिंह राशि आपकी चंद्र राशि से बारहवाँ भाव है। परंपरा में इस भाव में गुरु का गोचर मिला-जुला फल देने वाला माना जाता है, जहाँ खर्च, दूरी और यात्रा पर विशेष ध्यान देना पड़ सकता है।
ज्योतिष में गोचर का विश्लेषण चंद्र राशि से किया जाता है, क्योंकि चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक है। गोचर के ग्रह हमारी मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर कैसे असर डालते हैं, यह जानने के लिए चंद्र राशि को आधार माना जाता है। अगर आपको अपनी चंद्र राशि नहीं पता है, तो आप अपनी जन्म कुंडली देखकर इसका पता लगा सकते हैं।
गुरु का सिंह राशि में यह गोचर कई चरणों में होगा, जिसमें वक्री और मार्गी चाल भी शामिल है। आपकी कन्या चंद्र राशि के लिए इन चरणों को समझना ज़रूरी है:
जब कोई ग्रह वक्री होता है, तो ऐसा माना जाता है कि उसकी ऊर्जा आंतरिक हो जाती है, और वह बीते हुए मामलों पर फिर से विचार करने या उन्हें ठीक करने का अवसर देता है। मार्गी होने पर ग्रह अपनी सीधी चाल पर लौट आता है और उसके प्रभाव में तेज़ी आती है।
कन्या चंद्र राशि से गिनने पर सिंह राशि बारहवाँ भाव है। परंपरा में, बारहवाँ भाव खर्च, दूरी, यात्रा, दान, त्याग, नींद और आध्यात्मिक खोज से जुड़ा होता है। इस भाव में गुरु का गोचर आमतौर पर मिला-जुला माना जाता है।
सिंह राशि में गुरु न तो उच्च का होता है और न ही नीच का। सिंह का स्वामी सूर्य गुरु का मित्र है, इसलिए गुरु यहाँ मित्र की राशि में होता है, जो उसके प्रभाव को संतुलित रखता है।
गुरु जहाँ बैठता है, वहाँ से अपनी पाँचवीं, सातवीं और नौवीं दृष्टि से अन्य भावों को भी प्रभावित करता है। कन्या चंद्र राशि के लिए, सिंह राशि में स्थित गुरु की दृष्टियाँ इस प्रकार होंगी:
गुरु की पाँचवीं दृष्टि कन्या राशि से चौथे भाव (धनु राशि) पर पड़ेगी। परंपरा में, चौथा भाव घर, परिवार, माता, सुख और आंतरिक शांति का प्रतिनिधित्व करता है। इस दृष्टि से आपके घर-परिवार में सुख-शांति का माहौल बन सकता है। घर से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है या आप घर में सुधार करने के बारे में सोच सकते हैं। यह दृष्टि आपके मन को शांत और स्थिर रखने में मदद कर सकती है।
गुरु की सातवीं दृष्टि कन्या राशि से छठे भाव (कुंभ राशि) पर पड़ेगी। छठा भाव ऋण, शत्रु, रोग और सेवा से संबंधित होता है। परंपरा में माना जाता है कि गुरु की यह दृष्टि आपको अपने विरोधियों पर विजय दिलाने में मदद कर सकती है। यदि कोई पुराना ऋण है, तो उसे चुकाने का अवसर मिल सकता है। स्वास्थ्य से जुड़ी छोटी-मोटी परेशानियाँ भी इस दौरान कम हो सकती हैं। यह समय सेवा भाव से काम करने के लिए भी अच्छा है।
गुरु की नौवीं दृष्टि कन्या राशि से आठवें भाव (मेष राशि) पर पड़ेगी। आठवाँ भाव अचानक होने वाले बदलावों, आयु, विरासत और गूढ़ विषयों का प्रतिनिधित्व करता है। गुरु की यह दृष्टि आपको गूढ़ विद्याओं या ज्योतिष में रुचि दिला सकती है। अचानक से कुछ ऐसे बदलाव आ सकते हैं जो आपके लिए लाभकारी हों। यह दृष्टि आपको किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने में मार्गदर्शन दे सकती है।
ऊपर का लेख सामान्य स्थिति का है। आपकी कुंडली अलग है: कैरियर का समय, रिश्ते, जो भी पूछना चाहें।
अपनी कुंडली मुफ़्त देखें →जैसा कि हमने देखा, गुरु 25 जनवरी 2027 से 26 जून 2027 तक वक्री होकर कर्क राशि में वापस आएगा। कन्या चंद्र राशि से गिनने पर कर्क राशि ग्यारहवाँ भाव है। परंपरा में, ग्यारहवाँ भाव लाभ, दोस्त, बड़े भाई-बहन और इच्छाओं की पूर्ति से जुड़ा है।
कर्क राशि में गुरु उच्च का होता है, इसलिए इस अवधि में गुरु बहुत बलवान होता है। परंपरा में इस गोचर को अत्यंत शुभ और अनुकूल माना जाता है। इस दौरान आपकी कई इच्छाएँ पूरी हो सकती हैं। आपको दोस्तों और बड़े भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा। आय में वृद्धि या किसी नए लाभ का स्रोत भी बन सकता है। यह समय आपके सामाजिक दायरे को बढ़ाने और नए संपर्क बनाने के लिए भी अच्छा है।
गुरु का गोचर एक सामान्य प्रभाव बताता है, लेकिन हर व्यक्ति पर इसका असर उसकी अपनी जन्म कुंडली के हिसाब से अलग होता है। अपनी कुंडली में गहराई से देखने के लिए, आपको कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए:
यह सभी कारक मिलकर तय करते हैं कि गुरु का यह गोचर आपके लिए कितना शुभ या चुनौतीपूर्ण होगा। आप अपनी कुंडली मुफ़्त देखें और इन सभी बातों को विस्तार से समझें।
गुरु 31 अक्टूबर 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेगा और फिर 25 जनवरी 2027 तक सिंह में रहेगा। इसके बाद, वक्री होकर कर्क में वापस जाएगा और 26 जून 2027 को फिर से सिंह में आएगा, जहाँ वह 26 नवंबर 2027 तक रहेगा।
कन्या चंद्र राशि से गिनने पर सिंह राशि बारहवाँ भाव है। परंपरा में यह खर्च, दूरी, यात्रा और आध्यात्मिक विषयों से जुड़ा होता है।
जब गुरु वक्री होता है, यानी उल्टी चाल चलता है, तो परंपरा में माना जाता है कि उसकी ऊर्जा आंतरिक हो जाती है। यह समय बीते हुए मामलों पर फिर से विचार करने या उन्हें ठीक करने का अवसर देता है।
गुरु 25 जनवरी 2027 से 26 जून 2027 तक कर्क राशि में वापस आएगा, जो कन्या राशि से ग्यारहवाँ भाव है। कर्क में गुरु उच्च का होता है, और परंपरा में यह गोचर लाभ, दोस्त और इच्छाओं की पूर्ति के लिए बहुत अनुकूल माना जाता है।
सिंह राशि में स्थित गुरु की पाँचवीं दृष्टि धनु पर (कन्या से चौथा भाव), सातवीं दृष्टि कुंभ पर (कन्या से छठा भाव), और नौवीं दृष्टि मेष पर (कन्या से आठवाँ भाव) पड़ेगी। ये दृष्टियाँ इन भावों से संबंधित क्षेत्रों को प्रभावित करेंगी।
गुरु का सिंह राशि में गोचर, कन्या राशि के लिए बारहवें भाव में, मिला-जुला फल देने वाला माना जाता है। कर्क में वापसी का दौर (ग्यारहवाँ भाव) बहुत शुभ है। आपके लिए व्यक्तिगत रूप से यह कैसा रहेगा, यह आपकी जन्म कुंडली में गुरु की स्थिति, लग्न और चल रही दशा पर निर्भर करता है।
नहीं, सिंह राशि में गुरु न उच्च का होता है, न नीच का। सिंह का स्वामी सूर्य गुरु का मित्र है, इसलिए सिंह गुरु के लिए मित्र की राशि है। गुरु कर्क राशि में उच्च का होता है।
परंपरा में माना जाता है कि आपको अपने खर्चों पर ध्यान देना चाहिए, यात्राओं की योजना बनाते समय सावधानी बरतनी चाहिए, और आध्यात्मिक विकास पर जोर देना चाहिए। कर्क में वापसी के दौरान लाभ और सामाजिक संबंधों पर ध्यान देना अच्छा रहेगा।
आपकी सटीक जन्म कुंडली और मुफ़्त रीडिंग, तुरंत। फिर अपने सवाल पूछें — 3 मिनट मुफ़्त, पूरा 20-मिनट का परामर्श ₹49 में।
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